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गोरखपुर। मोबाइल के रेडिएशन का इफेक्ट हो या कैंसर पीड़ितों के उपचार का मामला, देसी गाय का गोबर हर मामले में लाभकारी है। गोरखपुर महोत्सव में पहली बार देसी गाय के गोबर के बने प्रोडक्ट्स के स्टाल भी लगे हैं।
इनमें गोबर से बने भगवान श्री गणेश, श्रीराम, माता सीता सहित कई देवी देवताओं की आकृति बनाई गई है। साथ ही ॐ और कमल का फूल भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस स्टाल पर गोबर से बनी तस्वीर स्वछता का संदेश दे रही है।
गोमय बसती लक्ष्मी, हर शुभ कार्य में प्रयोग
गौ विज्ञान अनुसंधान देवलापार के कलाकारों ने गोबर को ही कलाकृति का रूप दिया है। विनय श्रीवास्तव ने बताया कि इन आकृतियों को बनाने के लिए देसी गाय के गोबर का इस्तेमाल होता है। इसकी प्राकृतिक खासियत है कि एक पतली परत होने से गंध नहीं आती। गोबर के पेस्ट को सांचों में ढालकर आकृति बनती है। फिर इस पर पेंट लगाकर सुंदरता बढ़ाई जाती है। देसी गाय के गोबर की खासियत है कि वह विभिन्न प्रकार के रेडिएशन कम करता है। इसके प्रयोग से कैंसर जैसी घातक बीमारी के कीटाणु भी मर जाते हैं। इसलिए हर शुभ कार्य में गाय के गौरी-गणेश भी बनाए जाते हैं।
महंगा है गोबर का बना कमल का फूल
विनय ने बताया 150 रुपए में गणेश की मूर्ति, सवास्तिक 400 रुपए, श्रीराम 2100, कमल का फूल 2500, मोबाइल स्टैंड 300, गणपति दरबार 500, पेन स्टैंड 250 रुपए में मिल रहा है। चाबी रिंग सहित कई वस्तुएं उपलब्ध हैं।
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