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‘हनुमान अंश’ फिल्म देखने के बाद समिति के सदस्यों के मन में आया विचार, 25 दिनों की मेहनत से तैयार हो रही भव्य झांकी
नीम करोली बाबा की आध्यात्मिक विरासत और कैंची धाम की झलक बनेगी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र
चाय पंचायत, गोरखपुर। शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के साथ ही शहर के पूजा पंडालों में आस्था, कला और रचनात्मकता के अनूठे रंग देखने को मिल रहे हैं। इसी कड़ी में गोरखपुर के साहबगंज गुड़मंडी में दुर्गा पूजा नवयुक्त समिति की ओर से तैयार की जा रही भव्य झांकी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनने जा रही है। इस बार समिति ने उत्तराखंड के प्रसिद्ध कैंची धाम की थीम पर पंडाल सजाने का निर्णय लिया है। झांकी में संत नीम करोली बाबा से जुड़े विभिन्न स्थलों और कैंची धाम की विशेषताओं को कलात्मक ढंग से उकेरा जा रहा है। इस पंडाल की सबसे खास बात यह है कि इसे हिंदू और मुस्लिम समुदाय के कारीगर मिलकर तैयार कर रहे हैं। धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सौहार्द का संदेश देती यह झांकी नवरात्रि में लोगों को आकर्षित करेगी।
‘हनुमान अंश’ फिल्म से मिली कैंची धाम की थीम की प्रेरणा
दुर्गा पूजा नवयुक्त समिति के अध्यक्ष हिमांशु गुप्ता के अनुसार, कैंची धाम की थीम पर पंडाल तैयार करने का विचार एक खास अनुभव से निकला। कुछ समय पहले समिति के सभी सदस्य एक साथ ‘हनुमान अंश’ फिल्म देखने गए थे। फिल्म देखने के बाद भगवान हनुमान और उनके परम भक्त माने जाने वाले संत नीम करोली बाबा के प्रति सदस्यों की श्रद्धा और गहरी हो गई।
इसके बाद सभी सदस्यों ने उत्तराखंड स्थित कैंची धाम जाकर बाबा के दर्शन करने की योजना बनाई। हालांकि, व्यस्तताओं और अन्य कारणों से यात्रा संभव नहीं हो सकी। नवरात्रि का पर्व नजदीक आने पर सदस्यों ने विचार किया कि जब कैंची धाम जाना फिलहाल संभव नहीं है, तो क्यों न उसकी भव्यता और आध्यात्मिक महत्ता को गोरखपुर में ही साकार किया जाए। इसी विचार ने कैंची धाम की थीम पर दुर्गा पूजा पंडाल तैयार करने की योजना को आकार दिया।
25 दिनों से दिन-रात जुटे हैं कारीगर
झांकी को आकर्षक और सजीव स्वरूप देने के लिए कारीगर पिछले 25 दिनों से दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। आयोजकों के मुताबिक, पंडाल का लगभग 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब शेष काम में बारीकियों को अंतिम रूप देने और सजावट पर ध्यान दिया जा रहा है। इसे एक दिन के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद पंडाल श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया जाएगा।
इस झांकी को तैयार करने में 35 हजार रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। पंडाल की सजावट को खास बनाने के लिए बाहर से सजावटी सामान मंगवाए गए हैं। इसके अलावा जरूरत की कई वस्तुएं ऑनलाइन भी खरीदी गई हैं। समिति का प्रयास है कि कैंची धाम की विशिष्टता को पंडाल में इस तरह प्रस्तुत किया जाए कि श्रद्धालु गोरखपुर में ही उसकी झलक देख सकें।
साझा मेहनत से मजबूत हो रहा सामाजिक सौहार्द
साहबगंज गुड़मंडी में तैयार हो रही यह झांकी केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव का संदेश भी दे रही है। हिंदू और मुस्लिम कारीगरों की साझा मेहनत से आकार ले रहा यह पंडाल दिखाता है कि कला, संस्कृति और आस्था लोगों को जोड़ने का माध्यम बन सकती हैं।
नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को यहां कैंची धाम की झलक देखने के साथ ही संत नीम करोली बाबा से जुड़ी आस्था और आध्यात्मिक परंपरा को करीब से महसूस करने का अवसर मिलेगा। अब पंडाल के अंतिम रूप लेने के साथ ही श्रद्धालुओं को इसके खुलने का इंतजार है।
