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बाल प्रत्यारोपण में एम्स का स्वदेशी नवाचार, साधारण सुई से तैयार इम्प्लांटर को मिली वैश्विक पहचान

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अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ शोध, कम लागत वाली तकनीक से छोटे अस्पतालों में भी हेयर ट्रांसप्लांट होगा आसान
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर के त्वचा एवं यौन रोग विभाग ने बाल प्रत्यारोपण (हेयर ट्रांसप्लांट) के क्षेत्र में कम लागत वाली स्वदेशी तकनीक विकसित कर नई उपलब्धि हासिल की है। विभाग के चिकित्सकों ने सामान्य रूप से उपयोग होने वाली 18जी और 20जी सुई को संशोधित कर ऐसा इम्प्लांटर तैयार किया है, जिससे महंगे उपकरणों पर निर्भरता कम हो सकती है। इस नवाचार पर आधारित शोध को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय ‘जर्नल ऑफ क्यूटेनियस एंड एस्थेटिक सर्जरी’ में प्रकाशित किया गया है।
विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सुनील कुमार गुप्ता की परिकल्पना पर विकसित इस तकनीक में त्वचा में ग्राफ्ट लगाने के लिए अलग-अलग चरणों की आवश्यकता नहीं पड़ती। एक ही प्रक्रिया में स्थान तैयार करने और ग्राफ्ट प्रत्यारोपित करने का कार्य किया जा सकता है। इससे ग्राफ्ट शरीर से बाहर कम समय तक रहता है, जिससे उसकी गुणवत्ता और जीवित रहने की संभावना बेहतर होती है।
छोटे अस्पतालों के लिए भी उपयोगी होगी तकनीक
विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक सीमित क्षेत्र में किए जाने वाले हेयर ट्रांसप्लांट, प्राकृतिक हेयरलाइन के पुनर्निर्माण तथा विटिलिगो (सफेद दाग) की शल्य चिकित्सा में प्रभावी साबित हो सकती है। कम लागत और आसानी से उपलब्ध सामग्री के कारण छोटे अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और सीमित संसाधनों वाले स्वास्थ्य संस्थानों में भी इसे अपनाया जा सकेगा।
चिकित्सकों की टीम ने किया शोध
शोध की अवधारणा, तकनीकी रूपरेखा और डिजाइन प्रो. (डॉ.) सुनील कुमार गुप्ता ने तैयार की। डॉ. कृतिका गुप्ता ने शोध को व्यावहारिक रूप देने और शोध-पत्र तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभाई। डॉ. कौशिकी सुमन ने पांडुलिपि का संपादन तथा डॉ. शिवांगी राणा ने अध्ययन की समीक्षा और प्रूफरीडिंग की। टीम के संयुक्त प्रयास से विकसित इस तकनीक को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली है।
‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बढ़ावा
प्रो. (डॉ.) सुनील कुमार गुप्ता ने बताया कि एम्स गोरखपुर सुरक्षित, प्रभावी और किफायती चिकित्सा तकनीकों के विकास पर लगातार कार्य कर रहा है। यह तकनीक ‘मेक इन इंडिया’ की भावना के अनुरूप है और उपचार की लागत कम करने के साथ स्वदेशी चिकित्सा उपकरणों के विकास को भी बढ़ावा देगी। भविष्य में भी रोगियों को आधुनिक और सुलभ उपचार उपलब्ध कराने के लिए अनुसंधान जारी रहेगा।
उन्नत डर्माटोसर्जरी सुविधाएं उपलब्ध
एम्स गोरखपुर के त्वचा एवं यौन रोग विभाग में एफयूई तकनीक से हेयर ट्रांसप्लांट, पीआरपी थेरेपी, विटिलिगो सर्जरी, मुंहासों व उनके दागों का उपचार, केमिकल पील, माइक्रोनिडलिंग, रेडियोफ्रीक्वेंसी और इलेक्ट्रोसर्जरी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्वदेशी नवाचार कम लागत में गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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