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हरबर्ट बांध पर हादसा, 40 वर्षीय रमेश कनौजिया ने तोड़ा दम; पहले भी कई लोग हो चुके हैं घायल, प्रतिबंधित मांझे की बिक्री पर उठे सवाल
गोरखपुर। जानलेवा मांझे ने एक और जिंदगी छीन ली। तिवारीपुर थाना क्षेत्र के इलाहीबाग स्थित हरबर्ट बांध पर शनिवार दोपहर मोटरसाइकिल से जा रहे माधोपुर निवासी रमेश कनौजिया (40) की गर्दन में अचानक धारदार धागा उलझ गया। गर्दन कटने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। जिला अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि हादसा प्रतिबंधित चाइनीज मांझे से हुआ, हालांकि पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
गोरखपुर में मांझे से गर्दन कटने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी शहर के अलग-अलग इलाकों में कई लोग इसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। किसी की गर्दन पर गहरा घाव हुआ तो किसी को कई टांके लगवाने पड़े। लगातार सामने आ रही घटनाओं के बावजूद ऐसे हादसों पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। रमेश की मौत ने प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर निगरानी को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहले भी कई लोग हो चुके हैं घायल
शहर में मांझे से गर्दन कटने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। 27 मार्च 2023 को हुमायूंपुर उत्तरी निवासी विजय प्रकाश चौधरी तरंग क्रासिंग के पास मांझे की चपेट में आ गए थे। गर्दन पर गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें 37 टांके लगाने पड़े थे। वर्ष 2023 में सूरजकुंड ओवरब्रिज पर सुहानी गुप्ता की गर्दन भी मांझे से कट गई थी।
31 जुलाई 2025 को सूरजकुंड ओवरब्रिज पर बाइक से अपनी मां को लेकर जा रहे अमित गुप्ता की गर्दन मांझे से गंभीर रूप से कट गई थी। गर्दन की नसें क्षतिग्रस्त होने से उनकी हालत गंभीर हो गई थी।
अगस्त 2026 में भी ऐसी घटनाएं सामने आईं। 16 अगस्त को हरबर्ट बांध पर घर लौट रहे कारोबारी मनोज कुमार बरनवाल की गर्दन मांझे से कट गई थी। उन्हें आठ से दस टांके लगाने पड़े थे। घटना के बाद पुलिस ने पतंग और मांझा बेचने वाली दुकानों की जांच की थी। इसके दो दिन बाद 18 अगस्त को गीडा क्षेत्र के नौसड़ में बाइक से जा रहे किसान रामप्रताप निषाद की गर्दन भी मांझे से कट गई थी। उपचार के दौरान उन्हें सात टांके लगाने पड़े थे।
धागा लगने से हुई मौत
क्षेत्राधिकारी कोतवाली ओंकार दत्त तिवारी ने बताया कि शनिवार दोपहर मोटरसाइकिल सवार की गर्दन पर धागा लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मौत हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामले में आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने चाइनीज मांझे से गर्दन कटने की बात कही है, लेकिन पुलिस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि हादसे में इस्तेमाल हुआ धागा सामान्य पतंग का मांझा था या प्रतिबंधित चाइनीज मांझा। इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
परिवार का छीना सहारा
रमेश कनौजिया की अचानक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों के मुताबिक, वह परिवार की आजीविका का प्रमुख सहारा थे। उनकी मौत के बाद पत्नी और बच्चों के सामने भविष्य की चिंता खड़ी हो गई है।
