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महराजगंज। भारत-नेपाल सीमा पर खाद की तस्करी का खेल थम नहीं रहा है। सीमा की निगरानी और कड़ी चौकसी के दावों के बीच तस्कर पगडंडियों के रास्ते यूरिया और डीएपी की खेप नेपाल पहुंचा रहे हैं। तस्करी के लिए बाइक और साइकिल का इस्तेमाल किया जा रहा है। कैरियर दो से चार बोरी खाद लेकर सीमा पार कर रहे हैं। लगातार हो रही बरामदगी से भी इसकी तस्वीर साफ हो रही है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में ठूठीबारी, झुलनीपुर, बरगदवा, परसामलिक और सोनौली थाना क्षेत्रों की पगडंडियां तस्करों के लिए मुफीद बताई जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार खाद की मांग बढ़ने पर तस्करी भी तेज हो जाती है। कैरियरों को एक चक्कर के लिए 500 से 1000 रुपये तक दिए जाते हैं। सुरक्षा कर्मियों की नजर पड़ने पर कैरियर पकड़े जाते हैं, जबकि निगरानी से बच निकलने पर खाद आसानी से नेपाल पहुंच जाती है।
277 रुपये की यूरिया नेपाल पहुंचते ही महंगी
भारतीय क्षेत्र में निर्धारित कीमत पर मिलने वाली यूरिया खाद नेपाल पहुंचने के बाद कई गुना महंगी हो जाती है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय क्षेत्र में करीब 277 रुपये की यूरिया नेपाल में मांग के अनुसार तीन गुने तक कीमत में बिक जाती है। मांग अधिक होने पर कीमत और बढ़ जाती है। सीमा से दूर खाद पहुंचाने पर कैरियरों को भी अधिक भुगतान किए जाने की बात सामने आ रही है।
दो दिन में आठ बोरी यूरिया बरामद
खाद तस्करी के खिलाफ हुई हालिया कार्रवाई भी सीमा पर चल रहे इस खेल की ओर इशारा करती है। दो सितंबर को बरगदवा थाना पुलिस ने पिपरा कब्रिस्तान के पास दो बोरी यूरिया बरामद की। मामले में रमगढ़वा निवासी मोहम्मद मौजिबुल्लाह का चालान किया गया।
इससे पहले सोनौली थाना क्षेत्र में छह बोरी यूरिया खाद पकड़ी गई थी। यानी दो दिनों के भीतर सीमा क्षेत्र में आठ बोरी यूरिया की बरामदगी हुई। कार्रवाई के बावजूद तस्करों के सक्रिय रहने से निगरानी व्यवस्था पर सवाल भी उठ रहे हैं।
रात में पगडंडियों से सीमा पार करती हैं खाद की खेप
सूत्रों का दावा है कि सीमावर्ती क्षेत्र में खाद को पहले छोटे-छोटे ठिकानों पर एकत्र किया जाता है। इसके बाद रात के समय कैरियर पगडंडी के रास्ते बाइक या साइकिल से खाद लेकर नेपाल की ओर निकल जाते हैं। तस्करी के इस तरीके में बड़ी खेप को छोटे हिस्सों में बांटकर सीमा पार कराने की कोशिश की जाती है, जिससे पकड़ में आने की आशंका कम रहे।
रिश्तेदारी की आड़ में भी खाद लेकर आवाजाही
भारत और नेपाल के सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों के बीच रिश्तेदारी होने के कारण खाद की आवाजाही का एक वैध पक्ष भी है। भारतीय क्षेत्र के कई लोगों के रिश्तेदार नेपाल में रहते हैं। ऐसे लोग खेती के लिए अपने रिश्तेदारों को खाद भेजते हैं। इसी सामान्य आवाजाही की आड़ में तस्करी का नेटवर्क भी सक्रिय होने की बात सामने आ रही है।
रेंगहिया क्षेत्र के एक व्यक्ति ने बताया कि उसकी बेटी की ससुराल नेपाल के परासी में है। वहां खेती के लिए यूरिया की जरूरत होने पर भारतीय क्षेत्र से खाद खरीदकर भेजनी पड़ती है। इसी तरह अन्य लोग भी रिश्तेदारों के लिए खाद ले जाते हैं।
मौसम और फसल के साथ बदलता है तस्करी का सामान
सीमा पर तस्करी का कारोबार केवल खाद तक सीमित नहीं रहता। सूत्रों के अनुसार समय और मांग के हिसाब से तस्करी का सामान बदलता रहता है। कभी टमाटर तो कभी प्याज की तस्करी तेज हो जाती है। खेती के सीजन में यूरिया और डीएपी की मांग बढ़ने के साथ खाद की तस्करी भी बढ़ जाती है।
अवैध गोदामों की भी चर्चा
सीमावर्ती क्षेत्र में खाद रखने के लिए अवैध गोदाम बनाए जाने की भी चर्चा है। सूत्रों के अनुसार इन स्थानों पर खाद एकत्र करने के बाद रात में पगडंडी के रास्ते नेपाल भेजी जाती है। हालांकि, इन गोदामों को लेकर जिम्मेदार विभागों की ओर से क्या कार्रवाई की गई, यह जांच का विषय है।
कड़ी निगरानी का दावा
अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र में कड़ी निगरानी की जा रही है। कहीं से भी सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जाती है।
