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हाटा के पट्टन व सोनबरसा में भूमि चिह्नित, उद्योग-रोजगार के साथ कौशल विकास और उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा
कुशीनगर। जिले में उद्योगों को बढ़ावा देने और स्थानीय युवाओं को रोजगार व स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में बड़ी पहल हुई है। सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक जोन की स्थापना के लिए हाटा तहसील के ग्राम पट्टन और सोनबरसा में कुल 76.32 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर की ओर से भूमि संबंधी प्रस्ताव उद्योग निदेशालय को भेज दिया गया है। विशेषज्ञ टीम से भूमि की उपयोगिता का मूल्यांकन कराने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
पट्टन में 55.45 एकड़ और सोनबरसा में 20.87 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। यह भूमि जिला मुख्यालय से करीब 28 किलोमीटर, गोरखपुर से 30 किलोमीटर और हाटा तहसील मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर दूर है। प्रशासन के अनुसार चिह्नित भूमि हाईटेंशन तारों से मुक्त है। यहां सड़क संपर्क और विद्युत आपूर्ति की सुविधा उपलब्ध है तथा भूमि निचले क्षेत्र में नहीं है। भूमि चयन के निर्धारित मानकों को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव भेजा गया है।
उत्तर प्रदेश दिवस पर हुई थी घोषणा
उत्तर प्रदेश दिवस 2026 के अवसर पर मुख्यमंत्री की ओर से प्रदेश के सभी जिलों में 50 एकड़ से अधिक भूमि पर सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक जोन स्थापित करने की घोषणा की गई थी। इसके लिए ऐसे स्थानों का चयन किया जाना है, जो जिला मुख्यालय के 20 किलोमीटर के दायरे में हों, हाईटेंशन तारों से मुक्त हों तथा सड़क और बिजली की सुविधा से जुड़े हों। भूमि निचले क्षेत्र में भी नहीं होनी चाहिए।
हालांकि कुशीनगर में चिह्नित भूमि जिला मुख्यालय से करीब 28 किलोमीटर दूर है, लेकिन प्रशासन ने अन्य निर्धारित मानकों के अनुरूप भूमि को उपयुक्त पाते हुए प्रस्ताव उद्योग निदेशालय को भेजा है। प्रस्ताव पर विशेषज्ञ टीम से उपयोगिता का परीक्षण कराया जाएगा।
करीब 100 एकड़ सरकारी भूमि की हुई थी पहचान
जोन के लिए भूमि चिह्नित करने से पहले हाटा तहसील के पट्टन और सोनबरसा में करीब 100 एकड़ सरकारी भूमि की पहचान की गई थी। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने स्थल का निरीक्षण कर भूमि की स्थिति की जानकारी ली थी। उन्होंने फर्जी इंद्राज हटाने, भूमि का सीमांकन कराने, राजस्व अभिलेखों की जांच करने और भूमि को दोबारा सरकारी अभिलेखों में दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही ड्रोन सर्वे कराने के लिए भी कहा गया था।
एक ही परिसर में उद्योग, प्रशिक्षण और रोजगार
सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक जोन को केवल पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य उद्योग, कौशल विकास, रोजगार और उद्यमिता को एक ही व्यवस्था से जोड़ना है। न्यूनतम 50 एकड़ भूमि पर विकसित होने वाले ऐसे जोन में निवेशकों के लिए भूमि बैंक और प्लग एंड प्ले सुविधा उपलब्ध कराने की परिकल्पना है।
जोन में संबंधित विभागों के कार्यालय व सहायता केंद्र, कौशल प्रशिक्षण केंद्र, एकीकृत सामान्य सुविधा केंद्र, उत्पाद विशेष परीक्षण सुविधा, उत्पाद प्रदर्शन एवं डिजाइन केंद्र, ट्रक पार्किंग, आवश्यकतानुसार अपशिष्ट उपचार संयंत्र, वाहन प्रशिक्षण ट्रैक और कामगारों के लिए छात्रावास जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
युवाओं को प्रशिक्षण से रोजगार तक जोड़ने की योजना
जोन में कौशल प्रशिक्षण के साथ रोजगार सुविधा और नियुक्ति केंद्र स्थापित करने की भी परिकल्पना है। युवाओं को प्रशिक्षण देने के बाद उन्हें उद्योगों में रोजगार से जोड़ने के साथ स्वरोजगार और उद्यम शुरू करने के लिए मार्गदर्शन व सहायता दी जाएगी। उद्यमियों को सलाह, बैंकिंग और अन्य व्यावसायिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराने की योजना है।
इसके अलावा एकीकृत सामान्य सुविधा केंद्र, स्थानीय उत्पादों के प्रदर्शन और सहायता की व्यवस्था, जिला उद्योग केंद्र व रोजगार कार्यालय जैसी सेवाओं का एकीकरण तथा आधुनिक आधारभूत ढांचे के साथ डिजिटल प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। इससे स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण, नियुक्ति और उद्यमिता के अवसर एक ही परिसर में मिल सकेंगे।
एमएसएमई को मिलेगा बढ़ावा
सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक जोन की अवधारणा का प्रमुख उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को बढ़ावा देना है। प्लग एंड प्ले औद्योगिक शेड और आवश्यक सुविधाओं के माध्यम से विनिर्माण व सेवा क्षेत्र की इकाइयों को जल्द शुरू करने में मदद मिलेगी। स्थानीय उत्पादों को बाजार और उद्यमियों को आधारभूत सुविधाएं मिलने से जिले में निवेश का माहौल मजबूत होने की उम्मीद है।
योजना की शुरुआत उत्तर प्रदेश दिवस 2026 के अवसर पर की गई थी। वर्ष 2026-27 के बजट में इसके लिए 575 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। प्रदेश के सभी जिलों में उपयुक्त भूमि चिह्नित कर ऐसे जोन विकसित करने की परिकल्पना है। कुशीनगर में 76.32 एकड़ भूमि चिह्नित होने से अब जिले में इस महत्वाकांक्षी योजना के धरातल पर उतरने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।
इनसे उम्मीदें:
जिले में नए उद्योगों की स्थापना को गति
स्थानीय युवाओं के लिए प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर
स्वरोजगार व नए उद्यमों को बढ़ावा
एमएसएमई इकाइयों को प्लग एंड प्ले सुविधा
स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शन और बाजार की बेहतर सुविधा
उद्योग, कौशल विकास और रोजगार सेवाओं का एक ही परिसर में एकीकरण
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