टीबी उन्मूलन में उत्तर प्रदेश देश में अव्वल, नवाचार और एआई तकनीक से मिली नई गति

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– एम्स गोरखपुर में तकनीकी संगोष्ठी
– अपर मुख्य सचिव बोले— अब जोखिम आधारित और जनसंख्या आधारित सक्रिय निगरानी पर देना होगा जोर

गोरखपुर, 14 जुलाई। उत्तर प्रदेश ने 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत देश में सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए टीबी उन्मूलन की दिशा में नई मिसाल कायम की है। प्रदेश में 31 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग, 1.85 लाख नए टीबी मरीजों की पहचान और 52 हजार बिना लक्षण वाले (असिम्प्टोमैटिक) टीबी रोगियों का पता लगाने जैसी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की गई हैं। यह जानकारी मंगलवार को एम्स गोरखपुर में आयोजित टीबी उन्मूलन विषयक तकनीकी संगोष्ठी में दी गई।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा, उत्तर प्रदेश सरकार अमित कुमार घोष (आईएएस) ने कहा कि नवाचार, प्रौद्योगिकी, साझेदारी और जनभागीदारी उत्तर प्रदेश की टीबी उन्मूलन यात्रा के चार मजबूत स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि अब केवल लक्षण आधारित जांच का समय नहीं है, बल्कि शीघ्र पहचान, शीघ्र निदान, शीघ्र उपचार के साथ जोखिम आधारित और जनसंख्या आधारित सक्रिय निगरानी को व्यापक स्तर पर लागू करना होगा। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का दायित्व नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।

एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता, एसएम (सेवानिवृत्त) ने कहा कि संस्थान राज्य सरकार के साथ मिलकर टीबी उन्मूलन अभियान में पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि एम्स अपनी उन्नत चिकित्सीय सेवाओं और अनुसंधान क्षमता के माध्यम से शीघ्र निदान, बेहतर उपचार और रोगियों के बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करने में निरंतर सहयोग देता रहेगा।

तकनीकी संगोष्ठी में राज्य स्वास्थ्य विभाग, राज्य क्षय रोग कार्यालय, निजी स्वास्थ्य क्षेत्र, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामुदायिक संगठनों सहित 60 से अधिक विशेषज्ञों ने भाग लिया। इनमें पद्मश्री से सम्मानित डॉ. राजेंद्र प्रसाद तथा केजीएमयू, लखनऊ के श्वसन रोग विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सूर्यकांत त्रिपाठी सहित देशभर के वरिष्ठ विशेषज्ञ शामिल रहे। संगोष्ठी में निदान, उपचार, निजी क्षेत्र की सहभागिता और सामुदायिक जनभागीदारी विषयों पर अलग-अलग तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें प्राप्त सुझावों को राज्य की आगामी कार्ययोजना का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया।

संगोष्ठी में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 26,722 उच्च जोखिम वाले गांवों में से 25,073 गांव (94 प्रतिशत) अभियान के तहत कवर किए गए। 308 कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों की सहायता से 30.4 लाख छाती के एक्स-रे किए गए, जो निर्धारित लक्ष्य का 111 प्रतिशत रहा। वहीं 1,414 अपफ्रंट एनएएटी जांच केंद्रों के माध्यम से पंजीकृत 8.19 लाख लोगों में से 7.52 लाख (92 प्रतिशत) की जांच पूरी की गई।

संयुक्त निदेशक (टीबी), चेस्ट विशेषज्ञ एवं राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. ऋषि कुमार सक्सेना ने बताया कि 24 मार्च 2026 से शुरू हुए 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान-2.0 ने प्रदेश में टीबी नियंत्रण कार्यक्रम को नई गति दी है। उन्होंने बताया कि जनवरी से जून 2026 के दौरान प्रदेश में 3.37 लाख टीबी मरीजों की अधिसूचना (नोटिफिकेशन) दर्ज की गई, जो वार्षिक 7 लाख के लक्ष्य का 48 प्रतिशत तथा निर्धारित आनुपातिक लक्ष्य का 96 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रभावी निगरानी तंत्र, मजबूत स्वास्थ्य सेवाओं और व्यापक जनभागीदारी का परिणाम है।

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