तीन दिन तक नहर में फंसी गर्भवती डॉल्फिन का सफल रेस्क्यू, ग्रीन कॉरिडोर बनाकर 52 किमी दूर राप्ती नदी में छोड़ा गया

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गोरखपुर/महराजगंज।
त्रिवेणी नदी से भटककर देवरिया नहर में पहुंची और तीन दिनों से फंसी गर्भवती गंगा डॉल्फिन को वन विभाग, गोरखपुर चिड़ियाघर और टीएसए फाउंडेशन इंडिया की संयुक्त टीम ने सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर सुरक्षित राप्ती नदी में छोड़ दिया। डॉल्फिन को बचाने के लिए गोरखपुर पुलिस ने भटहट से राजघाट तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया, जिससे करीब 52 किलोमीटर की दूरी महज एक घंटा पांच मिनट में पूरी कर उसे सुरक्षित उसके प्राकृतिक आवास तक पहुंचाया गया।
जानकारी के अनुसार त्रिवेणी नदी से भटककर आई डॉल्फिन महराजगंज के परतावल क्षेत्र के धरमौली बाजार के पास देवरिया नहर में फंस गई थी। तेज बहाव और अधिक जलस्तर के कारण लगातार तीन दिनों तक उसका रेस्क्यू चुनौती बना रहा। शनिवार को भी प्रयास किया गया, लेकिन बारिश के चलते सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद सिंचाई विभाग के सहयोग से नहर का जलस्तर कम कराया गया।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) उत्तर प्रदेश अनुराधा बेमुरी तथा मुख्य वन संरक्षक गोरखपुर बी.सी. ब्रह्मा के निर्देशन में रविवार को कुशीनगर वन प्रभाग की हाटा रेंज अंतर्गत सिसवा शुक्ल ग्राम सभा के पास विशेष अभियान चलाया गया। गोरखपुर चिड़ियाघर के उपनिदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह और टीएसए फाउंडेशन इंडिया के डॉ. शैलेन्द्र सिंह के नेतृत्व में गोरखपुर, महराजगंज और कुशीनगर वन विभाग की संयुक्त टीम ने सावधानीपूर्वक डॉल्फिन का सफल रेस्क्यू किया।


रेस्क्यू के बाद डॉल्फिन को विशेष डॉल्फिन एम्बुलेंस में रखकर उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जांच में पता चला कि डॉल्फिन मादा है, जिसकी लंबाई सात फीट दो इंच और वजन 147 किलोग्राम है। चिकित्सकीय जांच में उसके गर्भवती होने की भी पुष्टि हुई। प्राथमिक उपचार के बाद उसे सुरक्षित रूप से राप्ती नदी में छोड़ा गया, जिसे डॉल्फिन के लिए उपयुक्त प्राकृतिक आवास माना जाता है।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि समय पर किए गए इस समन्वित अभियान से एक दुर्लभ और संरक्षित जलीय जीव का जीवन बचाया जा सका। पूरे अभियान में वन विभाग, सिंचाई विभाग, गोरखपुर पुलिस, गोरखपुर चिड़ियाघर और टीएसए फाउंडेशन इंडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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