क्षय रोग उन्मूलन में संचार की अहम भूमिकाः डॉक्टर नंद कुमार

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– बीच में दवा छोड़ने घातक बन टीबी -डीटीओ

– जिला क्षय रोग केंद्र में मीडिया संवेदीकरण बैठक आयोजित

(www.chaipanchayat.com)

गोरखपुर। देश से वर्ष 2025 तक क्षय रोग का उन्मूलन तभी संभव हो पाएगा जब लोग इसके प्रति जागरूक हों। लक्षण दिखते ही स्वास्थ्य केंद्र जाएं और जांच करवाएं। अगर क्षय रोग है तो उसका पूरा इलाज करवाएं। लोगों को जागरूक करने में संचार की अहम भूमिका है और संचार का सबसे सशक्त माध्यम मीडिया ही है। यह बातें कार्यवाहक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नंद कुमार ने कहीं। वह जिला क्षय रोग केंद्र में मीडिया संवेदीकरण बैठक को बतौर अध्यक्ष शनिवार को संबोधित कर रहे थे।

इस मौके पर जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ. रामेश्वर मिश्रा ने मीडिया के माध्यम से जनसामान्य से अपील की कि टीबी रोगियों को चिन्हित करवाने में मदद करें और जो लोग टीबी की दवा ले रहे हैं उन्हें प्रेरित करें कि दवा बीच में बंद न हो। बीच में दवा बंद हो जाने पर टीबी और भी घातक रूप अख्तियार कर लेती है।

कार्यवाहक मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि दो नवम्बर से 11 नवम्बर तक जिले में सक्रिय क्षय रोगी खोजी (एसीएफ) अभियान चलने जा रहा है। इस अभियान के दौरान मेडिकल टीम कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए लक्षित 4.83 लाख आबादी के घर-घर जाएंगी और बीमारी की स्क्रीनिंग करेंगी। जिन लोगों में टीबी के लक्षण दिखेंगे उनकी बलगम जांच की जाएगी और टीबी की पुष्टि होने पर समुचित इलाज दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि टीबी एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज संभव है, बशर्ते समय रहते चिकित्सक को दिखाया जाए और औषधि का कोर्स पूरा किया जाए।
डीटीओ ने जिले में चल रहे कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के दौरान भी राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम पर फोकस बना कर रखा गया। जिले के 11 मरीजों को, गैर राज्यों से आए 10 मरीजों और एक नेपाली मरीज को दवा उपलब्ध करवायी गई। कुल 1168 मरीजों से टेलीफोन पर संपर्क कर सीनियर ट्रिटमेंट सुपरवाइज़र और आशा कार्यकर्ता ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस साल सरकारी क्षेत्र में 8000 जबकि निजी क्षेत्र में 6000 टीबी रोगियों के नोटिफिकेशन का लक्ष्य रखा गया है जिसके सापेक्ष सरकारी क्षेत्र में 3577 टीबी रोगी और निजी क्षेत्र में 2857 टीबी रोगी नोटिफाइड किए जा चुके हैं। एसीएफ कैंपेन से यह आंकड़ा और भी सुधरेगा।

इस मौके पर एसीएमओ डॉक्टर एएन प्रसाद, उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉक्टर विराट स्वरूप श्रीवास्तव, जिला कार्यक्रम समन्वयक धर्मवीर प्रताप सिंह, पीपीएम एएन मिश्रा, विभाग से केके शुक्ला, एम वेग, अरूण कुमार सिंह, दीपेश और अरूण कुमार सिंह मौजूद रहे।

इस साल 15473 टीबी रोगियों को मिला निक्षय पोषण योजना का लाभ

डीटीओ ने बताया कि क्षय रोगियों को इलाज के दौरान पोषण के लिए उनके खाते में प्रति माह 500 रुपए भेजे जाते हैं। इस साल 15473 टीबी रोगियों के खाते में यह रकम भेजी जा चुकी है। जिले में 282 मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट (एमडीआर) और 18 एक्सटेंसिव ड्रग रेसिस्टेंट (एक्सडीआर) के मरीज हैं। इनके इलाज पर खासतौर पर जोर है क्योंकि अगर एक्सडीआर मरीज बीच में दवा छोड़ देते हैं तो उनके टीडीआर (टोटल ड्रग रेसिस्टेंट) होने का खतरा रहता है। टीडीआर की स्थिति में टीबी जानलेवा बन जाती है। उन्होंने बताया कि अगस्त माह से डाक विभाग के सहयोग से टीबी के सैंपल ट्रांसपोर्ट किये जा रहे हैं। करीब 308 सैंपल अब तक डाक विभाग के सहयोग से ट्रांसपोर्ट किये जा चुके हैं।

बाल रोगियों को गोद ले रहे हैं लोग

डीटीओ ने बताया कि टीबी के बाल रोगियों को गोद लेने के लिए भी समुदाय को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिले में अभी तक 41 बाल रोगियों को लोगों ने गोद लिया और उनकी मदद की। इनमें से कुछ बच्चे स्वस्थ भी हो चुके हैं। लोगों को बाल रोगियों को गोद लेने के लिए खुद से आगे आना चाहिए। जिले में 27 ऐसे मरीज हैं जिनमें टीबी के साथ एचआईवी भी है।

बढ़ रही हैं सुविधाएं

• खोराबार, सहजनवां, कैंपियरगंज, बेलघाट और भटहट स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की जांच के लिए ट्रूनाट मशीन लगाई जा रही है जिससे अतिशीघ्र टीबी की श्रेणी डायग्नोस हो सकेगी और समय से इलाज मिल सकेगा।
• 100 शैय्यायुक्त टीबी अस्पताल में रीजनल ट्रेनिंग प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट खोला जा रहा है जहां 8-10 जिलों के अधिकारी प्रशिक्षित होंगे जिससे इस अंचल में बीमारी की रोकथाम में मदद मिलेगी।
• टीबी के बाल रोगियों के लिए अतिशीघ्र डेलामिनाइट नामक दवा आ रही है जिसके आने के बाद उन्हें इंजेक्शन से मुक्ति मिल जाएगी। यह दवा छह से 18 साल तक के बच्चों के लिए है। अन्य दवाओं से अच्छा रिस्पांस मिलेगा।
• टीबी रोगियों की कोरोना जांच भी कराई जा रही है। इस साल अब तक 392 टीबी रोगियों में से 48 की कोरोना जांच करवाई गई जिसमें से कोई भी पॉजीटिव केस नहीं निकला।

यह लक्षण हैं तो जांच करवाएं

• 14 दिनों से अधिक बुखार आए या खांसी आए या फिर दोनों की शिकायत हो
• सीने में दर्द हो रहा हो।
• अगर खाँसी के साथ मुंह से खून आने लगे।
• भूख कम लगे।
• तेजी से वजन घटे।
• बच्चों का वजन न बढ़े।
• रात में अगर पसीना आए।

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