ग्रामीण भारत के किशोर-किशोरियों का मिथक तोड़ेगा ऑडियोबुक ‘कुछ अनकही बातें’

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– विश्व स्वास्थ्य दिवस पर हुआ रिलीज

गोरखपुर। मासिक धर्म जिसे पीरियड्स भी कहा जाता है क्या होते हैं? साथियों के दबाव को कोई कैसे संभालता है? बच्चे कहाँ से आते हैं? किशोरों के लिए ऐसे यौन स्वास्थ्य से जुड़े कई सरल प्रश्न अनुत्तरित रहते हैं।

यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि, भारत में दुनिया की सबसे बड़ी किशोर आबादी है – 253 मिलियन– और प्रत्येक पांचवें व्यक्ति की आयु 10 से 19 वर्ष के बीच है।, अधिकांश किशोर अभी भी अपने यौन स्वास्थ्य पर मिथक हैं और जानकारी की कमी से जूझते हैं। इस अंतर को भरने के लिए एक नई ऑडियोबुक, कुछ अनकही बातें, बच्चों के द्वारा पॉडकास्ट रूप में निर्मित की गयी हैं।

कुछ अनकही बातें’ उन किशोर लड़कियों और लड़कों की आवाज है, जिन्हें यौन और प्रजनन जैसी स्वास्थ्य और मुद्दों के बारे में सामाजिक मिथक का अनुभव हुआ है। आज, वे इन विषयों की बाधाओं को तोड़ने के लिए अपने घर और सोशल मीडिया पर इस विषय पर बातचीत शुरू की है। मासिक धर्म और मासिक धर्म की स्वच्छता से लेकर प्रारंभिक गर्भावस्था और साथियों के दबाव तक, हर विषय के विभिन्न पहलुओं से निपट रहे है।

ये सारे एपिसोड युवा चैंपियन रिंकू, पिंकी, कीर्ति और स्नेहा द्वारा होस्ट किये गए है, और वो महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और झारखंड राज्यों के अन्य बच्चों को भी अक्सर चर्चा में शामिल करते हैं।

“इन विषयों के बारे में खुलकर बात करना महत्वपूर्ण है। हमें उम्मीद है कि इस ऑडियो बुक के साथ, अधिक से अधिक लोग अपने यौन और प्रजनन स्वास्थ्य के बारे में गैर-निर्णयात्मक और सुरक्षित तरीके से सीख सकेंगे” नवी मुंबई की 19 वर्षीय छात्रा कीर्ति कहती हैं।

ये बच्चे पीपल पावर्ड डिजिटल नैरेटिव्स के जरिए ‘अनकही बातें’ कम्युनिटी का हिस्सा है जहां उन्हें प्लक.टीवी द्वारा मोबाइल स्टोरीटेलिंग और सोशल मीडिया का उपयोग करके अपनी कहानियों को बताने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने एक साल के प्रशिक्षण के दौरान ऐसी जानकारी को रिकार्ड करने का फैसला किया जो अन्य किशोरों को उनके यौन और प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों की पूरी तरीके से समझ प्राप्त करने में मदद कर सकती हैI

“हमने प्रत्येक अध्याय को बनाने का आनंद लिया, क्योंकि इसमें कई मुद्दों को शामिल किया गया है जिन्हें हमने अपने आस-पास देखा है लेकिन कभी बात नहीं की। ज्यादातर लड़कियों, लड़कों और यहां तक कि उनके परिवारों को भी अपने दैनिक जीवन में इन विषयों पर बातचीत शुरू करनी चाहिए” रिंकू, यह गोरखपुर की 18 वर्षीय छात्रा, कहती हैं।

ऑडियोबुक का ट्रेलर शेयरचैट, इंस्टाग्राम, और ट्विटर जैसे पब्लिक प्लेटफॉर्म पर 100,000 व्यूज पार कर चुका हैं। आप इन एपिसोड्स को पॉडकास्टिंग प्लेटफॉर्म पर सुनना शुरू कर सकते हैं और उनके शेयरचैट पर और जानकारी पा सकते हैं।

पीपुल पॉवर्ड डिजिटल नरेटिव्स (पीपीडीएन)

पीपीडीएन किशोर-किशोरियों को विभिन्न मुद्दों के बारे में जागरूक करने का एक संयुक्त प्रयास है। जिससे वह गर्ल कैपिटल (शिक्षा और समानता), हवा की गुणवत्ता, किशोर प्रजनन और यौन स्वास्थ्य, और अपने अधिकारों के बारे में सोशल मीडिया के माध्यम से एक सक्रिय नागरिक के रुप में खुलकर अपनी बात रख सकें। पीपीडीएन का लक्ष्य है कि किशोर-किशोरियाँ स्वयं से जुड़े मुद्दों के बारे में आगे आकर बात करें जिससे समुदायों में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।

पीपीडीएन वर्तमान में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और झारखंड के अल्प शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय है। प्रैक्सिस यूके और उसके सहयोगियों के साथ मिलकर इस पहल के अंतर्गत हर अक्षर, हवा के रक्षक और अनकही बातें नाम के ऑनलाइन समुदायों को तैयार किया गया है।

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