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बोले मुख्यमंत्री- शिक्षा से कौशल, नवाचार और उद्यमिता तक बनेगी विकास की नई राह
यूपी में नौ वर्ष में बदलाव की मजबूत नींव, गोरखपुर को ज्ञान और आर्थिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र
बनाने पर जोर
गोरखपुर। मुख्यमंत्री एवं महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर के कुलाधिपति योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में युवाओं की योग्यता, रुचि और क्षमता के अनुरूप उन्हें सीखने, रोजगार पाने, उद्यम खड़ा करने और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए मजबूत ईको सिस्टम तैयार हुआ है। शिक्षा और कौशल से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश, स्टार्टअप, एमएसएमई और उद्योग तक तैयार हुई व्यवस्था युवाओं की क्षमता को अवसर, अवसर को रोजगार और रोजगार को आर्थिक समृद्धि में बदलने में सहायक बन रही है।
वह शुक्रवार को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के पांचवें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के लिए आगे बढ़ने के अवसर अब केवल सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं हैं। शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता, स्टार्टअप, एमएसएमई, उद्योग, डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में संभावनाओं के नए द्वार खुले हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास क्षमता की कोई कमी नहीं है। यहां विशाल युवा शक्ति, कृषि शक्ति, उद्यमिता, प्राकृतिक संसाधन और समृद्ध ज्ञान परंपरा है। जरूरत इन सभी को एक दिशा और अवसर से जोड़ने की है। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश ने इसी दिशा में बदलाव की मजबूत नींव तैयार की है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से कनेक्टिविटी बढ़ी, कनेक्टिविटी से निवेश आया, निवेश से उद्योग और रोजगार के अवसर बढ़े। एमएसएमई और एक जिला-एक उत्पाद योजना ने स्थानीय उत्पादों, कारीगरों और हस्तशिल्पियों को बाजार उपलब्ध कराया है।
शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित न रहे
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षा की यात्रा केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। विद्यार्थी परीक्षा पास करने के बजाय वास्तविक जीवन की समस्याओं को समझें और उनके समाधान खोजने की क्षमता विकसित करें। शिक्षा को समाज की जरूरत और उद्योग की आवश्यकता से जोड़ना होगा। युवा केवल नौकरी पाने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले, नवाचारी और उद्यमी बनें।
उन्होंने कहा कि शिक्षा से कौशल, कौशल से क्षमता, क्षमता से अवसर, अवसर से नवाचार, नवाचार से उद्यमिता, उद्यमिता से रोजगार और रोजगार से आर्थिक विकास की यात्रा को आगे बढ़ाना होगा।
परंपरागत ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ें
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के पास हजारों वर्षों की ऋषि परंपरा से प्राप्त ज्ञान की समृद्ध विरासत है। योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, औषधीय पौधों और पारंपरिक कृषि ज्ञान को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़कर नई संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं। पारंपरिक ज्ञान को पुस्तकों और परंपराओं तक सीमित रखने के बजाय शोध प्रयोगशालाओं से जोड़ने की आवश्यकता है।
उन्होंने आयुर्वेद को आधुनिक निदान, चिकित्सकीय शोध और नई चिकित्सा तकनीक से जोड़ने, औषधीय पौधों को आधुनिक कृषि, जैव प्रौद्योगिकी और औषधि शोध से जोड़कर नई मूल्य शृंखला तैयार करने पर जोर दिया। योग और वेलनेस को निवारक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की बात भी कही।
ज्ञान की अलग-अलग धाराओं के संगम से निकलेगा समाधान
योगी ने कहा कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में पारंपरिक चिकित्सा, आधुनिक चिकित्सा, नर्सिंग, फार्मेसी और कृषि जैसी विभिन्न ज्ञान विधाओं का अध्ययन हो रहा है। इन्हें अलग-अलग विषय मानने के बजाय एकीकृत ज्ञान और नवाचार तंत्र के रूप में देखने की जरूरत है। भविष्य की बड़ी समस्याओं का समाधान किसी एक विषय की सीमा में नहीं, बल्कि विभिन्न ज्ञान विधाओं के संगम से निकलेगा।
उन्होंने कहा कि इन विधाओं के एक साथ आने से बेहतर पेशेवर तैयार होंगे और नए शोध, नवाचार, स्टार्टअप तथा रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
तकनीक का उद्देश्य जीवन को सरल बनाना
मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक का वास्तविक उद्देश्य केवल मशीनों को आधुनिक बनाना नहीं, बल्कि मानव जीवन की समस्याओं का सरल और बेहतर समाधान देना है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निदान से बीमारियों की पहचान तेज और सटीक हो सकती है। टेलीमेडिसिन के माध्यम से दूर-दराज के गांवों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं। डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का बेहतर प्रबंधन संभव है।
इसी तरह कृषि क्षेत्र में ड्रोन, मिट्टी की जांच, स्मार्ट सिंचाई, सटीक खेती, कृषि प्रसंस्करण और जलवायु अनुकूल कृषि तकनीक किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने में सहायक हो सकती है। पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान का डिजिटल दस्तावेजीकरण और शोध डेटाबेस तैयार कर उसे आधुनिक अनुसंधान के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है।
यूपी की संभावनाओं का द्वार है गोरखपुर
