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राजघाट में राप्ती नदी किनारे गिरा गुंबद गिरा, दो अधिवक्ताओं की मौत, सीएमओ के खिलाफ मुकदमा

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जिला अस्पताल में 45 मिनट तक नहीं मिली  एंबुलेंस, भड़का अधिवक्ताओं का आक्रोश

गोरखपुर। राजघाट में राप्ती नदी किनारे स्थित गुरु श्री गोरक्षनाथ घाट पर रविवार को बारिश के बीच वज्रपात से गुंबदनुमा ढांचे का स्लैब भरभराकर गिर गया। मलबे में दबकर दो अधिवक्ता आलोक अस्थाना और संजय सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास के लोगों ने मलबा हटाकर दोनों को बाहर निकाला और जिला अस्पताल पहुंचाया। हालत गंभीर होने पर दोनों को उच्च चिकित्सा केंद्र ले जाने की जरूरत पड़ी, लेकिन करीब 45 मिनट तक एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा। इमरजेंसी चिकित्सकों और अधिवक्ताओं की ओर से लगातार फोन किए जाने के बावजूद एंबुलेंस समय से नहीं पहुंची। इसी दौरान आलोक अस्थाना की हालत बिगड़ गई और उच्च चिकित्सा केंद्र ले जाते समय उनकी मृत्यु हो गई। बाद में देर रात बीआरडी मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान संजय सिंह ने भी दम तोड़ दिया।

जिला अस्पताल में पहुंचे जिलाधिकारी दीपक मीणा।

बारिश से बचने के लिए ढांचे के नीचे खड़े थे

रविवार को तेज बारिश के कारण घाट परिसर में मौजूद कई लोग गुंबदनुमा ढांचे के नीचे खड़े हो गए थे। इसी दौरान वज्रपात हुआ और ढांचा गिर गया। राप्तीनगर निवासी अधिवक्ता आलोक अस्थाना और शक्तिनगर कॉलोनी निवासी अधिवक्ता संजय सिंह मलबे में दब गए। घटना के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और सफाईकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए मलबा हटाया और दोनों घायलों को बाहर निकाला।

गंभीर रूप से घायल दोनों अधिवक्ताओं को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। चिकित्सकों ने उनकी हालत को देखते हुए उच्च चिकित्सा केंद्र भेजने की तैयारी की। इसके बाद एंबुलेंस के लिए प्रयास शुरू हुए। आरोप है कि करीब 45 मिनट तक एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी।

इमरजेंसी चिकित्सकों और मौके पर मौजूद अधिवक्ताओं ने एंबुलेंस के लिए कई बार फोन किया। इसके बावजूद वाहन समय से नहीं पहुंचा। एंबुलेंस की व्यवस्था को लेकर अलग-अलग स्तर पर फोन और बातचीत होती रही। इस देरी को लेकर अधिवक्ताओं का आक्रोश बढ़ता गया।

रोते बिलखते परिवार के लोग।

फोन करते रहे, एंबुलेंस नहीं आई’

जिला अस्पताल में मौजूद अधिवक्ताओं का आरोप था कि गंभीर रूप से घायल दोनों लोगों को तत्काल उच्च चिकित्सा केंद्र भेजने की जरूरत थी। इसके बावजूद एंबुलेंस व्यवस्था में देरी हुई। उनका कहना था कि इमरजेंसी में चिकित्सकों की ओर से भी प्रयास किए गए, लेकिन समय पर एंबुलेंस नहीं मिल सकी। इसी बीच आलोक अस्थाना की हालत ज्यादा बिगड़ गई। उन्हें बाद में उच्च चिकित्सा केंद्र ले जाया गया, लेकिन रास्ते में उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने जिला अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था और एंबुलेंस सेवा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

