धूल और उमस से बढ़ी आंखों की एलर्जी, ओपीडी में हर दूसरा बच्चा प्रभावित

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गर्मी-बारिश और नमी के बीच बैक्टीरियल व वायरल संक्रमण का भी खतरा, नेत्र रोग विशेषज्ञ ने बताए बचाव के उपाय

गोरखपुर। गर्मी, बारिश और उमस के बीच धूल के कण बच्चों की आंखों के लिए परेशानी बढ़ा रहे हैं। इन दिनों नेत्र रोग की ओपीडी में आने वाले करीब 50 प्रतिशत बच्चे धूल से होने वाली एलर्जी से प्रभावित मिल रहे हैं। आंखों में खुजली, लालिमा, जलन, पानी आना और पलकों में सूजन इसके प्रमुख लक्षण हैं। उमस और नमी बढ़ने से बैक्टीरियल व वायरल संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जीके गुप्ता के अनुसार, धूल के महीन कण आंखों की सतह पर पहुंचकर एलर्जी पैदा करते हैं। बच्चों में आंखों को बार-बार रगड़ने से समस्या और गंभीर हो सकती है। बारिश के बाद वातावरण में नमी और गर्मी के कारण संक्रमण फैलने की आशंका भी बढ़ जाती है।

इन बातों का रखें ध्यान
* धूल और धुएं से बचने के लिए बाहर निकलते समय चश्मे का प्रयोग करें।
* आंखों में धूल जाने पर उन्हें साफ और ठंडे पानी से धोएं।
* आंखों को हाथ से रगड़ने से बचें।
* बच्चों को धूल भरे स्थानों और निर्माण स्थलों से दूर रखें।
* आंखों को छूने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं।
* तौलिया, रुमाल और तकिया जैसी व्यक्तिगत वस्तुएं दूसरों के साथ साझा न करें।
* आंखों में लालिमा या संक्रमण होने पर स्कूल में बच्चों के संपर्क को लेकर सावधानी बरतें।
* डॉक्टर की सलाह के बिना कोई आई ड्रॉप या एंटीबायोटिक दवा न डालें।
* आंखों में तेज दर्द, अधिक लालिमा, सूजन, रोशनी से परेशानी या लगातार पानी आने पर तत्काल नेत्र रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें।
बर्फ सीधे आंख पर न लगाएं
डॉ. गुप्ता के अनुसार, जलन या सूजन में ठंडी पट्टी से राहत मिल सकती है, लेकिन बर्फ को सीधे आंख या पलकों पर नहीं लगाना चाहिए। साफ कपड़े में ठंडा पानी या ठंडी पट्टी रखकर कुछ देर आंखों पर रखने से राहत मिल सकती है। एलर्जी की स्थिति में नियमित रूप से आंखों को रगड़ने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना अधिक सुरक्षित है।

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