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हॉलीवुड की फिल्में देखकर बैंक रॉबरी का एक्सपर्ट बना फिरोज, जानिए कितनी रोचक है उसके अपराध की कहानी

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गोरखपुर। गोरखपुर एसटीएफ और बस्ती पुलिस के एनकाउंटर में मारा गया फिरोज पठान उर्फ इरफान उर्फ हीरू की कहानी भी पूरी तरह से फिल्मी है। दुनियां के ग्लैमर में वह जमकर जीना चाहता था। इसलिए बैंक डकैती शुरू कर दी।
डकैती के लिए हॉलीवुड की फिल्में देखता था। फिरोज के भांजे इरशाद और उसके करीबी राजदार विजय कश्यप ने पुलिस को बताया कि वह हालीवुड की फिल्में का शौकीन था। ज्यादातर वो बैंक राबरी से जुड़़ी फिल्में देखता था। इसके अलावा समय मिलने पर यू- ट्यूब और इंटरनेट पर ऐसी फिल्में देखता था। उनको रीअल लाइफ में उतारने के प्रयास करता। डकैती के प्लान में वो उन बातों का ख्याल रखता था जिससे फ़िल्म में बदमाश चूक गए।


2 से 3 मिनट में डकैती का प्लान, साथी भी रहते अंजान
घटना को अंजाम देने के लिए फिरोज हमेशा आगे रहता था। अपने साथियों को खुद गाइड करते हुए मोटीवेट करता था। बैंक की फुटेज से पता लगा है कि बैंक वालों को गन पॉइन्ट पर लेने से लेकर कैश कलेक्ट करने में वह तेजी दिखाता था।डाका डालने के बाद फिरोज उन्हीं रास्तों से भागता था जिनसे वह भलीभांति परिचित हो। भले वहां कितना भी ट्रैफिक हो। हर घटना के बाद न्यूज़ पेपर, सोशल मीडिया पर नजर रखता। फिर जो कमियां रह जाती थीं। उनको दूर करने के लिए गाइड करता था।

हर घटना में नए साथी, ज्यादा नहीं देता हिस्सा
घटना में फिरोज अपने साथी बदलता रहता था। महराजगंज, फरेंदा की घटना के बाद बस्ती में उसके नए साथी शामिल हुए। लूट की रकम के ज्यादा हिस्से ना हो इसका भी ख्याल रखता था। इसलिए चार लोगों को साथ, एक को रेकी की जिम्मेदारी देता। रेकी वाला उसे मोबाइल पर पुलिस की लोकेशन से आगाह करता था। सरकारी बैंकों में सिक्योरिटी मजबूत होने से वहां वारदात नहीं कर सका। लेकिन प्राईवेट बैंक की लापरवाही उसके काम आई। टीम लीडर होने की वजह से 25 प्रतिशत लूट का पैसा वह अपने पास रखता था। बाकी रकम स्टेप वाइज सबको बाँटी जाती थी।

पिता की मौत के बाद पहली पत्नी को दिया तलाक
फिरोज पठान उर्फ इरफान उर्फ हीरू ने अपने पिता की मौत के बाद अपनी पहली पत्नी रेहाना को तलाक दे दिया। फिर प्रयागराज को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। मुंबई पहुँचकर शादी डाटकॉम पर अपना बायोडाटा पोस्ट किया। उसकी लाइफ स्टाइल से महिला डॉक्टर उसके करीब आ गई। फिर बाद में उसने लव मैरिज कर लिया। शादी के बाद ज्योति रामजग दुबे का नाम बदलकर हिना पठान रख दिया। उसके साथी विजय कश्यप ने पुलिस को बताया वर्ष 2011 में वह फिरोज पठान के साथ मुंबई से उसके रवि सिंह नाम के दोस्त के बुलावे पर सूरत के सोना व्यापारी को लूटने गया।

घटना के पहले ही दोनों पकड़ लिए गए। जेल से छूटने के बाद फिरोज पठान फिर कभी भी पुलिस के हाथ नहीं लगा। पुलिस का कहना है कि कौशाम्बी और प्रयागराज की लूट में फिरोज का भतीजा वशीम अहमद और साले गुड्डू को पुलिस ने पकड़ा है। पुलिस से बचने के लिए उसने 90 दिन में 30 नंबर बदले। उसकी पत्नी पर किसी को शक ना हो। इसलिए कम बात करता था। लूट के बाद वह जबलपुर से मुंबई गया।

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