आलोक की मौत के बाद बढ़ा गुस्सा 

आलोक अस्थाना की मौत की खबर मिलते ही जिला अस्पताल में मौजूद अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में अधिवक्ता अस्पताल पहुंच गए और एंबुलेंस उपलब्ध कराने में हुई देरी को लेकर विरोध जताया। कई घंटे तक अस्पताल में प्रदर्शन चला। इस बीच मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम दीपक मीणा और एसपी सिटी निमिष पाटिल, सीओ कोतवाली ओंकार दत्त भारी पुलिस बल संग मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने अधिवक्ताओं को समझाने का प्रयास किया। अधिवक्ताओं की मांग थी कि पूरे मामले में जिम्मेदारी तय की जाए और एंबुलेंस की देरी की जांच कराई जाए। लापरवाही के लिए सीएमओ पर मुकदमा दर्ज हो।

जीसंजय को बीआरडी भेजा

दूसरे घायल अधिवक्ता संजय सिंह को गंभीर हालत में बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। वहां चिकित्सकों ने उपचार शुरू किया, लेकिन उनकी हालत गंभीर बनी रही। देर रात उपचार के दौरान संजय सिंह ने भी दम तोड़ दिया।

सीएमओ के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा

एंबुलेंस उपलब्ध कराने में कथित देरी और उपचार संबंधी लापरवाही को लेकर आलोक अस्थाना की पत्नी शालिनी अस्थाना ने पुलिस को तहरीर दी। उनकी तहरीर के आधार पर सीएमओ डॉ. राजेश झा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। तहरीर में एंबुलेंस उपलब्ध कराने में देरी और उपचार में लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। मुकदमा दर्ज होने के बाद ही अधिवक्ताओं ने सड़क जाम और प्रदर्शन समाप्त किया।

एंबुलेंस रिस्पॉन्स टाइम खंगालेगा प्रशासन

घटना के बाद डीएम ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में घाट पर गिरे गुंबदनुमा ढांचे की तकनीकी स्थिति के साथ ही एंबुलेंस के रिस्पॉन्स टाइम को भी खंगाला जाएगा। यह देखा जाएगा कि एंबुलेंस के लिए सूचना कब दी गई, संबंधित स्तर पर कब-कब फोन हुए और घायल अधिवक्ताओं को उच्च चिकित्सा केंद्र पहुंचाने में कितना समय लगा। वज्रपात से ढांचा गिरने की घटना को लेकर भी तकनीकी जांच कराई जा रही है। प्रशासन यह भी देखेगा कि घाट परिसर में बने अन्य ऐसे ढांचे कितने सुरक्षित हैं और उनकी तकनीकी जांच की आवश्यकता है या नहीं।

दोनों परिवारों को चार-चार लाख की सहायता

घटना की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले दोनों अधिवक्ताओं के स्वजन को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने घटना पर संवेदना व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

27.85 करोड़ से हुआ है घाट का सुंदरीकरण

गुरु श्री गोरक्षनाथ घाट के सुंदरीकरण पर करीब 27.85 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। ऐसे में हादसे के बाद घाट परिसर में बने गुंबदनुमा ढांचे की मजबूती और सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि प्रारंभिक जांच में वज्रपात को घटना का कारण माना जा रहा है, लेकिन ढांचा किस वजह से गिरा और उसकी संरचनात्मक स्थिति कैसी थी, इसका स्पष्ट निष्कर्ष तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगा।

हादसे से ज्यादा एंबुलेंस की देरी बनी सवाल

घाट पर वज्रपात और ढांचा गिरने की घटना अचानक हुई, लेकिन इसके बाद गंभीर रूप से घायल दोनों अधिवक्ताओं को उच्च चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाने में हुई देरी ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। हादसे में दोनों की मौत के बाद अब जांच का सबसे अहम बिंदु यही है कि गंभीर घायलों के लिए एंबुलेंस की मांग के बाद करीब 45 मिनट तक वाहन क्यों नहीं पहुंचा और इस दौरान किस स्तर पर चूक हुई। इसकी छानबीन जारी है। उधर अधिवक्ताओं के निधन से परिवारीजन में चीख पुकार मची है। सोमवार को उनका दाह संस्कार कराया जाएगा।

 

 

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