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गोरखपुर।
गंगोत्री देवी महिला महाविद्यालय में शुक्रवार को “गंगोत्री रंगोत्सव–2025” के अंतर्गत आयोजित “चित्रकला प्रतियोगिता — सृजन और संवेदना का संगम” में छात्राओं की प्रतिभा रंगों के माध्यम से झलकी। पूरे परिसर में कला, संवेदना और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्रीमती रीना त्रिपाठी (वरिष्ठ शिक्षाविद एवं समाजसेवी) ने दीप प्रज्वलन कर किया। उन्होंने कहा कि कला केवल सौंदर्य नहीं, समाज की आत्मा होती है। जब कलाकार अपनी तूलिका से भावनाएँ उकेरता है, तो वह एक विचार और संवेदना को जन्म देता है। जहाँ कला है, वहीं सच्ची मानवता है।
महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. पूनम शुक्ला ने कहा कि गंगोत्री देवी महिला महाविद्यालय शिक्षा के साथ सृजनशील और जागरूक नागरिक तैयार करने का केंद्र है। कला के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश पहुँचाना ही सच्ची शिक्षा है।
इस आयोजन की प्रेरणाशक्ति डॉ. श्रुति त्रिपाठी रहीं। उन्होंने कहा कि रंगों की भाषा सबसे सशक्त होती है, जो शब्दों से नहीं कहा जा सकता, उसे कला सहज कह जाती है।
कार्यक्रम के संचालन में आर्ट क्लब डायरेक्टर श्रीमती दुर्गेश नंदिनी त्रिपाठी, श्रीमती निधि त्रिपाठी और पूर्व सैनिक श्री हरीश मणि त्रिपाठी की भूमिका सराहनीय रही। तकनीकी समन्वय का कार्य श्रुति क्लब प्रोजेक्ट मैनेजर श्री उत्कर्ष त्रिपाठी ने कुशलता से किया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के व्यवस्थापक आशुतोष मिश्र, वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार त्रिपाठी, अभय टिकडेवाल, उत्कर्ष त्रिपाठी, श्रीमती लोरीटा याकूब और प्राचार्य प्रकाश चौधरी की उपस्थिति रही।
डॉ. संजय कुमार त्रिपाठी ने कहा कि कला मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य दोनों का आधार है। जिस समाज में सृजन जीवित रहता है, वह समाज कभी नीरस नहीं होता।

प्रतियोगिता में छात्राओं ने भारतीय संस्कृति, नारी सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और मानवता के मूल्य जैसे विषयों पर उत्कृष्ट चित्र प्रस्तुत किए। रंगों के माध्यम से उन्होंने समाज में जागरूकता और संवेदनशीलता का संदेश दिया।

कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि श्रीमती रीना त्रिपाठी और प्राचार्या डॉ. पूनम शुक्ला ने विजेता छात्राओं को प्रमाणपत्र प्रदान किए। समापन पर पूरा सभागार तालियों की गूंज से गूंज उठा।
















