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ईद के लिए जुटाए पैसों से आंगनबाड़ी ने 26 घरों को पहुंचाया राशन

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पॉकेट मनी से पम्पलेट छपवा कर कोरोना के बारे में लोगों के बीच पहुंचायी जानकारी

32 वर्षीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का परिवार ने दिया साथ, विभाग ने भी बढ़ाया मनोबल

गोरखपुर । नाम शमा। उम्र 32 साल। पेशे से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता। मानदेय महज 5000 रुपये। ये उस शख्सियत की पहचान है जो कोई बड़ा चेहरा तो नहीं है लेकिन इनके बड़प्पन की चर्चा महानगर के सिधारीपुर इलाके में इन दिनों घर-घर होने लगी है। शमा ने ईद पर सोना खरीदने के लिए जो पैसे जुटाए थे उसको बिना किसी स्वार्थ के जरूरतमंदों पर खर्च कर दिया। ईदी के पैसों से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने 26 घरों तक चावल, दाल, अनाज, आटा, प्याज, तेल, मसाला जैसी आवश्यक चीजें पहुंचाईं। इससे पहले भी वह कोविड-19 संबंधित जागरूकता का पम्पलेट पॉकेट मनी से छपवा कर अपने क्षेत्र में बांट चुकी हैं। 32 वर्षीय इस आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को इस नेकी के काम में उनके परिवार का साथ मिला। विभाग ने इस कार्यकर्ता का मनोबल बढ़ाया और अब इन्हें नजीर के तौर पर पेश किया जा रहा है।
शमा ने बताया कि उन्हें प्रत्येक ईद पर सोना खरीदने का शौक है। उनके अब्बू इस दुनिया में नहीं हैं, इसलिए वह पूरे एक साल तक पैसे इकट्ठा करती हैं और ईद में सोने के गहने की खरीददारी करती हैं। इस बार भी वह करीब 24 हजार रुपये इकट्ठा कर पाई थीं। इसी बीच जब कोविड-19 के बारे में वह समाचारपत्रों में पढ़ने लगी तो उन्होंने तय किया कि समुदाय के स्तर पर जागरूकता लाने का प्रयास करेंगी। शमा ने अपने पास से पम्पलेट छपवा कर सैकड़ों घरों में संपर्क किया और लोगों को बीमारी की भयावहता के बारे में बताया। सरकार द्वारा लॉकडाउन घोषित होने के बाद शमा की चिंता बढ़ गई। शमा ने बताया कि वह अपने गांव की हज़ार की आबादी वाले जरूरतमंद परिवारों को जानती थीं। उन्होंने सोचा कि इस दौर में इन परिवारों का गुजारा कैसे होगा। शमा ने तय किया कि ईदी के पैसे से लोगों की मदद करेंगी। दुकानदार को फोन किया और 26 अदद राहत सामग्री का पैकेट तैयार करने का अनुरोध किया।

पुलिस ने भी दिया साथ

शमा का कहना है कि जब वह घर के बाहर सामान बांटने के लिए निकल रही थीं तो परिवार की चिंता थी कि कहीं पुलिस दुर्व्यवहार न कर दे। जब वह क्षेत्र में निकलीं तो पुलिस ने उनको रोका लेकिन जब पुलिस को भी शमा का मकसद पता चला तो बेहिचक जाने दिया। उनका कहना है कि जरूरतमंदों की मदद कर वह शुकून मिला है जो शायद ईद पर सोने खरीद कर नहीं मिलता। उन्होंने बताया कि जिला कार्यक्रम अधिकारी हेमंत सिंह और सीडीपीओ शहरी क्षेत्र प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की देखरेख में इलाके के उन परिवारों का टीकाकरण कराने में भी वह कामयाब हुईं हैं, जो भ्रांतियों के कारण कभी टीका नहीं लगवाते थे। क्षेत्र में लगातार लोगों से संपर्क के कारण पूरा क्षेत्र उनको परिवार की तरह प्यार देता है। यही वजह है कि परिवार पर आई आपदा को देख उनके कदम तमाम दुश्वारियों के बावजूद खुद को रोक नहीं सके।

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