Gorakhpur Navratri: वन देवी से प्रकृति संरक्षण, नरसिंह अवतार से धर्म की शक्ति का संदेश देगी मां दुर्गा की प्रतिमाएं

Estimated reading time: 1 minute

नवरात्र में पंडालों में सजेगा आस्था और कल्पना का अनूठा संसार

गोरखनाथ मंदिर परिसर में 100 से अधिक मूर्तिकार बना रहे 400 से ज्यादा छोटी-बड़ी प्रतिमाएं

7 फीट की वन देवी और नरसिंह अवतार होंगे खास आकर्षण

@आशुतोष मिश्र, चाय पंचायत

गोरखपुर। मिट्टी अभी गीली है, प्रतिमाएं अधूरी हैं और चेहरे पर रंग चढ़ना बाकी है। कहीं हाथों में आकार आ रहा है तो कहीं आंखों की भाव-भंगिमा गढ़ी जा रही है। लेकिन मूर्तिकारों की कल्पना में नवरात्र के पंडालों का पूरा दृश्य तैयार है। कुछ दिनों बाद यही मिट्टी मां दुर्गा के दिव्य स्वरूप में श्रद्धालुओं के सामने होगी। कहीं 7 फीट ऊंची वन देवी प्रकृति की रक्षा का संदेश देती नजर आएंगी तो कहीं भगवान नरसिंह का विराट रूप धर्म की शक्ति और अधर्म के अंत की कथा को जीवंत करेगा।
गोरखपुर में नवरात्र की तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर में पंडालों का निर्माण शुरू हो चुका है। वहीं गोरखनाथ मंदिर परिसर में 100 से अधिक मूर्तिकार 400 से ज्यादा छोटी-बड़ी प्रतिमाओं को आकार देने में जुटे हैं। यहां तैयार होने वाली प्रतिमाओं को नवरात्र के दौरान अलग-अलग पंडालों में सजाया जाएगा। इस बार पारंपरिक प्रतिमाओं के साथ नई थीम पर तैयार की जा रही प्रतिमाएं और झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
7 फीट की वन देवी बताएंगी प्रकृति बचाने का महत्व
इस बार की सबसे खास और नई कल्पना 7 फीट ऊंची वन देवी की है। मां दुर्गा के स्वरूप में तैयार की जा रही वन देवी को पेड़-पौधों और प्राकृतिक परिवेश के बीच दिखाया जाएगा। उनके स्वरूप के माध्यम से प्रकृति और वन संरक्षण का संदेश देने की तैयारी है।
नवरात्र के दौरान जब श्रद्धालु पंडाल में पहुंचेंगे और उनके सामने वन देवी का विराट स्वरूप आएगा तो धार्मिक आस्था के साथ उन्हें पेड़-पौधों की रक्षा का संदेश भी मिलेगा। प्रतिमा के आसपास प्राकृतिक परिवेश को उभारने का प्रयास किया जाएगा, ताकि देवी के स्वरूप और प्रकृति के बीच संबंध स्पष्ट दिखाई दे।
यह थीम इसलिए भी अलग होगी क्योंकि यहां देवी की आराधना के साथ प्रकृति के संरक्षण की बात भी सामने आएगी। प्रतिमा श्रद्धालुओं को कुछ देर ठहरकर देखने और उसके पीछे छिपे संदेश को समझने के लिए आकर्षित करेगी।

नरसिंह अवतार में दिखेगी धर्म की शक्ति
वन देवी के साथ भगवान नरसिंह के अवतार की थीम भी तैयार की जा रही है। भगवान विष्णु के नरसिंह रूप से जुड़ी धार्मिक कथा को प्रतिमा और दृश्य संयोजन के माध्यम से सामने लाने की तैयारी है।
नरसिंह अवतार का विराट स्वरूप धर्म की रक्षा और अधर्म के अंत की कथा को जीवंत करेगा। भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु से जुड़े प्रसंग को भी दृश्य रूप में उभारने का प्रयास किया जा रहा है। श्रद्धालुओं को पंडाल में केवल प्रतिमा के दर्शन नहीं होंगे, बल्कि धार्मिक प्रसंग को सामने देखकर कथा की अनुभूति भी होगी।

