निधन के बाद भी रोशनी बांट गए रामेश्वर दत्त मिश्र, नेत्रदान से दो युवाओं की दुनिया हुई रोशन

Estimated reading time: 1 minute

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पुत्र आशुतोष मिश्र सम्मानित, पिता की आंखों से मिली नई जिंदगी की खबर ने परिवार को दिया आत्मिक संतोष

चाय पंचायत, गोरखपुर।

कुछ लोग जीवन में ऐसा काम कर जाते हैं कि उनके जाने के बाद भी उनकी मौजूदगी महसूस होती रहती है। रामेश्वर दत्त मिश्र भी ऐसी ही प्रेरणादायी शख्सियत थे। जीवनभर मानव सेवा को महत्व देने वाले रामेश्वर दत्त मिश्र निधन के बाद भी दो युवाओं की जिंदगी में रोशनी छोड़ गए। 21 अगस्त 2026 को निधन के बाद परिजनों ने उनका नेत्रदान कराया। उनके दान किए गए कॉर्निया से दो युवाओं को दृष्टि मिलने की जानकारी परिवार को दी गई तो शोक के बीच गर्व और आत्मिक संतोष का भाव भी उमड़ पड़ा।

पिता के अंतिम संकल्प को बेटे ने बनाया सेवा का माध्यम

रामेश्वर दत्त मिश्र के निधन के बाद पूरा परिवार गहरे सदमे में था। इसी बीच परिवार ने नेत्रदान का निर्णय लिया। उनकी सेवा भावना को आगे बढ़ाते हुए पुत्र आशुतोष मिश्र ने अपनी माता से अनुमति ली और बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर की टीम से संपर्क किया। मेडिकल टीम ने परिजनों को पूरी प्रक्रिया समझाई और करीब 45 मिनट के भीतर दोनों कॉर्निया सुरक्षित कर लिए।

आज जब परिवार को यह पता चला कि रामेश्वर दत्त मिश्र की आंखों की रोशनी से दो युवाओं के जीवन में उजाला आया है तो उनके लिए यह भावुक कर देने वाला क्षण था।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में आशुतोष मिश्र सम्मानित

गुरुवार सुबह आठ बजे बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर में आयोजित नेत्रदान जागरूकता कार्यक्रम में रामेश्वर दत्त मिश्र के पुत्र आशुतोष मिश्र को सम्मानित किया गया। उन्हें दिए गए सम्मान-पत्र में नेत्रदान जैसे महादान में परिवार के विशेष सहयोग की सराहना की गई।

इस अवसर पर आशुतोष मिश्र ने भावुक होकर कहा कि पिता के निधन के बाद पूरा परिवार दुख में था। उसी समय नेत्रदान की बात सामने आई। माता की अनुमति लेकर मेडिकल टीम को सूचना दी गई। आज यह जानकर गर्व और आत्मिक संतोष है कि पिता की आंखों की रोशनी से दो युवाओं की जिंदगी रोशन हुई है। शरीर भले ही हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी आंखों का प्रकाश आज भी जीवित है।

पांच लोगों को प्रेरित करने की अपील

आशुतोष मिश्र ने लोगों से नेत्रदान के प्रति जागरूक होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास केवल पांच लोगों को भी नेत्रदान के लिए प्रेरित करे तो समाज में बड़ा बदलाव आ सकता है। इससे कई जरूरतमंद लोगों के जीवन में रोशनी लौटाई जा सकती है।

समारोह में नेत्रदान के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने में विशेष भूमिका निभाने वाले डॉ. आर. पी. विश्वकर्मा, सुनील चंद, अरविंद वर्मा और प्रिंस पांडेय भी उपस्थित रहे।

नेत्रदान को लेकर भ्रांतियां दूर करने पर जोर

कार्यक्रम में नेत्र विभाग के विभागाध्यक्ष ने नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि नेत्रदान की प्रक्रिया सरल है। आधुनिक चिकित्सा तकनीक की मदद से कम समय में कॉर्निया सुरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में नेत्रदान के लिए आगे आने की अपील की।

आंखें बंद हुईं, लेकिन दो जिंदगियों में खुली रोशनी

रामेश्वर दत्त मिश्र का नेत्रदान उनके परिवार के लिए केवल गर्व और संतोष का विषय नहीं है, बल्कि समाज के लिए भी मानवता और सेवा का प्रेरक संदेश है। उन्होंने जीवनभर सेवा को महत्व दिया और अंतिम विदाई के बाद भी दो युवाओं की दुनिया रोशन कर गए।

Leave a Reply