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एम्स में सात सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण, चार रोगियों की लौटी दृष्टि

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दो रोगियों में कॉर्निया के साथ मोतियाबिंद की सर्जरी भी, वाराणसी के लायंस आई बैंक का मिला सहयोग

गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर ने उन्नत नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान में अब तक सात सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं। इससे दोनों आंखों की कॉर्नियल दृष्टिहीनता से जूझ रहे चार रोगियों को लाभ मिला है। प्रत्यारोपण के बाद रोगियों की दृष्टि में सुधार के साथ उनकी दैनिक गतिविधियों में आत्मनिर्भरता भी बढ़ी है।
कॉर्निया प्रत्यारोपण की सभी प्रक्रियाएं डॉ. नेहा सिंह ने रेजिडेंट डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की टीम के साथ सफलतापूर्वक पूरी कीं। दो रोगियों में कॉर्निया प्रत्यारोपण के साथ ही मोतियाबिंद की सर्जरी भी उसी सत्र में की गई, जिससे उन्हें एक ही चरण में व्यापक उपचार उपलब्ध हो सका।

तीन वर्ष से दोनों आंखों की रोशनी थी प्रभावित
बिहार के 18 वर्षीय युवक को दोनों आंखों की कॉर्नियल डिस्ट्रॉफी की समस्या थी। प्रत्यारोपण के बाद उसकी दृष्टि में उल्लेखनीय सुधार हुआ। इसी तरह कुशीनगर की 65 वर्षीय महिला ने करीब तीन वर्ष पहले दोनों आंखों की रोशनी खो दी थी। कॉर्निया प्रत्यारोपण के बाद उनकी दृष्टि में भी महत्वपूर्ण सुधार दर्ज किया गया।
एम्स के अनुसार, अधिकांश लाभार्थियों को रोजमर्रा के सामान्य कार्य करने में कठिनाई होती थी और उन्हें परिवार के सदस्यों पर निर्भर रहना पड़ता था। उपचार के बाद उनकी कार्यात्मक स्वतंत्रता में सुधार हुआ है और परिवार पर निर्भरता कम हुई है। इससे उनके जीवन की गुणवत्ता में भी सकारात्मक बदलाव आया है।
लायंस आई बैंक का मिला सहयोग
कॉर्निया उपलब्ध कराने में लायंस आई बैंक, वाराणसी का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। एम्स के नेत्र विभाग की फैकल्टी इंचार्ज डॉ. अलका त्रिपाठी, डॉ. रिचा अग्रवाल और डॉ. अमित थंगजाम ने कॉर्निया प्रत्यारोपण सेवाओं को आगे बढ़ाने और जरूरतमंद रोगियों को सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई है।
मेजर जनरल विभा दत्ता के मार्गदर्शन एवं मेंटरशिप में विकसित हो रही यह सेवा गोरखपुर और आसपास के जिलों के रोगियों के लिए उन्नत नेत्र चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। एम्स में कॉर्निया प्रत्यारोपण सेवा के विस्तार से अब गंभीर कॉर्नियल रोगों से पीड़ित रोगियों को उपचार के लिए दूर के बड़े चिकित्सा संस्थानों पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।

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