एआई से तैयार चित्रों को देखकर गढ़ी जा रही प्रतिमाएं
नई थीम को आकार देने में आधुनिक तकनीक की भी मदद ली जा रही है। मूर्तिकार बबलू सिंह (बी पाल) के अनुसार एआई से तैयार किए गए चित्रों को देखकर प्रतिमाओं की कल्पना और रूपरेखा तय की गई है। इन चित्रों में दिखाई गई कल्पना को मिट्टी में उतारने का काम मूर्तिकार अपने अनुभव और कला के आधार पर कर रहे हैं।
एआई से चित्र तैयार हो जाना एक बात है, लेकिन उसे वास्तविक प्रतिमा में बदलना पूरी तरह मूर्तिकार की कला पर निर्भर है। बांस और लकड़ी से ढांचा तैयार करने के बाद उस पर मिट्टी चढ़ाई जाती है। इसके बाद प्रतिमा के चेहरे की भाव-भंगिमा, आंखों की बनावट, हाथों की मुद्रा और आभूषणों की बारीकियां उकेरी जाती हैं। अंत में रंग-रोगन और सजावट से प्रतिमा को अंतिम रूप दिया जाएगा।
गोरखनाथ मंदिर परिसर में इन दिनों यही प्रक्रिया लगातार चल रही है। कोई मूर्तिकार मिट्टी का आकार दे रहा है तो कोई चेहरे को अंतिम रूप देने में जुटा है। विशाल प्रतिमाओं के ढांचे पर कई कलाकार एक साथ काम कर रहे हैं।
400 से ज्यादा प्रतिमाओं में दिखेंगे आस्था के अलग-अलग रूप
गोरखनाथ मंदिर परिसर में तैयार हो रही 400 से अधिक छोटी-बड़ी प्रतिमाओं में देवी-देवताओं के अलग-अलग स्वरूप देखने को मिलेंगे। भैरवनाथ समेत विभिन्न धार्मिक पात्रों और प्रसंगों से जुड़ी प्रतिमाएं भी तैयार की जा रही हैं।
छोटी प्रतिमाओं से लेकर 7 फीट ऊंची वन देवी तक, हर प्रतिमा पर अलग-अलग स्तर पर काम चल रहा है। आकार के अनुसार इनके निर्माण में समय और श्रम अलग-अलग लग रहा है। बड़ी प्रतिमाओं में ढांचा तैयार करने से लेकर मिट्टी चढ़ाने और बारीक काम तक कई चरणों से गुजरना पड़ता है।
नवरात्र नजदीक आने के साथ इन प्रतिमाओं पर रंग-रोगन और सजावट का काम तेज होगा। इसके बाद इन्हें संबंधित पंडालों तक पहुंचाकर स्थापित किया जाएगा।

पंडालों में दिखेगा अलग-अलग थीम का संसार
शहर के विभिन्न हिस्सों में पंडालों का निर्माण भी शुरू हो गया है। पूजा समितियां अपनी-अपनी थीम के अनुसार पंडाल तैयार करा रही हैं। कहीं धार्मिक प्रसंगों को प्रमुखता दी जा रही है तो कहीं सामाजिक संदेश से जुड़ी झांकियों की तैयारी है।
प्रतिमाओं के साथ विद्युत सज्जा भी पंडालों के आकर्षण को बढ़ाएगी। नवरात्र शुरू होने के बाद शाम होते ही जब पंडाल रोशनी से जगमगाएंगे, मां के जयकारे गूंजेंगे और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी तो इन प्रतिमाओं का स्वरूप और भी प्रभावशाली दिखाई देगा।
गोरखनाथ मंदिर परिसर में अभी जो प्रतिमाएं अधूरी दिखाई दे रही हैं, नवरात्र शुरू होते ही उनका रूप पूरी तरह बदल जाएगा। मिट्टी और बांस का ढांचा रंगों, आभूषणों और सजावट के बाद देवी-देवताओं के जीवंत स्वरूप में सामने आएगा।
श्रद्धालु जब पंडालों में पहुंचेंगे तो उन्हें मां दुर्गा के पारंपरिक स्वरूप के साथ नई कल्पनाओं से जुड़ी प्रतिमाएं भी देखने को मिलेंगी। वन देवी प्रकृति की रक्षा का संदेश देंगी, नरसिंह अवतार धर्म की शक्ति की कथा सुनाएगा और भैरवनाथ समेत अन्य प्रतिमाएं आस्था के विविध रंग दिखाएंगी।
नवरात्र की पहली सुबह से ही शहर में भक्ति का वातावरण बनने लगेगा। मंदिरों में घंटे-घड़ियाल बजेंगे, पंडालों में मां के जयकारे गूंजेंगे और श्रद्धालु दर्शन के लिए निकलेंगे। उस समय गोरखनाथ मंदिर परिसर में महीनों की मेहनत से गढ़ी गई प्रतिमाएं अलग-अलग पंडालों में अपनी जगह ले चुकी होंगी।

Leave a Reply