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हाथी-घोड़ों के साथ निकली धार्मिक यात्रा, विभिन्न मंदिरों में पूजन-अर्चन के बाद यज्ञ स्थल पहुंचीं कन्याएं; 31 अक्टूबर को पूर्णाहुति और एक नवंबर को भंडारा
गोरखपुर। कुसम्ही क्षेत्र के ग्रामसभा मठिया में शुक्रवार को नौ दिवसीय श्री श्री रुद्र महायज्ञ का शुभारंभ विधि-विधान से पूजन-अर्चन और भव्य कलश शोभायात्रा के साथ हुआ। भगवान गणेश के पूजन और मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की प्रतीक नौ कन्याओं की आराधना के बाद हाथी-घोड़ों के साथ शोभायात्रा निकाली गई। विभिन्न मंदिरों में दर्शन-पूजन करते हुए यात्रा यज्ञ स्थल पर पहुंची। इस दौरान देवी-देवताओं के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।
महायज्ञ के यज्ञाचार्य पंडित हरिश्चंद्र उपाध्याय ने बताया कि सनातन परंपरा में किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश का पूजन किया जाता है। उन्हें विघ्नहर्ता माना गया है। इसी परंपरा के अनुसार महायज्ञ के शुभारंभ पर गणेश पूजन के बाद नौ कन्याओं की आराधना की गई। नौ कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानकर उनकी पूजा की जाती है। इसका उद्देश्य सुख-समृद्धि, शांति और लोककल्याण की कामना करना है।
कई मंदिरों में हुआ पूजन-अर्चन
ग्रामसभा मठिया से निकली शोभायात्रा सबसे पहले रमवापुर स्थित भगवान भोलेनाथ के मंदिर पहुंची। यहां पूजन-अर्चन के बाद यात्रा महाराजी स्थित हनुमान मंदिर पहुंची। इसके बाद पिपरा मुगलान स्थित मां काली के मंदिर में दर्शन-पूजन किया गया। यात्रा रेलवे ढाला होते हुए मोटेश्वर नाथ मंदिर पहुंची, जहां भगवान शिव के साथ मां गंगा, मां यमुना और मां सरस्वती की आराधना की गई।
इसके बाद श्रद्धालु मां गंगा की प्रतिमा लेकर पिपराइच होते हुए गढ़वा उस्का पहुंचे। यहां हनुमान मंदिर में पूजन के बाद यात्रा लखेसरा स्थित श्री श्याम शिवा भोलेनाथ मंदिर पहुंची। यहां से सिंघोरिया होते हुए शोभायात्रा पुनः ग्रामसभा मठिया स्थित यज्ञ स्थल पर पहुंची। विभिन्न धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं ने क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि और जनकल्याण की कामना की।
नौ दिनों तक होंगे धार्मिक आयोजन
ग्रामसभा मठिया स्थित शिव मंदिर परिसर में आयोजित महायज्ञ के दौरान वैदिक अनुष्ठान, कथा-प्रवचन और रामलीला सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम होंगे। आयोजकों के अनुसार, इन कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को धर्म और अध्यात्म से जोड़ना तथा क्षेत्र की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करना है। महायज्ञ की पूर्णाहुति 31 अक्टूबर को होगी, जबकि एक नवंबर को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
महायज्ञ को सफल बनाने में यज्ञाचार्य पंडित हरिश्चंद्र उपाध्याय के साथ आशुतोष त्रिपाठी, गया उपाध्याय, शिवम मिश्रा और शिवम उपाध्याय सहित अन्य श्रद्धालु जुटे हैं।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान चंद्रिका सिंह, सूरज जायसवाल, रामनारायण मल्ल, सरवन सिंह, बलिराम यादव, मंटू यादव, दुर्विजय यादव, सूरज नाथ सिंह, मदन सिंह, गिरधारी पांडेय, अशोक सिंह, रमेश सिंह, जोगिंदर मल्ल, जयदीप निषाद (पिंटू), विकास सिंह, लखेंद्र गुप्ता, अमन सिंह, राजेश गुप्ता, नकुल यादव, अंगद निषाद, राजकुमार निषाद, विशाल चौधरी और सोनू चौधरी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
