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गोरखपुर। क्षय रोग के दवा प्रतिरोधी मामलों की समय पर पहचान अब पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज़ हो सकेगी। एम्स गोरखपुर के शोधकर्ताओं के अध्ययन में नई जांच तकनीक एक्सपर्ट एमटीबी/एक्सडीआर को प्रभावी पाया गया है। इस तकनीक से क्षय रोग की प्रमुख दवाओं के प्रति प्रतिरोध का पता कुछ ही घंटों में लगाया जा सकता है, जिससे रोगियों का उपचार समय पर शुरू करने में मदद मिलेगी। यह शोध प्रतिष्ठित नेशनल मेडिकल जर्नल ऑफ इंडिया में प्रकाशित हुआ है।
एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता ने शोध दल को बधाई देते हुए कहा कि दवा प्रतिरोधी क्षय रोग की शीघ्र पहचान रोगियों के बेहतर उपचार के साथ देश के राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन अभियान को भी गति देगी। उन्होंने कहा कि इस तरह के शोध साक्ष्य आधारित चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम को भी नई दिशा देंगे।
अध्ययन में बताया गया है कि पारंपरिक जांच पद्धति से दवाओं के प्रति प्रतिरोध का पता लगाने में कई सप्ताह लग जाते हैं। जबकि एक्सपर्ट एमटीबी/एक्सडीआर तकनीक सीधे रोगी के नमूने से आइसोनियाजिड, फ्लोरोक्विनोलोन, एथियोनामाइड तथा दूसरी पंक्ति की इंजेक्शन वाली दवाओं के प्रति प्रतिरोध की पहचान कुछ घंटों में कर सकती है। इससे चिकित्सकों को रोगी के लिए उपयुक्त दवा चुनने में आसानी होगी।
शोध के दौरान क्षय रोग से संक्रमित 100 नमूनों की जांच की गई। इनमें 89 नमूनों में नई तकनीक से संक्रमण की पुष्टि हुई। जांच में 22.5 प्रतिशत मामलों में आइसोनियाजिड के प्रति प्रतिरोध, 19.1 प्रतिशत में फ्लोरोक्विनोलोन के प्रति प्रतिरोध तथा 2.2 प्रतिशत मामलों में दूसरी पंक्ति की इंजेक्शन वाली दवाओं के प्रति प्रतिरोध पाया गया।
एम्स गोरखपुर के सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं मुख्य शोधकर्ता डॉ. अरूप मोहंती ने बताया कि भारत में दवा संवेदनशील और दवा प्रतिरोधी, दोनों प्रकार के क्षय रोग के लिए इस नई जांच तकनीक का मूल्यांकन करने वाला यह पहला अध्ययन है। उनका कहना है कि यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाया जाता है तो दवा प्रतिरोधी क्षय रोग की पहचान में होने वाली देरी कम होगी और रोगियों के उपचार के परिणाम पहले से बेहतर होंगे।
