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गोरखपुर।
सड़क हादसे में घायल युवक के इलाज को लेकर एम्स गोरखपुर की इमरजेंसी व्यवस्था सवाल उठाए हैं। घायल युवक की बहन और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर श्वेता राय ने वीडियो जारी कर इलाज में देरी, वरिष्ठ डॉक्टर से समय पर परामर्श नहीं मिलने और न्यूरो सर्जरी विभाग में बेड नहीं मिलने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर एम्स प्रशासन ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मरीज का निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत इलाज किया गया और न्यूरो विभाग में बेड उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे दूसरे अस्पताल रेफर किया गया।
वीडियो जारी कर बताई पूरी घटना
श्वेता राय के मुताबिक, उनके भाई का बुधवार रात करीब 11:30 बजे सड़क हादसा हुआ था। इसके बाद परिजन उन्हें इलाज के लिए एम्स गोरखपुर की इमरजेंसी लेकर पहुंचे। उनका आरोप है कि अस्पताल में जरूरी जांच तो कराई गई, लेकिन रिपोर्ट देखने और आगे के इलाज का निर्णय लेने के लिए काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। उनका दावा है कि अस्पताल पहुंचने के आठ-नौ घंटे बाद भी परिजनों को इलाज की अगली प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
उन्होंने यह भी कहा कि जांच रिपोर्ट एक निजी अस्पताल के डॉक्टर को दिखाने पर वहां से उपचार शुरू करने में देरी की बात कही गई। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
मुख्यमंत्री से की हस्तक्षेप की मांग
वायरल वीडियो में श्वेता राय ने अपने भाई की हालत पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि प्रदेश के बड़े सरकारी अस्पताल में गंभीर न्यूरो मरीजों के लिए बेड उपलब्ध नहीं होंगे तो ऐसे मरीजों का समय पर इलाज कैसे हो सकेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले का संज्ञान लेकर व्यवस्था की समीक्षा कराने की मांग की।
एम्स ने कहा- आरोप पूरी तरह गलतएम्स गोरखपुर के मीडिया प्रभारी डॉ. अरूप मोहंती ने कहा कि संबंधित मरीज को रात में इमरजेंसी में भर्ती किया गया था। चिकित्सकों ने उसका परीक्षण किया, आवश्यक जांच कराई और प्रारंभिक उपचार दिया। न्यूरो सर्जरी विभाग में बेड उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीज को दूसरे चिकित्सा संस्थान के लिए रेफर किया गया।
उन्होंने कहा कि इलाज में किसी प्रकार की जानबूझकर देरी नहीं की गई। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों का उपचार उनकी चिकित्सकीय स्थिति और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार किया जाता है।
डॉ. मोहंती ने सोशल मीडिया पर प्रसारित उस दावे का भी खंडन किया, जिसमें कहा गया था कि शाम पांच बजे के बाद एम्स के न्यूरो सर्जन मरीजों को नहीं देखते। उन्होंने कहा, यह दावा पूरी तरह गलत और मनगढ़ंत है। हमारे न्यूरो सर्जन निर्धारित व्यवस्था के अनुसार मरीजों को देखते हैं। हम सभी मीडिया साथियों और आम लोगों से अपील करते हैं कि अपुष्ट सूचनाओं और अफवाहों को बढ़ावा न दें।
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