Estimated reading time: 1 minute
गोरखपुर। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) सीपीआर दिवस के अवसर पर एम्स गोरखपुर के बाल रोग विभाग की ओर से कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) विषय पर जन-जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को हृदय गति रुकने जैसी आपात स्थिति में तत्काल सीपीआर देकर जीवन बचाने के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम का आयोजन एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता के मार्गदर्शन में हुआ। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि समय पर दिया गया सीपीआर जीवन और मृत्यु के बीच निर्णायक अंतर साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को इस जीवनरक्षक तकनीक का प्रशिक्षण देकर अधिक सुरक्षित, संवेदनशील और स्वास्थ्य-जागरूक समाज का निर्माण किया जा सकता है।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों को हृदय गति रुकने की स्थिति की शीघ्र पहचान, तत्काल सीपीआर शुरू करने की प्रक्रिया तथा चिकित्सा आपातकाल के दौरान सही प्रतिक्रिया देने के तरीके का प्रदर्शन कर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा समय पर सीपीआर दिए जाने से पेशेवर चिकित्सा सहायता मिलने तक रोगी के जीवित रहने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
इस दौरान एम्स के संकाय सदस्यों, रेजिडेंट चिकित्सकों, विद्यार्थियों, स्वास्थ्यकर्मियों और बड़ी संख्या में समुदाय के लोगों ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को जीवनरक्षक कौशल अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
एम्स गोरखपुर ने इस पहल के जरिए एक बार फिर स्वास्थ्य संबंधी जन-जागरूकता बढ़ाने और समाज को आवश्यक जीवनरक्षक कौशलों से सशक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई

