ज्ञान प्रताप सिंह बने एसडीएम सदर, छह उप जिलाधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी

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गोरखपुर। जनपद से नौ उप जिलाधिकारियों के गैर जनपद स्थानांतरण के बाद जिला प्रशासन ने तहसील स्तर पर नई तैनाती कर दी है। जिलाधिकारी दीपक मीणा ने विभिन्न जनपदों से आए अधिकारियों के अनुभव, प्रशासनिक क्षमता और कार्यशैली को ध्यान में रखते हुए उन्हें अलग-अलग तहसीलों की जिम्मेदारी सौंपी है।

नई तैनाती के अनुसार ज्ञान प्रताप सिंह को सदर तहसील का उप जिलाधिकारी (एसडीएम) बनाया गया है। इसके अलावा नमन मेहता को सहजनवा, मनीष कुमार को गोला, मलखान सिंह को बांसगांव, आनंद कटारिया को खजनी तथा रवि कुमार सिंह को चौरीचौरा तहसील का उप जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है। प्रशासन को उम्मीद है कि नई तैनातियों से राजस्व कार्यों, जनसुनवाई, विकास योजनाओं और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों के निस्तारण में तेजी आएगी।

अनुभव के आधार पर मिली सदर तहसील की जिम्मेदारी

सदर तहसील की कमान ज्ञान प्रताप सिंह को सौंपे जाने को महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय माना जा रहा है। वह इससे पहले सदर तहसीलदार के रूप में कार्य कर चुके हैं और स्थानीय राजस्व व्यवस्था, लंबित मामलों तथा क्षेत्र में संचालित प्रमुख विकास परियोजनाओं से भलीभांति परिचित हैं। इसी अनुभव को देखते हुए उन्हें जिले की सबसे व्यस्त और संवेदनशील तहसीलों में शामिल सदर की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

ज्ञान प्रताप सिंह जुलाई 2024 में गोरखपुर में तहसीलदार के पद पर तैनात हुए थे। प्रारंभ में उन्होंने कैम्पियरगंज तहसील का दायित्व संभाला, जिसके बाद उन्हें सदर तहसील का तहसीलदार बनाया गया। अपने कार्यकाल में उन्होंने राजस्व प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण, सरकारी भूमि संबंधी मामलों, जनशिकायतों और विकास कार्यों की नियमित समीक्षा पर विशेष ध्यान दिया।

30 जून 2025 को शासन ने उन्हें पदोन्नत कर उप जिलाधिकारी बनाया था। पदोन्नति के साथ उनका स्थानांतरण अयोध्या जनपद किया गया था, लेकिन गोरखपुर में चल रही महत्वपूर्ण परियोजनाओं, स्थानीय प्रशासनिक आवश्यकताओं और उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें जनपद में ही बनाए रखा गया।

विकास परियोजनाओं की जिम्मेदारी होगी अहम

सदर क्षेत्र में इस समय विरासत गलियारा, गौड़-धोइया नाला परियोजना, बांसस्थान–मनीराम मार्ग तथा असुरन–पिपराइच मार्ग के चौड़ीकरण सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं संचालित हैं। इन योजनाओं में भूमि अधिग्रहण, मुआवजा वितरण, अतिक्रमण हटाने और विभिन्न विभागों के समन्वय जैसी प्रक्रियाओं में उप जिलाधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में ज्ञान प्रताप सिंह के सामने इन परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

प्रशासनिक हलकों में उनकी पहचान ऐसे अधिकारी के रूप में रही है जो क्षेत्र में पहुंचकर समस्याओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करते हैं, संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करते हैं और शिकायतों के व्यावहारिक समाधान पर जोर देते हैं। नियमित जनसुनवाई और मामलों की सतत निगरानी के कारण उनकी कार्यशैली की सकारात्मक छवि भी बनी है।

अन्य तहसीलों में भी नई तैनाती

जिले की अन्य तहसीलों में भी अधिकारियों की तैनाती स्थानीय परिस्थितियों, प्रशासनिक चुनौतियों और कार्यानुभव को ध्यान में रखकर की गई है। नई टीम के सामने राजस्व वादों का समयबद्ध निस्तारण, सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, भूमि विवादों का समाधान तथा कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाए रखने की चुनौती होगी।

प्रशासनिक फेरबदल के बाद अब जिले की सभी तहसीलों में कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेष रूप से सदर तहसील में ज्ञान प्रताप सिंह के नेतृत्व में विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने तथा आमजन की शिकायतों के पारदर्शी और त्वरित निस्तारण पर प्रशासन की विशेष नजर रहेगी।

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