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‘लौटेंगे हम एक दिन’ काव्य संग्रह का विमोचन, साहित्यकारों ने सराही प्रो. शिव शरण दास की रचनाधर्मिता
गोरखपुर। वरिष्ठ शिक्षाविद्, वैज्ञानिक एवं साहित्यकार प्रो. (डॉ.) शिव शरण दास के नवीन काव्य संग्रह ‘लौटेंगे हम एक दिन’ का सोमवार को सिविल लाइंस स्थित गोकुल अतिथि भवन में विमोचन हुआ। युवा चेतना समिति की ओर से आयोजित समारोह में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) पूनम टंडन ने अतिथियों के साथ कृति का विमोचन किया। महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव भी मौजूद रहे। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. वेद प्रकाश पाण्डेय ने की।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि साहित्य समाज की संवेदना और वैचारिक चेतना को पीढ़ियों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। प्रो. दास की कृति में वैज्ञानिक चिंतन और साहित्यिक संवेदना का सुंदर समन्वय है। यह जीवन के प्रति विश्वास जगाती है।
प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा ने कहा कि कृति लोकमंगल और सामाजिक दायित्व की भावना से अनुप्राणित है। प्रो. चितरंजन मिश्र ने कहा कि जिनके पास भाषा है, उन्हें मौन नहीं रहना चाहिए। रणविजय सिंह ने कहा कि संग्रह में अपने समय और समाज की धड़कन महसूस होती है। पुष्पदंत जैन ने कृति की सहज भाषा, मानवीय संवेदना और आशावादी स्वर की सराहना की।
प्रो. शिव शरण दास ने कहा कि ‘लौटेंगे हम एक दिन’ उनका दूसरा काव्य संग्रह है। साहित्य उनके लिए सामाजिक कुरीतियों, भ्रष्टाचार और आडंबर के विरुद्ध अभिव्यक्ति का माध्यम है। उन्होंने बुद्धिजीवियों से समाज और देश के सकारात्मक उत्थान के लिए मुखर होने का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने अपनी चुनिंदा कविताओं का पाठ भी किया।
वक्ताओं ने बताया कि प्रो. दास के निर्देशन में 14 शोधार्थियों ने शोध पूरा किया है। उनके 90 से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित हो चुके हैं और रसायन विज्ञान से संबंधित आठ पुस्तकें प्रकाशित हैं। विश्वविद्यालय परिसर में 11 हजार से अधिक सागौन एवं नीम के पौधों के रोपण व संरक्षण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
समारोह में प्रो. चितरंजन मिश्र, प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा, रणविजय सिंह, पुष्पदंत जैन, ज्योति प्रकाश मस्कारा, प्रो. आमोद कुमार राय समेत शिक्षा, चिकित्सा, साहित्य और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। अंत में प्रकाशक सौरभ कुमार सिंह ने आभार जताया।

