Estimated reading time: 1 minute
एम्स में 26 से 29 नवंबर तक होगा चार दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन, टेराकोटा कला, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और गोरखपुर की पहचान को मिलेगी जगह
गोरखपुर। चिकित्सा विज्ञान की नवीनतम तकनीकों और शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों पर मंथन के लिए नवंबर में देशभर के शल्य चिकित्सक गोरखपुर में जुटेंगे। 26 से 29 नवंबर तक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), गोरखपुर में आयोजित होने वाले यूपीएसीकॉन-2026 को शहर की सांस्कृतिक विरासत, कला और उद्यमशीलता से जोड़ने की भी तैयारी है। सम्मेलन में आने वाले चिकित्सा विशेषज्ञों को गोरखपुर की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से परिचित कराया जाएगा।
सम्मेलन के आयोजन सचिव एवं शाही ग्लोबल हॉस्पिटल, तारामंडल के निदेशक डॉ. शिव शंकर शाही ने इस दिशा में पहल करते हुए स्थानीय व्यापारियों, उद्यमियों, कलाकारों, हस्तशिल्पियों और सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं से आयोजन में सहभागी बनने की अपील की है। उनका प्रयास है कि राष्ट्रीय स्तर का यह चिकित्सा सम्मेलन गोरखपुर की स्थानीय प्रतिभाओं और उत्पादों को पहचान दिलाने का माध्यम भी बने।
डॉ. शाही ने कहा कि गोरखपुर की पहचान केवल धार्मिक और ऐतिहासिक नगर के रूप में नहीं, बल्कि समृद्ध साहित्यिक परंपरा, विशिष्ट शिल्पकला और उभरती औद्योगिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में भी है। देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले चिकित्सकों के सामने शहर की इन विशेषताओं को प्रस्तुत करना जरूरी है। इससे गोरखपुर की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक होगी।

एम्स परिसर में लगेंगे स्थानीय उत्पादों के स्टॉल
आयोजकों की योजना के अनुसार, सम्मेलन के दौरान एम्स परिसर में स्थानीय उत्पादों और उपलब्धियों की प्रदर्शनी के लिए स्टॉल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। इसमें गोरखपुर की प्रसिद्ध टेराकोटा कला, पारंपरिक हथकरघा, हस्तशिल्प, स्थानीय उद्योगों के उत्पाद, विशिष्ट व्यंजन और पारंपरिक मिठाइयों को प्रदर्शित किया जा सकेगा। इसके साथ ही गोरखनाथ मंदिर की आध्यात्मिक विरासत, गीता प्रेस की साहित्यिक-सांस्कृतिक परंपरा और महानगर की विकास यात्रा को भी प्रमुखता से सामने लाने की योजना है।
डॉ. शिव शंकर शाही ने कहा कि किसी राष्ट्रीय आयोजन की सफलता केवल अकादमिक विमर्श और प्रतिभागियों की संख्या से तय नहीं होती, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि बाहर से आने वाले लोग उस शहर की कैसी छवि और स्मृतियां लेकर लौटते हैं। उनकी कोशिश है कि चिकित्सक गोरखपुर की चिकित्सा सुविधाओं और शैक्षणिक वातावरण के साथ यहां की संस्कृति, कला, आत्मीय आतिथ्य और स्थानीय प्रतिभाओं से भी परिचित हों।
सम्मेलन के आयोजन अध्यक्ष एवं एम्स गोरखपुर के शल्य चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता ने भी इस पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए स्थानीय संस्थाओं और उद्यमियों की सहभागिता पर जोर दिया है। आयोजकों के अनुसार, चार दिवसीय सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड समेत देश के विभिन्न राज्यों से हजारों शल्य चिकित्सकों और चिकित्सा विशेषज्ञों के शामिल होने की संभावना है।
