नाना पाटेकर का निधन: गोरखपुर में शोक, प्रशंसकों ने कहा- स्वाभाविक अभिनय के युग का अंत

नाना पाटेकर का निधन: गोरखपुर में शोक, प्रशंसकों ने कहा- स्वाभाविक अभिनय के युग का अंत

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वरिष्ठ पत्रकार आनंद सिंह और भोजपुरी एसोसिएशन आफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. राकेश श्रीवास्तव ने अभिनेता को दी श्रद्धांजलि, कहा- भारतीय सिनेमा को हुई अपूरणीय क्षति

गोरखपुर। प्रख्यात अभिनेता, रंगकर्मी एवं फिल्म निर्देशक नाना पाटेकर के निधन की खबर से गोरखपुर में भी उनके प्रशंसकों और कला प्रेमियों में शोक की लहर है। 75 वर्ष की आयु में उनके निधन से हिंदी और मराठी सिनेमा में एक ऐसी कमी पैदा हुई है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी। गोरखपुर के प्रशंसकों ने नाना पाटेकर के स्वाभाविक अभिनय, दमदार संवाद अदायगी और सादगी भरे व्यक्तित्व को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।

वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं कला समीक्षक आनंद सिंह

वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं कला समीक्षक आनंद सिंह ने कहा कि नाना पाटेकर के निधन से भारतीय सिनेमा में स्वाभाविक अभिनय के एक विशिष्ट अध्याय का समापन हो गया। उनकी संवाद अदायगी की दुनिया में पैदा हुई खामोशी को भर पाना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर कभी किसी एक तरह की भूमिका तक सीमित रहने वाले अभिनेता नहीं रहे। सहजता और प्रभाव के साथ किरदार को पर्दे पर जीवंत करना उनकी खासियत थी।
आनंद सिंह ने कहा कि लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचने के बावजूद नाना पाटेकर के व्यक्तित्व में सादगी बनी रही। उन्होंने अभिनय के साथ सामाजिक सरोकारों को भी महत्व दिया। किसानों की समस्याओं और सूखे से प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए उनके प्रयास उन्हें अन्य कलाकारों से अलग पहचान दिलाते हैं।
उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर की फिल्मों में मनोरंजन के साथ सामाजिक और मानवीय सरोकार भी दिखाई देते थे। प्रहार, अग्निसाक्षी, अब तक छप्पन और वेलकम जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी अभिनय क्षमता का परिचय दिया। गंभीर भूमिकाओं से लेकर हास्य और व्यावसायिक सिनेमा तक उन्होंने दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई।
‘भाई’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. राकेश श्रीवास्तव

भोजपुरी एसोसिएशन आफ इंडिया ‘भाई’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. राकेश श्रीवास्तव ने भी नाना पाटेकर के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर के निधन से भारतीय सिनेमा को अपूरणीय क्षति हुई है। उनका सशक्त, स्वाभाविक और बहुआयामी अभिनय हिंदी एवं मराठी सिनेमा की महत्वपूर्ण विरासत है। उनकी संवाद-अदायगी और संवेदनशील व्यक्तित्व दर्शकों के बीच लंबे समय तक याद किया जाएगा।
गोरखपुर में नाना पाटेकर के प्रशंसकों ने कहा कि वह केवल अभिनेता नहीं थे, बल्कि अपने किरदारों में जान डाल देने वाले कलाकार थे। उनकी आवाज, संवाद बोलने का अंदाज और अभिनय की विशिष्ट शैली उन्हें दर्शकों के बीच हमेशा जीवित रखेगी। नाना पाटेकर का निधन सिनेमा जगत के लिए ही नहीं, बल्कि उनके लाखों प्रशंसकों के लिए भी भावुक कर देने वाली खबर है।

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