गोरखपुर के टॉप – 10 में शामिल माफिया विनोद उपाध्याय लखनऊ से गिरफ्तार

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गोरखपुर। माफिया विनोद उपाध्याय को गोरखपुर पुलिस ने शुक्रवार की रात लखनऊ के विपुलखंड से स्थित उसके आवास से गिरफ्तार किया। जिले के टॉप 10 बदमाशों में शामिल विनोद पर 25 केस दर्ज हैं। रंगदारी मांगने के एक मामले में विनोद पर कोतवाली गोरखपुर में केस दर्ज किया गया था।
कोतवाली के पुर्दिलपुर निवासी अजय जायसवाल ऊर्जा गैसी फायर प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हैं। 11 जून को कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि जौनपुर के रहने वाले ठेकेदार विनीत सिंह ने उर्जा शवदाह संयंत्र खरीदने के लिए उसने संपर्क किया था। 38 लाख रुपए में डील फाइनल होने के बाद उन्होंने एडवांस के तौर पर आठ लाख रुपए दिए थे। 10 जून को विनीत शवदाह संयंत्र लेने गोरखपुर आए। बकाया रुपए दिए बिना ही संयंत्र ले जाने लगे। मना करने पर उन्होंने विनोद उपाध्याय को फोन मिलाकर दे दिया। विनोद बिना रुपए लिए ही शवदाह संयंत्र विनीत को देने का दबाव बनाने लगे। बात न मानने पर जान से मारने की धमकी दी। रंगदारी मांगने का केस दर्ज कर कोतवाली पुलिस विनोद की तलाश में लगी थी। लखनऊ, गोमती नगर में लोकेशन मिलने के बाद शुक्रवार की रात क्राइम ब्रांच ने माफिया को दबोच लिया।

पीडब्लयूडी कांड के बाद सुर्खियों में आया था विनोद
अपराध के साथ ही राजनीति में भी विनोद उपाध्याय की धमक है। साल 2007 सिविल लाइंस इलाके में लोक निर्माण विभाग कार्यालय के हुए डबल मर्डर के बाद वह चर्चा में आया था। लालबहादुर गैंग ने विनोद उपाध्याय के साथी रिंपुंजय राय और सत्येंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में माफिया अजीत शाही, संजय यादव, इंद्रकेश पांडेय, संजीव सिंह समेत छह लोग जेल गए थे। हालांकि उस हत्याकांड में लालबहादुर यादव के दर्ज नहीं हुआ था। इसके बाद से दोनों गुटों में दुश्मनी और बढ़ गई थी। बाद में लालबहादुर यादव की हत्या कर दी गई थी जिसमें विनोद उपाध्याय को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। गोरखनाथ थाने के हिस्ट्रीशीटर विनोद उपाध्याय पर कुल 25 मामले दर्ज हैं। विनोद की टॉप 10 बदमाश सत्यव्रत राय गैंग से भी अदावत चल रही है।

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