एलओसी पर शहीद पिता की चिता को चार साल के बेटे ने दी मुखाग्नि

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गोरखपुर। पाकिस्तानी सैनिकों की फायरिंग में एलओसी पर शहीद हुए गोरखा राइफल्स के हवलदार दीपक कार्की का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ राजघाट, राप्ती नदी तट पर किया गया। सोमवार की सुबह जम्मू कश्मीर के राजौरी, नोसेरा सेक्टर में जवाबी फायरिंग के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मंगलवार को विशेष विमान से उनका पार्थिव शरीर गोरखपुर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचा। तिरंगे में लिपटे शहीद के पार्थिव शरीर को राजघाट, मुक्तिधाम पर ले जाया गया। वहां नगर विधायक, डीएम, एसएसपी, गोरखनाथ रेजीमेंट के सैन्य अधिकारियों संग अन्य लोगों ने शहीद को पुष्प चक्र अर्पितकर श्रद्धांजलि दी। अंतिम सलामी के बाद शहीद दीपक कार्की के चार साल के बेटे एंजेल ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। वहां मौजूद लोगों ने शहीद दीपक कार्की अमर रहे के नारे लगाए। अंतिम संस्कार के पहले शहीद की पत्नी प्रतिमा, बेटियों कपिला और कुंजल, चार साल के मासूम बेटे एंजेल को उनका अंतिम दर्शन भी कराया गया।

मासूम ने दी पिता की चिता को मुखाग्नि
नेपाल राष्ट्र के बुटवल, मणिग्राम के मूल निवासी दीपक कार्की तीसरी ​बटालियन, पांचवीं गोरखा राइफल्स में हवलदार थे. जीआरडी से भर्ती होकर 17 साल से देश की सेवा कर रहे थे। रविवार की रात दीपक ने पत्नी प्रतिमा को फोन करके घर का हालचाल लिया था। बातचीत में यह भी बताया था कि एलओसी पर पाकिस्तान की तरफ से सीज फायर का उल्लंघन होता रहता है। इस दौरान बच्चों का हालचाल भी लिया। साथ ही अगली छुट्टी पर लौटने को लेकर पत्नी से चर्चा हुई।

सोमवार की सुबह छह बजे परिवार के सदस्यों को दीपक कार्की के शहीद होने की जानकारी मिली। सीजफायर का उल्लंघन करके पाकिस्तान सैनिकों ने हमला कर दिया था। जवाबी फायरिंग में दीपक कार्की गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस सूचना से परिवार में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। सोमवार की शाम को ही शहीद की पत्नी प्रतिमा, उनकी दोनों बेटियां, बेटे, मामा, चाचा और भाभी सहित नौ लोग गोरखपुर आ गए। मंगलवार की शाम करीब 7.30 बजे विशेष विमान से शहीद पार्थिव शरीर गोरखपुर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचा। तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को सेना की गाड़ी से राजघाट के मुक्तिधाम ले जाया गया। वहां नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल, डीएम के. विजयेंद्र पांण्डियन, एसएसपी डॉ. सुनील गुप्ता, गोरखा और डोगरा रेजीमेंट के अधिकारियों ने पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उनकी पत्नी प्रतिमा, भाभी गीता, बेटी कपिला, कुंजल और बेटे एंजल के साथ ही मौजूद रहे। इसके बाद विधि—विधान से उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके चार साल के बेटे एंजल ने शहीद के चाचा की गोद में पिता को मुखाग्नि दी तो हर किसी की आंखों में आंसू आ गए।

दीपक का हमेशा ऋणी रहेगा राष्ट्र
शहीद के अंतिम संस्कार में एडीएम सिटी राकेश श्रीवास्तव, एसपी सिटी डॉ. कौस्तुभ, पार्षद रणंजय सिंह जुगनू, भारत नेपाल मैत्री संघ के अध्यक्ष अनिल गुप्ता, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी रिटायर्ड कर्नल केए मैथ्यू, गोरखा राइफल्स, डोगरा रेजीमेंट और एयरफोर्स अफसर और सैन्य कर्मचारी मौजूद रहे। एयरफोर्स मध्य कमान के पीआरओ शैलेंद्र पांडेय ने बताया कि राजौरी के नौशेरा सेक्टर में पाकिस्तानी सेना की फायरिंग का जवाब देते हुए हवलदार दीपक कार्की गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इलाज के दौरान वह वीरगति को प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि दीपक एक बहादुर, कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार सैनिक थे। उनके सर्वोच्च बलिदान और कर्तव्य के प्रति समर्पण के लिए राष्ट्र हमेशा ऋणी रहेगा।

पिता से कभी न मिल पाएंगे मासूम बच्चे
शहीद पिता के पार्थिव शरीर को दो मासूम बेटियों ने पुष्प अर्पित किया। बेटियों को इस बात का अहसास हो चुका था कि उनके पिता अब दोबारा न लौटेंगे। जबकि शहीद के चार साल के मासूम बेटे को कुछ भी पता नहीं चल पा रहा था। वह गुमसुम होकर लोगों को निहारता तो कभी लगातार बिलख रही मां को देखता रहा। दो भाइयों में छोटे दीपक की शादी 14 साल पहले हुई थी। उनके बड़े भाई मुंबई में रहकर काम करते हैं। चार साल पूर्व मां का निधन हो गया था। पिता की हालत भी ठीक नहीं रहती है। सोमवार को बेटे की शहीद होने की सूचना मिली तो वह भीतर से हिल उठे। पिता और भाई, शहीद के अंतिम संस्कार में नहीं शामिल हो सके। शहीद के चाचा और मामा बच्चों को संभालने में लगे रहे। सेना के अफसर परिवार के लोगों को ढाढस बधाते रहे। लोगों ने बताया कि दशहरा में दीपक अपने गांव गए थे।

फोटो- राजेश कुमार (सोशल मीडिया)
रिपोर्ट- आशुतोष मिश्र

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