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एनसीएल पोर्टल से बढ़ी विवेचकों की जवाबदेही, लंबित केस, ई-साक्ष्य और केस डायरी की होगी ऑनलाइन मॉनिटरिंग
आशुतोष मिश्र — चाय पंचायत
गोरखपुर/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस की विवेचना व्यवस्था अब पूरी तरह डिजिटल निगरानी के दायरे में आ गई है। किसी भी मुकदमे की जांच किस चरण में है, घटनास्थल का निरीक्षण हुआ या नहीं, पीड़ित और गवाहों के बयान दर्ज किए गए अथवा लंबित हैं—इन सभी जानकारियों के लिए अब वरिष्ठ अधिकारियों को विवेचक या थाना प्रभारी से अलग से जानकारी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। ‘न्यू क्रिमिनल लॉ मॉनिटरिंग (एनसीएल) पोर्टल’ पर एक क्लिक करते ही विवेचना की पूरी प्रगति ऑनलाइन उपलब्ध होगी।
पुलिस मुख्यालय ने प्रदेशभर में एनसीएल पोर्टल के माध्यम से विवेचनाओं की नियमित ऑनलाइन समीक्षा शुरू कर दी है। नई व्यवस्था का उद्देश्य जांच प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और जवाबदेह बनाना है। इसके साथ ही लंबित मामलों को लेकर विवेचक और थाना प्रभारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही भी तय होगी।
डीजीपी के निर्देश पर शुरू हुई सख्त मॉनिटरिंग
पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण के निर्देश के बाद कमिश्नरेट और जिला स्तर पर विवेचनाओं की गहन समीक्षा प्रारंभ कर दी गई है। इसी क्रम में आगरा कमिश्नरेट में डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने सभी एसीपी और थाना प्रभारियों के साथ ऑनलाइन समीक्षा बैठक कर लंबित विवेचनाओं, जांच की प्रगति और समय-सीमा से बाहर होने वाले मामलों का विस्तृत ब्यौरा मांगा।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि गंभीर अपराधों की विवेचना 90 दिन तथा सामान्य मामलों की जांच 60 दिन के भीतर पूरी करना अनिवार्य है। निर्धारित अवधि पार होने पर संबंधित विवेचना स्वतः डिफॉल्टर श्रेणी में दर्ज होगी, जिसका सीधा प्रभाव विवेचक और संबंधित थाने के प्रदर्शन मूल्यांकन पर पड़ेगा।
केवल वीडियो अपलोड नहीं, गुणवत्ता भी होगी जांच का हिस्सा
एनसीएल पोर्टल पर प्रत्येक विवेचना से जुड़े ई-साक्ष्य अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। घटनास्थल के निरीक्षण, वादी, गवाह और तहरीर लेखक के बयान के वीडियो सहित सभी आवश्यक डिजिटल साक्ष्य पोर्टल पर दर्ज किए जाएंगे।
हालिया समीक्षा में कई मामलों में गंभीर कमियां सामने आईं। कुछ घटनास्थलों के वीडियो धुंधले मिले, कई वीडियो में अत्यधिक शोर के कारण आवाज स्पष्ट नहीं थी, जबकि कुछ मामलों में बयान दर्ज कराने वाले व्यक्ति का व्यवहार जांच की गंभीरता के अनुरूप नहीं पाया गया। कई मुकदमों में वादी के बयान का वीडियो ही अपलोड नहीं किया गया था।
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केवल औपचारिक रूप से वीडियो अपलोड करना पर्याप्त नहीं होगा। प्रत्येक डिजिटल साक्ष्य स्पष्ट, गुणवत्तापूर्ण और न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप होना चाहिए।
अब फोन नहीं, सीधे पोर्टल से मिलेगा नोटिस
नई व्यवस्था के तहत सहायक पुलिस आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारी किसी भी कमी पर विवेचक को मौखिक निर्देश देने के बजाय एनसीएल पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन नोटिस जारी करेंगे। प्रत्येक नोटिस और उसका जवाब डिजिटल रिकॉर्ड का हिस्सा होगा, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित होंगी।
खराब प्रदर्शन पर थाना प्रभारी भी होंगे जिम्मेदार
अब थानों का मूल्यांकन केवल अपराध पंजीकरण के आधार पर नहीं बल्कि विवेचनाओं की गुणवत्ता, समयबद्ध निस्तारण, ई-साक्ष्यों की गुणवत्ता, केस डायरी की प्रगति और लंबित मामलों के आधार पर भी किया जाएगा।
लगातार खराब प्रदर्शन करने वाले थानों के प्रभारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है। समीक्षा में लगातार कमजोर पाए जाने पर थाना प्रभारी को पद से हटाए जाने तक की कार्रवाई संभव होगी।
पीड़ितों की शिकायतों की होगी तत्काल ऑनलाइन जांच
जनसुनवाई के दौरान यदि कोई पीड़ित यह शिकायत करता है कि उसका बयान दर्ज नहीं किया गया, जांच अधिकारी घटनास्थल पर नहीं पहुंचा या विवेचना में लापरवाही हुई है, तो वरिष्ठ अधिकारी एनसीएल पोर्टल पर उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से तत्काल सत्यापन कर सकेंगे।
पोर्टल पर दर्ज वीडियो, केस डायरी, ई-साक्ष्य और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर यह स्पष्ट हो जाएगा कि विवेचक ने जांच प्रक्रिया का पालन किया या नहीं।
डिजिटल पुलिसिंग की ओर बड़ा कदम
एनसीएल पोर्टल के लागू होने के बाद विवेचना व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और निगरानी पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत होगी। अब किसी भी मुकदमे की प्रगति जानने के लिए विवेचक को तलब करने की आवश्यकता नहीं होगी। एक क्लिक में पूरी केस डायरी, ई-साक्ष्य, दर्ज बयान और जांच की स्थिति वरिष्ठ अधिकारियों के सामने होगी। इससे जांच में अनावश्यक देरी, लापरवाही और तथ्यों को छिपाने की संभावना काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।
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