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर केवल धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान वाला शहर नहीं है। इसे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और नवाचार के बड़े क्षेत्रीय ज्ञान एवं आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं में तैयार ज्ञान कैंपस की चारदीवारी तक सीमित न रहे। कृषि विद्यार्थियों का शोध किसानों की आय और उत्पादकता बढ़ाने में काम आए। चिकित्सा विद्यार्थियों का शोध गांवों की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाए और फार्मेसी का शोध नई दवाओं तथा स्वास्थ्य नवाचार को जन्म दे। जब विश्वविद्यालय का ज्ञान किसान के खेत, रोगी के जीवन, उद्योग की जरूरत और युवा के उद्यम तक पहुंचेगा, तभी वह समाज की शक्ति बनेगा।
विद्यार्थियों से कहा- जॉब रेडी नहीं, फ्यूचर रेडी बनें
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें केवल नौकरी के लिए तैयार नहीं होना है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होना है। बदलती दुनिया में किसी एक नौकरी के लिए तैयार होना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को ऐसी क्षमता, दृष्टि और इच्छाशक्ति विकसित करनी होगी जो उन्हें बदलती परिस्थितियों के साथ आगे बढ़ने में सक्षम बनाए।
उन्होंने कहा कि युवा खुद से केवल यह न पूछें कि वे अपने लिए क्या कर सकते हैं, बल्कि यह भी सोचें कि अपने ज्ञान और प्रतिभा से समाज और देश के लिए क्या कर सकते हैं। सफलता तब सार्थक होगी जब किसी के ज्ञान से जीवन बेहतर हो, नवाचार से समस्या का समाधान हो और उद्यम से किसी को रोजगार मिले।
सरकार, विश्वविद्यालय, उद्योग और युवा मिलकर बढ़ाएं विकास
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए सरकार, विश्वविद्यालय, उद्योग और युवाओं की साझेदारी आवश्यक है। सरकार ऐसा ईको सिस्टम तैयार करे जहां शिक्षा, निवेश, शोध, स्टार्टअप और रोजगार के अवसर पैदा हों। विश्वविद्यालय समाज और उद्योग की जरूरतों से जुड़ा शोध करें। उद्योग बाजार और अवसर उपलब्ध कराए तथा युवाओं को इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप, रोजगार, शोध और उद्यमिता से जोड़े।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अपने आप में टापू न बनें। वे समाज की जरूरतों के अनुरूप काम करें। विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं, बल्कि ज्ञान, नवाचार, उद्यमिता और आर्थिक परिवर्तन के इंजन बनें।
1932 से विश्वविद्यालय तक की यात्रा को किया याद
मुख्यमंत्री ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना से लेकर महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के संचालन तक की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि गोरक्षपीठ ने देश की भावी पीढ़ी के निर्माण के लिए 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की थी। युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ ने शिक्षा परिषद की नींव रखी। आज परिषद 50 से अधिक शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय का शुभारंभ पांच वर्ष पहले तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने किया था। हालांकि इसकी नींव उससे 12 वर्ष पहले ही पड़ चुकी थी।
पांच वर्ष में 12 से 53 हुए पाठ्यक्रम
विश्वविद्यालय के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. भूपेश कुमार गोयल ने कहा कि शिक्षा का प्रसार और समाज का उत्थान गोरक्षपीठ का संकल्प रहा है। इसी संकल्प के तहत महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। उन्होंने बताया कि स्थापना के पांच वर्ष में ही विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रमों की संख्या 12 से बढ़कर 53 हो गई है।
दो पुस्तकों का विमोचन, प्रतिभाओं का सम्मान
पांचवें स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री ने अंग्रेजी प्रवक्ता डॉ. अनुकृति राज की पुस्तक ‘नेशन एंड एक्सप्रेशन’ तथा ‘अमृतकाल और राष्ट्रवाद’ का विमोचन किया। उन्होंने शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को सम्मानित किया।
बेस्ट हाउस का पुरस्कार ऑरेंज हाउस को मिला। सर्वश्रेष्ठ परफॉर्मर का पुरस्कार यलो हाउस की प्रियंका पुनिया को दिया गया। श्रेष्ठतम परिचर सूर्यदेव भारती, श्रेष्ठतम नर्स सरिता कुमारी, श्रेष्ठतम कर्मचारी शाम्भवी द्विवेदी, श्रेष्ठतम अधिकारी उप कुलसचिव श्रीकांत और श्रेष्ठतम शिक्षक का सम्मान डॉ. सुनील कुमार सिंह को मिला। सीसीआरएस में चयनित आयुर्वेद के विद्यार्थियों रवि रंजन कुमार, विनीत सिंह, अरुण कुमार और प्रभाकर वर्मा तथा आइसीएमआर शोध के लिए चयनित एमबीबीएस विद्यार्थियों अक्षिता मिश्रा, ओम कुमार और सुयश कुमार सहाय को प्रशंसा पत्र प्रदान किया गया।
रक्षाबंधन पर किया पौधरोपण
मंचीय कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके बाद मां सरस्वती, भारत माता, भगवान श्रीगोरक्षनाथ, ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने राष्ट्रगान और सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कुलपति ने मुख्यमंत्री को स्मृतिचिह्न भेंटकर अभिनंदन किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन से हुआ।
समारोह में सांसद रविकिशन शुक्ल, विधायक महेंद्रपाल सिंह, डॉ. जीएन सिंह, अवनीश अवस्थी, प्रो. वीएन राजशेखरन पिल्लई, डॉ. भवतोष विश्वास, डॉ. विजय तिवारी, प्रो. शोभा गौड़, डॉ. वर्षा एम., मेजर जनरल डॉ. अतुल वाजपेयी, कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्यजन, शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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