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बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट के परिचय समारोह में बोले सीएम, कहा- अधिवक्ता संविधान के सारथी और समाज के सजग प्रहरी
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार अधिवक्ताओं को कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्था बनाएगी। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता केवल मुकदमे लड़ने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज के विधिक सलाहकार, संविधान के सारथी और लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। देश और समाज के खिलाफ होने वाली साजिशों का समय रहते प्रतिकार करने में भी अधिवक्ताओं की अहम भूमिका है।
बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट गोरखपुर की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के परिचय समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संतुलन और संवाद पर निर्भर करती है। इस संवाद की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी अधिवक्ता हैं, जो आम नागरिक और न्यायपालिका के बीच विश्वास का सेतु बनते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध और सर्वसुलभ न्याय ही विधि के शासन की वास्तविक पहचान है। नए आपराधिक कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू कराने में अधिवक्ताओं का योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन कुछ ताकतें देश की इस प्रगति को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं। सोशल मीडिया और फर्जी खातों के माध्यम से समाज को जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर बांटने तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर अविश्वास पैदा करने की कोशिशें हो रही हैं। ऐसे समय में अधिवक्ताओं को अधिक सजग रहने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का भारत अपनी नीतियां स्वयं तय कर रहा है और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पिछले 12 वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। करोड़ों लोगों को मुफ्त राशन, आयुष्मान भारत, आवास, शौचालय, जनधन खाते और उज्ज्वला योजना का लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि कोविड काल में भारत ने रिकॉर्ड समय में वैक्सीन विकसित कर दुनिया के अनेक देशों की सहायता की।
प्रदेश सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ है। आज प्रदेश दंगों और अराजकता के बजाय विकास, निवेश और रक्षा उत्पादन के लिए जाना जाता है। डिफेंस कॉरिडोर, बेहतर कानून-व्यवस्था और रोजगार के अवसरों ने प्रदेश की नई पहचान बनाई है।
अधिवक्ताओं के हित में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि अधिवक्ता कल्याण निधि डेढ़ लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये की गई है। इसके लिए 500 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड बनाया गया है, जिससे अब तक चार हजार अधिवक्ताओं को लगभग 200 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है। अधिवक्ताओं की आर्थिक सहायता के लिए आयु सीमा बढ़ाकर 70 वर्ष की गई है। न्याय मित्रों और सरकारी पक्ष रखने वाले अधिवक्ताओं की फीस बढ़ाई गई है, नए न्यायालय भवन और अधिवक्ता चैंबर बनाए जा रहे हैं तथा सामाजिक सुरक्षा निधि और पुस्तक क्रय के लिए भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के अनुरूप प्रदेश में फोरेंसिक व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। अब प्रदेश में 12 फोरेंसिक लैब स्थापित हो चुकी हैं, स्टेट फोरेंसिक इंस्टीट्यूट का गठन किया गया है और प्रत्येक जिले में दो फोरेंसिक वैन उपलब्ध कराई गई हैं।
गोरखपुर बार एसोसिएशन की गौरवशाली परंपरा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1895 में स्थापित इस बार ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर न्यायपालिका और सार्वजनिक जीवन तक अनेक प्रतिभाएं देश को दी हैं। उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. भीमराव आंबेडकर का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के अधिकांश महान नेता अधिवक्ता रहे हैं।
कार्यक्रम को जनपद न्यायाधीश राजकुमार सिंह और बार एसोसिएशन के अध्यक्ष उमापति उपाध्याय ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर सांसद रवि किशन शुक्ला, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।

