स्कूल जब से फीस तब से, गार्जियन ने किया प्रदर्शन

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गोरखपुर। प्राइवेट स्कूलों में जबरन फीस वसूली को लेकर गार्जियन लामबंद होने लगे हैं। प्राइवेट शिक्षण संस्थाओं में कम पढ़ाई होने के बावजूद लोगों से पूरी फीस मांगी जा रही है। स्कूल प्रबंधन जहां अपनी मजबूरी बताकर फीस बताकर बच्चों के गार्जियन से फीस जमा कराने को कह रहा है। वहीं इनकम में आई कमी की वजह से गार्जियन पूरी फीस भर पाने में खुद को नाकाम बता रहे। गुरुवार को प्रदेश सरकार के ​बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी से मिलकर अभिभावकों ने फीस माफी की गुहार लगाई थी। शुक्रवार को गोरखनाथ में एक स्कूल के सामने जमा होकर गार्जियन ने प्रदर्शन किया। हाथ में तख्ती लेकर पहुंचे गार्जियन ने कहा कि मार्च अप्रैल-मई की फीस भी अभिभावकों से वसूल रही है। यदि रसीद नहीं कट रही तो बच्चे का नाम काटा जा रहा है। इसको लेकर लोगों में आक्रोश है।

स्कूल जब से, फीस तब से
फीस लेकर बवाल बढ़ता ही जा रहा है। गार्जियन का आरोप है कि मनमानी करते हुए स्कूलों से उनके बच्चों का नाम काट दिया जा रहा है। कोरोना संक्रमण से हर कोई प्रभावित है। इसलिए इस बात का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। स्कूल पर धरना देने पहुंचे गार्जियन का कहना है कि वह लोग डीएम से इस संबंध में गुहार लगाएंगे। लोगों का कहना है कि जब स्कूल नहीं चला है तो फीस क्यों मांगी जा रही है। फीस की भारी रकम चुका पाने में नाकाम गार्जियन अपने बच्चों को घर पर बैठाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। इसलिए लोगों का कहना है कि जब से बच्चों की आनलाइन क्लास शुरू हुई है। तब से एक निर्धारित रकम ली जाए। लेकिन स्कूलों के प्रबंधक और प्रिंसिपल इस बात को मानने को तैयार नहीं हो रहे। प्रदर्शन करने वाले लोगों के हाथों में स्कूल जब से, फीस तब से की तख्ती भी थी।

स्कूल प्रबंधन की मजबूरी, कहां से देंगे सैलरी
फीस के मुद्दे पर अभिभावकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को प्रदेश सरकार के ​बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी से मुलाकात की। उन्होंने फीस माफी की बात से इंकार किया। लेकिन इतना जरूर कहा कि एक साथ पूरी फीस लेने के बजाय स्कूल प्रबंधन किसी भी गार्जियन से किस्तों में फीस जमा करा सकता है। यदि किसी ने जोर जबरस्ती की तो शिकायत आने पर उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि टीचर्स और स्टॉफ को पूरी सैलरी देनी है। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च है। साथ ही हर माह बैंक के लोन सहित अन्य तरह की देनदारी से निपटने के लिए फीस तो लेनी ही पड़ेगी। सैलरी देने के लिए कुछ तो फीस आनी चाहिए। फिलहाल, इस चक्कर में गार्जियन काफी परेशान हैं

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