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25 गांवों की छह हजार एकड़ जमीन अधिग्रहण का विरोध, 2016 के सर्किल रेट पर मुआवजा देने पर जताई आपत्ति; अखिलेश यादव ने भी मुख्य सचिव को लिखा पत्र
गोरखपुर। नया गोरखपुर बसाने के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसानों का आंदोलन तेज होने लगा है। 25 गांवों की करीब छह हजार एकड़ जमीन अधिग्रहित किए जाने की योजना पर सवाल उठाते हुए समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य कुंवर प्रताप सिंह ने आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि दो नवंबर तक किसानों की मांगों पर शासन-प्रशासन ने सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो तीन नवंबर से गोलघर स्थित टाउनहाल की गांधी प्रतिमा के समक्ष अहिंसात्मक आमरण अनशन शुरू करेंगे।
शनिवार को जारी बयान में कुंवर प्रताप सिंह ने कहा कि नया गोरखपुर परियोजना के लिए शहर के पूर्वी क्षेत्र के 13 और उत्तरी हिस्से के 12 गांवों की जमीन अधिग्रहण के दायरे में लाई जा रही है। इससे 10 हजार से अधिक किसानों और उनके परिवारों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है। इन गांवों के अधिकांश परिवार खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में जमीन छिनने से उनके सामने रोजगार और आर्थिक सुरक्षा का संकट खड़ा हो सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की जमीन का मूल्यांकन वर्ष 2016 के पुराने सर्किल रेट के आधार पर किया जा रहा है, जबकि एक दशक में बाजार मूल्य में काफी वृद्धि हुई है। उन्होंने वर्ष 2026 के बाजार मूल्य के अनुरूप नया सर्किल रेट निर्धारित कर उचित मुआवजा देने की मांग की।
कुंवर प्रताप सिंह ने भूमि अधिग्रहण की प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, 19 सितंबर 2024 को जिलाधिकारी स्तर से धारा चार के तहत अधिसूचना प्रकाशित की गई थी। इसके बाद चार जुलाई 2025 को प्रमुख सचिव, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की ओर से भी इसी धारा के तहत प्रकाशन किया गया। उन्होंने अधिसूचनाओं की वैधानिकता की जांच कराने और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की है।
इस मामले में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी हस्तक्षेप किया है। उन्होंने आठ अक्टूबर 2026 को प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर 25 ग्राम पंचायतों की लगभग छह हजार एकड़ भूमि के अधिग्रहण से प्रभावित किसानों की समस्याओं का परीक्षण कराने और उनके हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लेने का अनुरोध किया है।
कुंवर प्रताप सिंह ने कहा कि विकास परियोजनाओं के लिए किसानों की पुश्तैनी जमीन लेने से पहले उनकी सहमति, आपत्तियों और भविष्य की आजीविका का ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कम कीमत पर जमीन लेकर बाद में आवासीय एवं व्यावसायिक परियोजनाओं के माध्यम से उसका अधिक मूल्य प्राप्त किया जाएगा। ऐसे में मूल भू-स्वामियों को भी विकास का उचित लाभ मिलना चाहिए।
उन्होंने शासन से नया गोरखपुर परियोजना पर पुनर्विचार करने, वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार सर्किल रेट लागू करने और किसानों की समस्याओं का समाधान करने की मांग की है। दो नवंबर तक मांगें पूरी नहीं होने पर तीन नवंबर से आमरण अनशन शुरू करने की घोषणा दोहराते हुए उन्होंने प्रभावित गांवों के किसानों से शांतिपूर्ण आंदोलन में सहयोग की अपील की।
