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गोरखपुर, चाय पंचायत टीम।
रामगढ़ताल इलाके के होटल कृष्णा पैलेस में कानपुर के बर्रा निवासी रियल स्टेट कारोबारी मनीष गुप्ता अपने दो दोस्तों हरवीर और प्रदीप सिंह के साथ ठहरे हुए थे। 27 सितंबर की रात तकरीबन 12 बजकर 15 मिनट पर रामगढ़ताल थाना प्रभारी जगत नारायण सिंह, सब इंस्पेक्टर अक्षय कुमार मिश्रा सहित छह पुलिस वाले होटल के कमरा नंबर 512 में दाखिल हुए। काल बेल बजने पर हरवीर सिंह ने दरवाजा खोला। पुलिस ने बताया कि संदिग्धों की चेकिंग करने का आदेश हुआ है। आप लोग अपनी आईडी चेक कराइए। हरवीर ने अपनी आईडी तो दिखा दी लेकिन प्रदीप सिंह सोते रहे। उसी समय हरवीर ने मनीष गुप्ता को जगाया। मनीष की नींद खुली तो उन्होंने आधी रात को चेकिंग करने का विरोध जताया। उनकी हरकत पर पुलिस वालों ने अपशब्द कहे तो मनीष ने लखनउ में रहने वाले अपने एक परिचित को फोन करके जानकारी दी। इसके बाद ही पुलिस का पारा चढ़ गया। हरवीर को पीटते हुए पुलिस कर्मियों ने कमरे से बाहर कर दिया।
इस बात का विरोध जताने पर मनीष की पिटाई की गई। आरोप है कि पुलिस की पिटाई से आंख के पास गंभीर चोट लगने से काफी खून बहा जिससे मनीष की मौत हो गई। हालांकि पुलिस ने इस मौत को नहीं माना। थाने से अतिरिक्त फोर्स बुलाकर होटल कर्मचारियों की मदद से मनीष को फलमंडी के पास मानसी नर्सिंग होम में ले जाया गया। डॉक्टर ने नब्ज टटोली तो मामला गंभीर जानकर मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दी। घटना के करीब पौने दो घंटे के बाद मनीष को मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। वहां उनको भर्ती करने के लिए पुलिस ने दो पर्चियां बनवाईं। एक पर्ची में मरीज का नाम और पता अज्ञात दिखाया। लेकिन दूसरी पर्ची में मनीष का जिक्र किया। इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर ने मनीष की मौत होने की पुष्टि कर दी। इसके बाद पुलिस का खेल शुरू हुआ।
परत दर परत— पढ़िए पूरी कहानी, कब, कैसे और क्या हुआ?
— मनीष की मौत को एक दुखद घटना बताकर पुलिस ने उनके परिजनों को जानकारी दी।
— घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंचे गोरखपुर निवासी मनीष के दोस्तों धनंजय, राणा चंद, चंदन सैनी ने इसके लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया।
— हरियाणा से आए दोस्तों हरवीर और प्रदीप ने मीडिया को बताया कि पुलिस की पिटाई से मनीष की मौत हुई है। यह दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या है। लेकिन पुलिस ने उनको डर दिखाकर चुप करा दिया।
— 28 अगस्त की सुबह पांच बजे कानपुर में रहने वाली मनीष की पत्नी मीनाक्षी और उनके परिवार के सदस्य गोरखपुर के लिए रवाना हुए। दोपहर में करीब 12 बजे तक मीनाक्षी गोरखपुर पहुंच गईं।
— मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में रखी पति की बॉडी देखकर उन्होंने पति की हत्या का आरोप लगाया।
— इस मामले की जानकारी होने पर एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने इंस्पेक्टर जेएन सिंह, सब इंस्पेक्टर अक्षय कुमार मिश्रा, राहुल दुबे, विजय कुमार यादव, हेड कांस्टेबल कमलेश यादव, कांस्टेबल प्रशांत कुमार को निलंबित कर दिया।
— मनीष के पोस्टमार्टम में सिर में गंभीर, बदन पर चोटों के निशान मिले। उनकी पत्नी मीनाक्षी ने पति की हत्या का मुकदमा लिखने की मांग को लेकर रात में आठ बजे धरना शुरू कर दिया।
— दूसरी तहरीर लेकर पुलिस ने रामगढ़ताल थाना में इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह, अक्षय मिश्रा और विजय यादव के खिलाफ नामजद और तीन अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ।
— रात में पति की बॉडी लेकर कानपुर जाने के पहले मीनाक्षी होटल में पहुंचीं। वहां मनीष का सामान तलाशने के दौरान खून से भींगा हुआ एक तौलियां मिला। तब मीनाक्षी को यकीन हो गया कि उनके पति की हत्या की गई है।
