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नारायणी में साढ़े पांच लाख क्यूसेक पानी आने से बिगड़े हालात, 15-16 गांवों में फसल नुकसान का सर्वे कर 10 दिन में मुआवजा देने के निर्देश
कुशीनगर/गोरखपुर। नेपाल में हुई अतिवृष्टि के बाद नारायणी नदी में अचानक बढ़े जलस्तर से कुशीनगर में बिगड़े बाढ़ के हालात का जायजा लेने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को ग्राउंड जीरो पर पहुंचे। सोमवार देर रात जवहीं दयाल (चैनपट्टी) के ततवा टोला के पास एपी तटबंध का कुछ हिस्सा टूटने के बाद मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके बाद बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से मुलाकात की और लंच पैकेट व राहत सामग्री वितरित की। उन्होंने कहा कि आपदा की इस घड़ी में सरकार प्रत्येक पीड़ित के साथ पूरी मुस्तैदी से खड़ी है।
मुख्यमंत्री ने जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिया कि स्थिति सामान्य होने के बाद नारायणी नदी की ड्रेजिंग और चैनलाइजेशन कराया जाए। एपी तटबंध को भी मजबूत करने के निर्देश दिए गए, जिससे भविष्य में तटबंध टूटने की आशंका को कम किया जा सके और आसपास के गांव सुरक्षित रहें।

नारायणी में अचानक बढ़ा जलप्रवाह
मुख्यमंत्री ने बताया कि सामान्य दिनों में नारायणी नदी में तीन से चार लाख क्यूसेक पानी आता है, लेकिन नेपाल में अतिवृष्टि के कारण सोमवार को अचानक करीब साढ़े पांच लाख क्यूसेक पानी पहुंच गया। इससे एपी तटबंध से सटे कई गांवों में पानी घुस गया। जानकारी मिलते ही प्रशासन ने बड़े पैमाने पर बचाव और राहत कार्य शुरू कर दिया।
उन्होंने बताया कि राहत एवं बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की दो-दो टीमें तथा पीएसी की फ्लड यूनिट लगाई गई है। प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारी लगातार मौके पर जुटे हैं। जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह भी रात में ही क्षेत्र में पहुंच गए थे।
प्रभावितों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री
गोरखनाथ मंदिर में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की श्रद्धांजलि सभा समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री सीधे कुशीनगर पहुंचे। उन्होंने हवाई सर्वेक्षण के बाद बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत की। ऊंचे स्थानों पर शरण लिए लोगों के बीच पहुंचकर लंच पैकेट और बच्चों को चॉकलेट वितरित की। इसके बाद सेवरही क्षेत्र के इंटर कालेज बेदुपार पहुंचकर बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत सामग्री वितरित की।
5000 राहत पैकेट की व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 5000 पैकेट राहत सामग्री की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक पैकेट में 10 किलो चावल, 10 किलो आटा, दो किलो दाल, आलू, लाई, चना, तेल, मसाला, नमक, बाल्टी समेत कुल 35 सामग्री हैं। प्रत्येक पैकेट का वजन करीब 50 किलो है।
उन्होंने कहा कि जनहानि होने पर प्रभावित परिवार को तत्काल चार लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। पूरी तरह नष्ट मकानों के स्थान पर प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत नया आवास उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। मरम्मत योग्य क्षतिग्रस्त मकानों के लिए भी सहायता राशि दी जाएगी।

फसल नुकसान का 10 दिन में मिलेगा मुआवजा
मुख्यमंत्री ने कहा कि 15-16 गांवों में धान, गन्ना और सब्जी समेत अन्य फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान होने की आशंका है। प्रशासन को फसल क्षति का सर्वे कराकर 10 दिनों के भीतर मुआवजा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कराने के लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।
पांच-छह दिन लगेंगे मेडिकल कैंप
बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों और सर्पदंश की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को प्रभावित क्षेत्र में अगले पांच-छह दिनों तक लगातार चिकित्सा शिविर लगाने के निर्देश दिए। सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नेक वेनम तथा एंटी रैबीज वैक्सीन की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का जीवन सरकार के लिए महत्वपूर्ण है।
नारायणी नदी का होगा चैनलाइजेशन
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थिति सामान्य होने के बाद नारायणी नदी की ड्रेजिंग कर उसे चैनलाइज किया जाएगा। इससे नदी के प्रवाह को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी और क्षेत्र को बाढ़ के खतरे से सुरक्षित करने के लिए स्थायी उपाय किए जा सकेंगे। एपी तटबंध को भी मजबूत किया जाएगा।
इस दौरान जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, देवरिया के सांसद शशांक मणि त्रिपाठी, कुशीनगर के सांसद विजय दूबे, विधायक डा. असीम कुमार, सुरेंद्र चौरसिया सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।
