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चौरीचौरा(गोरखपुर)। शिक्षा प्रेरकों की बहाली का मुद्दा एक बार फिर उठने लगा है। लंबे समय से रोजगार और आर्थिक संकट से जूझ रहे शिक्षा प्रेरकों के परिवारों को अब सरकार से राहत की उम्मीद है। सामाजिक कार्यकर्ता सरिता यादव ने शिक्षा प्रेरकों की जल्द बहाली की मांग करते हुए कहा कि सरकार को इनके भविष्य को लेकर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गांवों में शिक्षा की अलख जगाने और सरकारी योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाने में शिक्षा प्रेरकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रत्येक गांव में दो शिक्षा प्रेरकों की तैनाती रही है। इनमें बड़ी संख्या में उच्च शिक्षित युवा शामिल हैं, जो ग्रामीण स्तर पर विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में सक्षम हैं। इसके बावजूद लंबे समय से काम से दूर होने के कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा है।
सरिता यादव ने कहा कि शिक्षा प्रेरकों की बहाली से केवल रोजगार का रास्ता नहीं खुलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा से वंचित लोगों को जोड़ने, सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने और पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाने में भी मदद मिलेगी। गांवों में शिक्षा और जागरूकता से जुड़े कार्यों के लिए अनुभवी शिक्षा प्रेरकों की सेवाओं का उपयोग किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में चार हजार रुपये की वृद्धि कर इसे 12 हजार रुपये किया गया है। इसके साथ पांच लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा की सुविधा भी दी गई है। सरकार का यह कदम सराहनीय है, लेकिन लंबे समय से आर्थिक संकट झेल रहे शिक्षा प्रेरकों की ओर भी ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रेरकों की बहाली से हजारों परिवारों को आर्थिक संबल मिलेगा। बेरोजगारी से जूझ रहे शिक्षित युवाओं को फिर से काम मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा एवं सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को मजबूती मिलेगी। सरकार को इस दिशा में जल्द सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए, ताकि लंबे समय से रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे शिक्षा प्रेरकों को राहत मिल सके।
सरिता यादव ने उम्मीद जताई कि सरकार शिक्षा प्रेरकों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उनकी बहाली के लिए शीघ्र निर्णय करेगी।