— पति की बॉडी लेकर मीनाक्षी 29 सितंबर की सुबह कानपुर स्थित अपने आवास पर पहुंच गईं। उन्होंने आरोपित पुलिस वालों की गिरफ्तारी, मामले की कानपुर में गठित एसआईटी से जांच कराने, परिवार को आर्थिक सहायता देने और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग पूरी होने पर शवदाह कराने की बात कही।
— गोरखपुर में हुई घटना पर राजनीति गर्म हो गई।कानपुर में मुख्यमंत्री का प्रोग्राम लगा था। इसलिए मामला ज्यादा तूल पकड़ने लगा।
—फिलहाल पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने मांग पूरी करने का आश्वासन देकर मनीष का दाह संस्कार कराया। पीड़ित परिवार की मुलाकात मुख्यमंत्री से कराई गई। मुख्यमंत्री ने संवेदना जताते हुए आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया।
— 02 अक्टूबर को कानपुर के एससीपी आनंद कुमार तिवारी के नेतृत्व में एसआईटी की सात सदस्यीय टीम और फारेसिंक टीम के सदस्य गोरखपुर पहुंचे।
— टीम ने सबसे पहले होटल की छानबीन की। कर्मचारियों और मालिक से बात की। कमरा नंबर 512 को देखकर घटना का सीन रिक्रेएट किया। होटल से मानसी हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज तक जांच में पुलिस की लापरवाही और घटना को छिपाने के प्रमाण मिले।
— एसआईटी ने सीसीटीवी फुटेज, रामगढ़ताल थाना में जनरल डॉयरी, दर्ज मुकदमे, मेडिकल कॉलेज और मानसी नर्सिंग होम के दस्तावेजी प्रमाण जुटाए।
— मनीष को कब, कहां, कैसे ले जाया गया? उनकी मौत कैसे हुई? घटना के दौरान, मनीष के मृत्यु के बाद क्या—क्या हुआ इसकी जानकारी के लिए पुलिस वालों से लेकर होटल और उपचार में लगे डॉक्टर, कर्मचारियों और अन्य चश्मदीदों का बयान दर्ज किया।
— मनीष के गोरखपुर के सभी दोस्त, हरियाणा के हरवीर और प्रदीप सिंह, मनीष की पत्नी मीनाक्षी का बयान लिया।
— 07 अक्टूबर की रात गोरखपुर क्राइम ब्रांच के एसपी क्राइम, सीओ कैंपियरगंज के नेतृत्व में पुलिस की टीमों ने आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए उनके ठिकानों पर दबिश दी।
— मामले की विभागीय जांच कर रहे एसपी नार्थ मनोज कुमार अवस्थी ने आरोपित पुलिस कर्मचारियों को कार्य में लापरवाही, विवेकपूर्ण कार्य न करने का दोषी पाते हुए एसएसपी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी।
— पूरे प्रकरण में तह तक पहुंचने के लिए एसआईटी ने 30 लोगों का बयान दर्ज किया। इनमें होटल कर्मचारी, नर्सिंग होम के डॉक्टर और कर्मचारी, मेडिकल कॉलेज के स्टॉफ, मनीष के दोस्त, पत्नी सहित अन्य लोग शामिल हैं।
— एसआईटी ने सीसीटीवी फुटेज, होटल मैनेजर की तहरीर, दोस्तों के बयानों के आधार पर 13 पुलिस वालों को कुसूरवार पाया है।
— जीडी में दर्ज बयान, हकीकत में हुई घटना, उपचार सहित अन्य बिंदुओं पर जांच में सच्चाई सामने आई है।
— छह दिनों से घटना की जांच कर रही एसआईटी गुरुवार की देर शाम तक जांच रिपोर्ट शासन को भेजने की तैयारी पूरी कर चुकी थी।
इस दावे की खुली पोल, जांच में सच्चाई आई सामने
— पुलिस ने दावा किया था कि कमरे में चेकिंग के दौरान गिरने से मौत हुई है। लेकिन सीन रिक्रेएट करने में मनीष के बेड से गिरने के सबूत नहीं मिले। होटल के कमरे की एक तस्वीर भी वायरल हुई है जिसमें मनीष बैठे और खड़े नजर आ रहे हैं।
— होटल के कमरे की सफाई से पुलिस ने इंकार किया था। लेकिन केमिकल जांच में साफ हुआ कि कमरे में फैले खून, सीढ़ियों और लिफ्ट में लगे खून के दाग मिटाए गए थे। खून का दाग पुलिस जीप में भी पाया गया।
— निलंबित होने पर आरोपित पुलिस कर्मचारी फरार हो गए। लेकिन उनके बीमार होकर छुट्टी पर जाने की बात जीडी में दर्ज है।
— मनीष के नशे में होने की बात आई थी। कहा गया था कि नींद से जगने पर वह गिरे। लेकिन जांच में यह झूठ साबित हुआ।
मनीष की वायस रिकार्डिंग भी एसआईटी के पास है।
नोट: घटना, जांच और विभिन्न बाहरी स्रोतों से मिले इनपुट के आधार पर समाचार तैयार किया गया है। किसी तरह की तथ्यात्मक त्रुटि के लिए चाय पंचायत टीम जिम्मेदार नहीं होगी।
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