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दीक्षांत समारोह में राज्यपाल का संदेश: बेटियों की सफलता पर गर्व, छात्रों के प्रदर्शन पर आत्ममंथन जरूरी; नशामुक्त परिसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर दिया जोर

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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 45वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों से ज्ञान के साथ चरित्र, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देना है।
राज्यपाल ने कहा कि गोरखपुर भगवान बुद्ध की करुणा, महायोगी गुरु गोरखनाथ की तपोभूमि, संत कबीर की समरसता, प्रेमचंद की साहित्य साधना और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद की भूमि है। विद्यार्थियों को इन महान विभूतियों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान के लिए कार्य करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि इस दीक्षांत समारोह में 76,481 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जिनमें 51,193 छात्राएं हैं। वहीं 172 पदकों में से 85 मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया, जिनमें 63 छात्राएं और 22 छात्र शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह उच्च शिक्षा में बेटियों की बढ़ती भागीदारी और उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रमाण है। साथ ही उन्होंने प्रश्न उठाया कि जब अवसर समान हैं तो छात्रों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कम क्यों है। इस पर समाज, शिक्षकों और अभिभावकों को गंभीर आत्ममंथन करना चाहिए।
राज्यपाल ने मुख्य अतिथि एवं नीति आयोग के सदस्य तथा प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. विजय कुमार सारस्वत के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां युवाओं को विज्ञान, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में प्रेरित करेंगी।
उन्होंने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रवेश परीक्षाओं का पारदर्शी आयोजन, कम समय में लगभग 80 प्रतिशत प्रवेश, नेपाल सहित विभिन्न राज्यों से शोधार्थियों का आकर्षण, डिजिटल लाइब्रेरी का विस्तार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा का समन्वय, नए तकनीकी एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रम तथा प्रधानमंत्री उषा योजना के तहत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना सराहनीय पहल हैं।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने भारत के खेल प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने 39 पदक जीतकर चौथा स्थान प्राप्त किया। उन्होंने विशेष रूप से बेटियों के शानदार प्रदर्शन, मुक्केबाजी, भारोत्तोलन, जूडो और एथलेटिक्स में मिली उपलब्धियों को देश के लिए गर्व का विषय बताया।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी मातृभाषा, संस्कृति और भारतीय जीवन मूल्यों पर गर्व करने का आह्वान करते हुए कहा कि दुनिया को केवल तकनीकी विशेषज्ञ नहीं, बल्कि संवेदनशील और संस्कारित नागरिकों की आवश्यकता है। ज्ञान तभी सार्थक है जब उसके साथ चरित्र और सेवा भाव जुड़ा हो।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिली है। विदेशों से सैकड़ों प्राचीन भारतीय मूर्तियों और धरोहरों की वापसी तथा काशी, अयोध्या, उज्जैन और सोमनाथ जैसे तीर्थों के विकास को उन्होंने सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया।
उन्होंने विश्वविद्यालयों में नशामुक्त परिसर बनाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि छात्रावासों में नशीले पदार्थ मिलने की घटनाएं चिंताजनक हैं। विश्वविद्यालय अपने गोद लिए गए गांवों को भी नशामुक्त बनाने का अभियान चलाएं। उन्होंने बच्चों को बचपन से ही नशे से दूर रखने और अभिभावकों को भी जागरूक रहने की अपील की।
राज्यपाल ने आंगनबाड़ी और प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि कहानी, चित्रकला और रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देकर भविष्य की प्रतिभाओं को तैयार किया जा सकता है। उन्होंने बालिकाओं के एचपीवी टीकाकरण अभियान को भी गति देने का आह्वान किया।
छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान हॉस्टल की रसोई में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं मिली। उन्होंने खाद्य सुरक्षा विभाग को नमूने लेकर जांच कराने के निर्देश दिए और स्पष्ट कहा कि विद्यार्थियों को पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलना चाहिए। बाहर से टिफिन मंगाने की व्यवस्था बंद कर विश्वविद्यालय को स्वयं बेहतर भोजन उपलब्ध कराना चाहिए।
उन्होंने अलकनंदा छात्रावास सहित अन्य हॉस्टलों में वाई-फाई, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी का उल्लेख करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को तीन माह के भीतर सभी कमियां दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गोरखपुर मुख्यमंत्री का गृह जनपद है, इसलिए यहां के विश्वविद्यालय में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
समारोह में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी, नीति आयोग के सदस्य डॉ. विजय कुमार सारस्वत, कुलपति प्रो. पूनम टंडन, कार्यपरिषद एवं विद्यापरिषद के सदस्य, शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे।

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