नौकरी छोड़ सनातन के प्रचार पर निकले प्राणेश, 234 दिन से जारी है पदयात्रा

IMG_20261024_081435

Estimated reading time: 1 minute

कंधे पर तिरंगा और शिवध्वज लेकर लोगों तक पहुंचा रहे शिवभक्ति का संदेश, जीवनभर सनातन सेवा के लिए अविवाहित रहने का संकल्प

गोरखपुर। सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और शिवभक्ति का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के संकल्प के साथ पश्चिम बंगाल के कूचबिहार निवासी प्राणेश कुमार घोष पदयात्रा पर निकले हैं। नौकरी छोड़कर शुरू की गई उनकी यह यात्रा 234 दिन पूरे कर चुकी है। गुरुवार को वह गोरखपुर के सोनबरसा बाजार पहुंचे। पीठ पर बैग, तिरंगा और भगवान शिव की ध्वज पताका लेकर चल रहे प्राणेश जहां से गुजरते हैं, वहां लोग उनके संकल्प और यात्रा के उद्देश्य के बारे में जानने के लिए उत्सुक हो जाते हैं।

प्राणेश ने तीन मार्च 2026 को कूचबिहार जिले के गीतालदहा बाजार स्थित नोतुन शिव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद पदयात्रा शुरू की थी। उनका उद्देश्य देश के प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन करने के साथ लोगों को सनातन धर्म, धार्मिक आस्था और शिवभक्ति के प्रति जागरूक करना है। उनका संकल्प है कि जीवनभर अविवाहित रहकर स्वयं को सनातन सेवा के लिए समर्पित रखेंगे। इस यात्रा में उनके साथी श्यामल दास भी साथ हैं।

प्रमुख तीर्थों के दर्शन कर रहे प्राणेश

पदयात्रा के दौरान प्राणेश बाबा वैद्यनाथ धाम, काशी विश्वनाथ, अयोध्या राम मंदिर, गोरखनाथ मंदिर और लोधेश्वर महादेव सहित कई प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन कर चुके हैं। हरिद्वार, ऋषिकेश, यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ, गुप्तकाशी विश्वनाथ मंदिर, धारी माता और पंच प्रयाग भी उनकी यात्रा के प्रमुख पड़ाव रहे हैं।

इस दौरान उन्हें दुर्गम पहाड़ी रास्तों और जंगलों की चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन शिवभक्ति के प्रति उनकी आस्था और संकल्प कमजोर नहीं पड़ा। विभिन्न क्षेत्रों में मिले सहयोग और सम्मान को उन्होंने अपनी यात्रा का संबल बताया।

18 महीने में प्रमुख शिवधामों की यात्रा का लक्ष्य

प्राणेश का लक्ष्य करीब 18 महीने में देश के प्रमुख शिवधामों की यात्रा पूरी करना है। नौकरी के दौरान बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मेट्रो स्टेशन परियोजना में सुरक्षा संबंधी उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें प्रशंसा प्रमाणपत्र भी मिल चुका है। अब वह व्यक्तिगत उपलब्धियों से आगे बढ़कर सनातन धर्म के प्रचार और शिवभक्ति के संदेश को अपनी यात्रा का उद्देश्य बनाए हुए हैं।

Leave a Reply