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गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी समाज की प्रगति ऊंची इमारतों से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक कितनी मजबूती से पहुंच रहा है। अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना ही सुशासन का पहला सूत्र है। उन्होंने घोषणा की कि दिव्यांगजन की पेंशन धनराशि में जल्द ही एक बार फिर वृद्धि की जाएगी। साथ ही प्रदेश के सभी 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री बुधवार को सिविल लाइंस स्थित गोरखपुर क्लब में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने 509 दिव्यांगजन को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, ई-ट्राइसाइकिल, ट्राइसाइकिल, स्मार्टफोन, स्मार्टकेन, ब्रेल किट, श्रवण यंत्र समेत 664 सहायक उपकरण वितरित किए। कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासन प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित किया गया।
पहले 300, फिर 500 और अब 1000 रुपये हुई पेंशन
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांगजन को पहले 300 रुपये मासिक पेंशन मिलती थी। प्रदेश सरकार ने इसे बढ़ाकर 500 और फिर 1000 रुपये किया। अब कुछ दिनों में पेंशन धनराशि में फिर वृद्धि की जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026-27 में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में शिविर लगाकर पेंशन से वंचित दिव्यांगजन को योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 17 लाख से अधिक दिव्यांगजन की डिजिटल पहचान मजबूत कर उन्हें कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार का जोर बचपन से ही दिव्यांगता की पहचान, उपचार, थेरेपी, विशेष शिक्षा और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने पर है। तीन से सात वर्ष की आयु के श्रवणबाधित, दृष्टिबाधित और बौद्धिक दिव्यांगता वाले बच्चों के लिए बचपन डे केयर सेंटरों का विस्तार किया जा रहा है।
18 मंडलों में बनेंगे जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। गोरखपुर में सीतापुर आई हास्पिटल परिसर में केंद्र शुरू हो चुका है। उन्होंने दिव्यांगजन को मुख्यमंत्री युवा, पीएम स्वनिधि, एक जिला एक उत्पाद, पीएम विश्वकर्मा, पीएम मुद्रा और स्टैंड अप जैसी योजनाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार कॉक्लियर इंप्लांट के लिए छह लाख रुपये तक की सहायता के साथ स्पीच थेरेपी में भी सहयोग करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांगजन के सशक्तीकरण का सबसे बड़ा माध्यम शिक्षा है। उत्तर प्रदेश में लखनऊ और चित्रकूट में दिव्यांगजन के लिए दो विश्वविद्यालय संचालित हैं।
प्रतिभा को दया नहीं, अवसर की जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि शारीरिक चुनौती किसी व्यक्ति की प्रतिभा की राह में बाधा नहीं बन सकती। प्रतिभा को दया नहीं, अवसर की आवश्यकता है। सही साधन और प्रशिक्षण मिलने पर दिव्यांगजन अपनी क्षमता की ऊंचाई तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने अष्टावक्र, सूरदास, रवींद्र जैन, अरुणिमा सिन्हा और पैरालंपिक खिलाड़ियों के उदाहरण देते हुए कहा कि उपलब्धियां केवल शारीरिक क्षमता से नहीं, बल्कि मजबूत हौसले से हासिल होती हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2015 में ‘विकलांग’ के स्थान पर ‘दिव्यांग’ शब्द का प्रयोग कर समाज की दृष्टि बदलने का प्रयास किया। दिव्यांगजन की सुविधा के लिए ब्रेल व ऑडियो सूचना, टैक्टाइल पाथ, सुलभ डिजिटल सेवाएं, सांकेतिक भाषा, कैप्शन और विजुअल अलर्ट जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
दिव्यांगजन को मिले करीब सवा करोड़ के उपकरण
कार्यक्रम में 127 दिव्यांगजन को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, 25 को ई-ट्राइसाइकिल, 70 को ट्राइसाइकिल तथा 155 दिव्यांगजन को 319 स्मार्टकेन और ब्रेल किट दी गईं। इसके अलावा 90 को श्रवण यंत्र, पांच को स्मार्टफोन, एक को ब्रेल लिपि की गीता, एक को ब्रेल लिपि की रामचरितमानस, 10 को कृत्रिम अंग, 20 को वयोश्री योजना का लाभ और पांच दिव्यांगजन को पाठ्य पुस्तकें दी गईं। इन उपकरणों की कुल कीमत करीब सवा करोड़ रुपये बताई गई।
2026-27 में दिव्यांगजन विभाग का बजट 2200 करोड़
कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने कहा कि प्रदेश सरकार ने दिव्यांगजन से जुड़ी योजनाओं के लिए बजट में लगातार वृद्धि की है। उनके अनुसार वर्ष 2026-27 में विभाग का बजट 2200 करोड़ रुपये है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 55 बचपन डे केयर सेंटर संचालित हैं और 28 नए केंद्र खोले जाने हैं।
इस अवसर पर जिले के प्रभारी मंत्री एवं जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मत्स्य विभाग के मंत्री संजय निषाद, पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह, जिला पंचायत की प्रशासक साधना सिंह, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, श्रीराम चौहान, राजेश त्रिपाठी, महेंद्रपाल सिंह, विपिन सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एसपी मोहंती, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय और जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी सहित अन्य उपस्थित रहे।
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