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एमएमएमयूटी के 11वें दीक्षांत समारोह में 1474 विद्यार्थियों को मिली उपाधि, राज्यपाल बोलीं- विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की होगी सबसे बड़ी भूमिका

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गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने 1474 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोध उपाधियां प्रदान कीं तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 20 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 46 स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया। समारोह में उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीकी ज्ञान, नवाचार और शोध को राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित करने का आह्वान करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी आज के युवाओं के कंधों पर है।
दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित आर्यभट्ट सभागार का लोकार्पण किया। साथ ही विश्वविद्यालय की सभी डिग्रियों एवं अंकपत्रों को डिजीलॉकर पर उपलब्ध कराने की पहल की शुरुआत की। इस अवसर पर वार्षिक पत्रिका मालविका, हिंदी पत्रिका प्रवाह, चित्र पत्रिका कार्विंग्स तथा गोद लिए गए गांवों की गतिविधियों पर आधारित रिपोर्ट ग्रामोत्थान का विमोचन किया गया। देवरिया के पांच आंगनबाड़ी केंद्रों को किट वितरित की गई तथा “मेरी मां” प्रतियोगिता के विजेता स्कूली बच्चों को सम्मानित किया गया।
राज्यपाल ने कहा कि पंडित मदन मोहन मालवीय ने शिक्षा को केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, राष्ट्रभक्ति और समाज सेवा का आधार बनाया था। एमएमएमयूटी से निकलने वाले प्रत्येक विद्यार्थी का दायित्व है कि वह अपने ज्ञान और तकनीकी कौशल का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखकर समाज और मानवता के कल्याण के लिए करे।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष 1474 उपाधियां डिजीलॉकर पर उपलब्ध कराई गई हैं। पदक प्राप्त करने वालों में 60 प्रतिशत छात्राएं और 40 प्रतिशत छात्र हैं, जो उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रमाण है।
राज्यपाल ने कहा कि आज का युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, डेटा साइंस और डिजिटल तकनीक का है। भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि नई तकनीकों का निर्माण करने वाला आत्मनिर्भर राष्ट्र बन चुका है। उन्होंने गगनयान मिशन, मेड-इन-इंडिया सी-295 विमान, स्वदेशी युद्धपोत, लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल और एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) जैसी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से शोध और नवाचार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
उन्होंने नशा मुक्त भारत अभियान, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, “एक पेड़ मां के नाम”, मिशन लाइफ और कैच द रेन जैसे अभियानों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया। विश्वविद्यालयों से गोद लिए गए गांवों को नशामुक्त बनाने तथा वहां के बच्चों को मंच देकर उनकी प्रतिभा निखारने की अपील भी की।
राज्यपाल ने कहा कि विज्ञान और तकनीक का विकास तभी सार्थक होगा, जब उसके साथ पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व भी जुड़ा हो। उन्होंने सूरत के सर्कुलर वाटर इकोनॉमी मॉडल और “वेस्ट टू वेल्थ” की अवधारणा को देश के लिए प्रेरणादायी बताया।
समारोह में विशिष्ट अतिथि एवं उत्तर प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि एमएमएमयूटी लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। प्रदेश सरकार तकनीकी शिक्षा को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। टाटा टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के सहयोग से प्रदेश के 121 राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों को अत्याधुनिक एक्सीलेंस सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी एवं आधुनिक तकनीकी शिक्षा मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इसी विश्वविद्यालय से निकलने वाले युवा इसरो, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में देश का नाम रोशन करेंगे।
मुख्य अतिथि विकास कौशल ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि समाज के प्रति दायित्व निभाने का संकल्प लेने का भी अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर सीखने, नेतृत्व क्षमता विकसित करने और नवाचार को अपनाकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत को ऐसे युवा चाहिए, जिनमें तकनीकी दक्षता के साथ नैतिक मूल्य और समस्या समाधान की क्षमता भी हो।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान शिक्षा, शोध, नवाचार, स्टार्टअप और उद्योग-अकादमिक सहयोग के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा और वैश्विक स्तर की शोध संस्कृति विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही विद्यार्थियों से उत्कृष्टता, अनुशासन और नवाचार की परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
समारोह में शोधार्थियों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों की बड़ी संख्या मौजूद रही। दीक्षांत समारोह के दौरान स्वर्ण पदक विजेताओं का सम्मान और उपाधि वितरण आकर्षण का केंद्र रहा। राज्यपाल ने अंत में विद्यार्थियों को संदेश दिया कि असफलताओं से घबराए बिना आत्मविश्वास, अनुशासन और परिश्रम के साथ आगे बढ़ें, क्योंकि यही गुण उन्हें सफल नागरिक और राष्ट्रनिर्माता बनाएंगे।

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