राष्ट्रीयता और बहुआयामी रोजगारपरक शिक्षा का प्रमुख केंद्र बना एमजीयूजी : प्रो. रवि शंकर सिंह

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अनुसंधान और नवाचार पर विशेष ध्यान दें विद्यार्थी

महंतद्वय दिग्विजयनाथ व अवेद्यनाथ की स्मृति में व्याख्यानमाला शुरू

गोरखपुर। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के पांचवें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को साप्ताहिक समारोह का शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय परिसर में व्याख्यानमाला के साथ विभिन्न शैक्षणिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और क्रीड़ा गतिविधियां भी शुरू हुईं। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की स्मृति में आयोजित व्याख्यानमाला के पहले दिन मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय, बलरामपुर के कुलपति प्रो. रवि शंकर सिंह ने विद्यार्थियों को अनुसंधान और नवाचार पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।
‘विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी, कृषि, चिकित्सा : नवप्रवर्तक भारत के लिए’ विषय पर व्याख्यान देते हुए प्रो. रवि शंकर सिंह ने कहा कि युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के आदर्शों एवं मूल्यों के अनुरूप स्थापित एमजीयूजी पांच वर्ष में ही राष्ट्रीयता और बहुआयामी रोजगारपरक शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत के वर्तमान और भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी, कृषि और चिकित्सा सभी क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्च शिक्षा में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी, कृषि और चिकित्सा के महत्व के साथ नवाचार को प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से एमजीयूजी को मॉडल विश्वविद्यालय के रूप में विकसित किया है। आने वाले समय में नवप्रवर्तकों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। ऐसे में विद्यार्थियों को अनुसंधान और नवाचार पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
प्रो. सिंह ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि है और इस क्षेत्र में नवाचार की अपार संभावनाएं हैं। जीवन को सुगम बनाने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जनस्वास्थ्य के उन्नयन के लिए चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे नवाचार को भी गति देनी होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से शैक्षणिक जीवन के साथ राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने का आह्वान किया।
शिक्षा के साथ राष्ट्रसेवा का भाव जरूरी
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एमजीयूजी के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. भूपेश कुमार गोयल ने विद्यार्थियों को शिक्षा, राष्ट्रसेवा, अनुशासन, नेतृत्व और सामाजिक दायित्व के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि इन्हीं मूल्यों को आत्मसात कर विश्वविद्यालय ने अल्प समय में मजबूत पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के लिए यह सौभाग्य की बात है कि उन्हें गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंतद्वय दिग्विजयनाथ जी महाराज और अवेद्यनाथ जी महाराज के विचारों से सिंचित परिसर में अध्ययन का अवसर मिल रहा है। दोनों महापुरुषों के व्यक्तित्व, कृतित्व, लोककल्याण और राष्ट्रसेवा में योगदान को स्मरण करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने की बात कही।
फैकल्टी ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल की डीन डॉ. डीएस अजीथा ने स्वागत करते हुए अतिथियों का परिचय कराया। कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव, डॉ. हरिओम, डॉ. सुनील सिंह, डॉ. विमल कुमार दुबे, डॉ. गिरधर वेदांतम, उप कुलसचिव श्रीकांत सहित शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
आज कृषि पर होगी चर्चा
स्थापना दिवस सप्ताह के दूसरे दिन रविवार को ‘विकसित और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कृषि का योगदान’ विषय पर आईसीएआर के पूर्व निदेशक डॉ. अश्विनी दत्त पाठक तथा ‘भारत में प्राकृतिक खेती का वर्तमान परिदृश्य’ विषय पर कृषि विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक अरविंद कुमार सिंह व्याख्यान देंगे।

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