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गोरखपुर। गोलघर में हुए सीरियल बम ब्लास्ट के तार बाटला हाउस एनकाउंटर से जुड़े हैं। 13 सितंबर 2008 को दिल्ली में पांच अलग-अलग जगहों पर सीरियल ब्लास्ट हुए। दो बम कनॉट प्लेस में फटे थे तो दो ग्रेटर कैलाश के एम ब्लॉक में और एक बहुत ही भीड़-भाड़ वाली जगह करोल बाग के गफ्फार मार्केट में फोड़ा गया। धमाकों के बाद तीन जिंदा बम मिले जिन्हें डिफ्यूज कर दिया गया। सभी धमाकों में करीब 30 लोग मारे गए। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल सीरियल बम धमाकों की जांच कर रही थी। इसलिए पुलिस 19 सितंबर 2008 को बाटला हाउस में एल-18 नंबर की बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर दबिश दी। मुखबिरों ने बताया था कि इंडियन मुजाहीदीन के संदिग्ध आतंकी यहां छिपे हैं। पुलिस से क्रास फायरिंग में दो संदिग्धों की मौत हुई जिनकी मोहम्मद आतिफ और साजिद के रूप में हुई। मोहम्मद आतिफ वही था जिसने गोरखपुर में 22 मई 2007 की शाम सात बजे गोलघर के सीरियल ब्लास्ट को अंजाम देने में सहयोग किया था। इसके मुख्य सूत्रधार तारिक काजमी को गोरखपुर जिला एवं सत्र न्यायालय में 21 दिसंबर 2020 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने तारिक काजमी को दोषी पाया।
बस में सवार होकर गए आजमगढ़, मिलती रही पल-पल की जानकारी
गोलघर में 22 मई, 2007 की शाम सीरियल ब्लॉस्ट से पहले आजमगढ़ जाने के लिए बस में सवार हूजी और आईएम के आतंकियों को पल-पल की जानकारी मिल रही थी। ब्लॉस्ट करने के लिए आईएम आतंकी सैफ तीन बार रेकी करने गोरखपुर आया था। सलमान, छोटू के नाम से आया जबकि तारिक काजमी पूरे आपरेशन को लीड कर रहा था। मंगलवार बंदी के दिन सलमान ने रेती चौक पर जाकर समीर के नाम से साइकिलों को खरीदा। यहां हुए ब्लास्ट की जांच पूरी हो पाती। इसके पहले लखनऊ, बाराबंकी और अयोध्या की कचहरियों में सीरियल ब्लॉस्ट हुए। तब गोरखपुर की घटना को इसका ट्रायल माना गया था। गोलघर ब्लास्ट में छह लोग घायल हुए थे। 22 मई, 2007 की शाम 7 बजे सीरियल का पहला आतंकी विस्फोट जलकल बिल्डिंग के पास ट्रांसफार्मर के पास खड़ी साइकिल में रखे टिफिन बम में हुआ। लोगों का कहना है कि दो लोग घायल हुए। अफरातफरी का माहौल हो गया। अभी लोग कुछ समझ पाते कि पांच मिनट बाद ही एक विस्फोट बलदेव प्लाजा के पास स्थित पेट्रोल पंप के पास हो गया। इसके बाद भगदड़ मच गई। तभी ठीक पांच मिनट बाद तीसरा बम गणेश चौक पर हुआ। तीनों जगह साइकिल में टंगे झोले में रखे टिफिन में हुआ था।
दहल गया था गोरखपुर, दौड़ पड़े पुलिस- प्रशासन के अधिकारी
आतंकी ट्रांसफॉर्मर और पेट्रोल पंप को उड़ाना चाहते थे। शायद! इसी मंशा से उन्होंने जगह का चुनाव किया। विस्फ़ोट के समय पेट्रोल पंप के आसपास आग नहीं लगी। वरना बड़ी तबाही हो सकती थी। कैंट थाने की पुलिस ने घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंया। तत्कालीन एसएसपी आरके राय अपने सहयोगी पुलिस अफसरों के साथ जांच-पड़ताल में जुट गए। पुलिस अफसरों और सुरक्षा एजेंसियों की जांच-पड़ताल में मालूम हुआ कि धमाकों में टिफिन बम का इस्तेमाल किया गया। इसी के बाद पहली बार हूजी और आईएम आतंकियों का गंठजोड़ सामने आया। गोरखपुर में हुए सीरियल ब्लॉस्ट में आजमगढ़ के आतंकी सलमान उर्फ छोटू और आतिफ मुख्तार उर्फ राजू के अलावा सैफ को चिन्हित किया गया। जांच में आतिफ मुख्तार उर्फ राजू को पुलिस ने छोड़ दिया जो एक साल बाद 2008 में दिल्ली बाटला हाउस कांड में मारा गया। बाटला हाउस कांड के दौरान पकड़े गए आतंकियों ने सलमान उर्फ छोटू समेत कई का नाम बताया। सलमान को एटीएस ने 2010 में बढ़नी बार्डर से गिरफ्तार किया था। उस वक्त वह पाकिस्तान के करांची से विमान को हाइजैक करने की ट्रेनिंग लेकर नेपाल बॉर्डर से भारत में दाखिल हुआ था। 13 साल पूर्व हुए सीरियल ब्लास्ट में शामिल रहे मोहम्मद आतिफ के इनकाउंटर पर बनी फिल्म बाटला हाउस 15 अगस्त 2019 को रिलीज हुई थी।
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