गोरखपुर विश्वविद्यालय में सांसद रवि किशन बने ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’

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बिना मानदेय निभाएंगे जिम्मेदारी, अभिनय, रंगमंच और फिल्म उद्योग का व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर छात्रों को करेंगे मार्गदर्शन

@राम प्रताप विश्वकर्मा

भाजपा सांसद एवं प्रसिद्ध अभिनेता रवि किशन शुक्ला को शिक्षा के क्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिली है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने उन्हें ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ नियुक्त करने का निर्णय लिया है। इस भूमिका में वे विद्यार्थियों को अभिनय, रंगमंच, फिल्म निर्माण, संचार कौशल और व्यक्तित्व विकास जैसे विषयों पर अपने वर्षों के व्यावहारिक अनुभव से प्रशिक्षित करेंगे।

यह निर्णय कुलपति प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में आयोजित कार्य परिषद की बैठक में लिया गया। बैठक में नई शिक्षा नीति, कौशल आधारित शिक्षा और शैक्षणिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।

एक वर्ष का रहेगा कार्यकाल

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार रवि किशन का प्रारंभिक कार्यकाल एक वर्ष का होगा। इस दौरान वे समय-समय पर विश्वविद्यालय पहुंचकर विद्यार्थियों के साथ संवाद करेंगे, विशेष व्याख्यान देंगे, कार्यशालाओं का आयोजन करेंगे तथा अभिनय एवं फिल्म उद्योग से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी साझा करेंगे। आवश्यकता होने पर उनके कार्यकाल का विस्तार भी किया जा सकता है।

मानद आधार पर करेंगे सेवा

विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह नियुक्ति पूरी तरह मानद (Honorary) आधार पर की गई है। रवि किशन को किसी प्रकार का वेतन, मानदेय या यात्रा भत्ता नहीं दिया जाएगा। उनका योगदान केवल विद्यार्थियों को उद्योग आधारित व्यावहारिक ज्ञान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से होगा।

क्या है ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ की अवधारणा?

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ की व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत किसी क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने वाले विशेषज्ञों को विश्वविद्यालय से जोड़ा जाता है, ताकि वे विद्यार्थियों को वास्तविक कार्य अनुभव, उद्योग की जरूरतों और पेशेवर चुनौतियों से परिचित करा सकें।

कला और रंगमंच के विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

रवि किशन विशेष रूप से ललित कला, संगीत, रंगमंच और नाट्य कला से जुड़े विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करेंगे। वे अभिनय की तकनीक, संवाद अदायगी, कैमरे के सामने प्रस्तुति, मंच संचालन, ऑडिशन की तैयारी, भाव-भंगिमा और फिल्म उद्योग की कार्यप्रणाली जैसे विषयों पर प्रशिक्षण देंगे। इससे छात्रों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त होगा।

संघर्ष से सफलता तक का अनुभव बनेगा प्रेरणा

भोजपुरी सिनेमा से अपने करियर की शुरुआत करने वाले रवि किशन ने हिंदी, दक्षिण भारतीय और अन्य भाषाओं की फिल्मों में भी अपनी अलग पहचान बनाई। अभिनय के बाद उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हुए गोरखपुर से सांसद के रूप में जनता का प्रतिनिधित्व किया। उनका जीवन संघर्ष और सफलता की मिसाल माना जाता है, जो विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी साबित हो सकता है।

रवि किशन ने जताया आभार

नियुक्ति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए रवि किशन ने विश्वविद्यालय प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसका वे पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करेंगे और विद्यार्थियों के अभिनय कौशल को निखारने के साथ उन्हें फिल्म एवं रंगमंच की व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराने का हरसंभव प्रयास करेंगे।

व्यावहारिक शिक्षा को मिलेगा नया आयाम

शिक्षाविदों का मानना है कि उद्योग और शिक्षा जगत के बीच समन्वय स्थापित करने वाली ऐसी पहलें विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख शिक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन को उम्मीद है कि रवि किशन के अनुभव और मार्गदर्शन से कला एवं प्रदर्शन कलाओं के विद्यार्थियों को नई दिशा, बेहतर अवसर और व्यावसायिक दृष्टि प्राप्त होगी।

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