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गोरखपुर। पूर्वांचल में पोल्ट्री उद्योग को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से रविवार को प्रथम गोरखपुर पोल्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। इसमें पोल्ट्री क्षेत्र से जुड़े किसानों, उद्यमियों, विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन, जैव-सुरक्षा, रोग नियंत्रण, उत्पादन और विपणन सहित विभिन्न विषयों पर मंथन किया। इस दौरान पशुपालन विभाग और कई उद्यमियों के बीच पोल्ट्री क्षेत्र में करीब 100 करोड़ रुपये के निवेश के लिए एमओयू हुआ।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि कृषि और पशुपालन के साथ पोल्ट्री उद्योग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर किसानों और युवाओं के लिए रोजगार व स्वरोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। विधायक महेंद्रपाल सिंह और प्रदीप शुक्ल ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में पोल्ट्री उद्योग की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत बताई।
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने कहा कि पशुपालन और पोल्ट्री क्षेत्र पोषण सुरक्षा के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। वैज्ञानिक पद्धति, आधुनिक प्रबंधन और बेहतर बाजार व्यवस्था से इस क्षेत्र को और मजबूत किया जा सकता है।
100 करोड़ के निवेश का एमओयू
कॉन्क्लेव के संयोजक डॉ. संजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पोल्ट्री उद्योग में करीब 100 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश के लिए एमओयू हुआ है। पशुपालन विभाग के साथ एमओयू करने वालों में आबाद हबीब, मोनू खान, स्वतंत्रवीर, फैज अहमद, दीपक सिंह, राजू सिंह, चंपारण एग्रो, शत्रुजीत सिंह और विनोद कुमार सिंह शामिल रहे।
तकनीकी सत्र में पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के डॉ. पंकज कुमार शुक्ला सहित अन्य विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक पोल्ट्री उत्पादन, अनुसंधान, प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन की आवश्यकता बताई। विशेषज्ञों ने कहा कि पोल्ट्री उद्योग अब केवल अंडा और मांस उत्पादन तक सीमित नहीं है। चूजा उत्पादन, हैचरी, संतुलित पोषण, रोग नियंत्रण, जैव-सुरक्षा, आधुनिक आवास और विपणन सहित कई क्षेत्रों में रोजगार व उद्यमिता की संभावनाएं हैं।
वक्ताओं ने छोटे और मध्यम पोल्ट्री पालकों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने तथा महिला एवं युवा उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया। कहा कि पूर्वांचल में बढ़ती मांग, उपलब्ध बाजार और युवाओं की उद्यमशीलता को देखते हुए पोल्ट्री उद्योग आर्थिक विकास का मजबूत माध्यम बन सकता है। इसके लिए किसानों, उद्यमियों, वैज्ञानिकों, पशुचिकित्सकों, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

