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समाज की अगुवाई करके बिरादरी के बड़े नेता बने डॉ. संजय निषाद, बोले: भाजपा सरकार में पूरी हो निषाद आरक्षण की मांग

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• आशुतोष मिश्र
गोरखपुर। यूपी विधान सभा चुनाव 2022 के पहले निषाद पार्टी के संजय निषाद ने मंत्रीमंडल में जगह देने की बात उठाई है। निषादों के हक के लिए आवाज बुलंद करने वाले संजय निषाद जाति—बिरादरी की नाव पर सवार होकर दिल्ली पहुंचने का ख्वाब सजो रहे हैं। उनका कहना है कि इसी से पूरे देश में निषादों को मान-सम्मान मिल सकेगा।
हाल के दिनों में उन्होंने भाजपा के दिग्गजों संग मुलाकात की है। अपने बेटे संतकबीर नगर के सांसद प्रवीण निषाद और निषाद पार्टी के पदाधिकारियों संग बीजेपी शीर्ष के सामने अपनी बात करते हुए यूपी गवर्नमेंट में डिप्टी सीएम बनाए जाने की मांग रख दी है। 2022 उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव की तै​यारियों की बीच संजय निषाद की मांग से अंदरखाने में काफी हलचल मची है। पूर्वांचल के निषाद नेताओं के बीच अहम किरदार बनकर उभरे संजय निषाद बेहद ही कम समय में सुर्खियों में आ गए हैं।

निषाद पार्टी बनाकर मांग रहे आरक्षण
यूपी के जातिगत समीकरणों पर नजर डालें तो इस राज्य में सबसे बड़ा वोट बैंक पिछड़ा वर्ग का ही है। प्रदेश में सवर्ण जातियां करीब 18 फीसद हैं, जिसमें ब्राह्मण 10 फीसद के आसपास हैं। तो पिछड़े वर्ग की संख्या 39 फीसद के करीब होगी। इसमें यादव 12 फीसद, कुर्मी, सैथवार आठ फीसद, जाट पांच फीसद, मल्लाह चार फीसद, विश्वकर्मा दो फीसद और अन्य पिछड़ी जातियों की तादाद 7 फीसद बताई जाती है। इसके अलावा प्रदेश में अनुसूचित जाति 25 फीसद हैं और मुस्लिम आबादी 18 फीसद के आसपास हैं। निषाद पार्टी बनाकर संजय निषाद ने गोरखपुर सहित प्रदेश के अन्य जिलों में मल्लाह, केवट, मछुआरा बिरादरी के लोगों को एकजुट किया है। निषादों को अनुसूचित जाति का दर्जा ​देने की मांग वह लगातार उठा रहे हैं।

गांव—गांव चला अभियान, बने निषादों के बड़े नेता
एक समय था जब गोरखपुर में बसपा से मंत्री रहे जमुना निषाद की बिरादरी में काफी पैठ थी। एक सड़क हादसे में मारे गए जमुना निषाद को गोरखपुर और आसपास जिलों के निषाद अपना नेता मानते थे। उनके निधन के बाद पूर्व मंत्री रामभुआल निषाद ने बिरादरी का सिरमौर बनने का प्रयास किया। लेकिन वह कामयाब नहीं हो सके। उनके बाद कई अन्य निषाद नेता भी सामने आए लेकिन उन सभी में संजय निषाद सबसे ज्यादा कामयाब रहे। गांव—गांव अभियान चलाकर संजय निषाद ने निषाद बिरादरी के लोगों को अपने साथ जोड़ा। कुछ ही साल के भीतर वह बड़े नेता बन गए।

कसरौल कांड ने दिलाई चर्चा, सबकी जुबां पर नाम
वर्ष 2015 में गोरखपुर के कसरौल कांड के बाद निषाद पार्टी और उसके अगुवा संजय निषाद पूरे देश में चर्चित हो गए। समाचार पत्रों की सुर्खियों में उनका नाम शामिल होने लगा। तत्कालीन सपा सरकार में हुए कांड के बाद उनको तब तत्कालीन सदर सांसद योगी आदित्यनाथ का समर्थन भी मिला। बाद में जब निषाद पार्टी का वर्चस्व बढ़ा तो योगी के सीएम बनने के बाद खाली हुई गोरखपुर लोकसभा की सीट पर संजय निषाद ने अपने बेटे प्रवीण निषाद को चुनाव लड़ाने की मांग रखी। सपा ने दांव लगाया तो प्रवीण निषाद सांसद भी बन गए। बाद में राजनीतिक उतार—चढ़ाव होने पर भाजपा ने प्रवीण को खलीलाबाद—संतकबीर नगर से अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। वर्तमान में वह सांसद हैं। हालांकि गोरखपुर और आसपास जिलों में अन्य पार्टियों में निषाद नेता बड़ी संख्या में हैं। उन सबके बीच संजय निषाद सर्वाधिक चर्चित हैं।

संजय निषाद ने कहा, मुझे बनाया जाए डिप्टी सीएम का चेहरा
निषाद पार्टी के लोग संजय निषाद को पालिटिकल गॉड फादर आफ फिशरमैन कहते हैं। 16 जून को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात करके लौटे संजय निषाद ने कहा है कि उनको आगामी विधान सभा चुनाव में उपमुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित किया जाए। उन्होंने अपनी मांग भी पार्टी के नेताओं के सामने रख दी है। संजय का कहना है कि उत्तर प्रदेश में सभी जातियों के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री बन चुके हैं। इसलिए भाजपा को 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुझे उप मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा कर देनी चाहिए। इससे भाजपा को भी खुशी होगी और निषाद पार्टी भी खुश रहेगी। उन्होंने दावा किया, यूपी में 160 विधानसभा क्षेत्र निषाद बहुल हैं। 70 क्षेत्रों में निषाद समुदाय की आबादी 75 हजार से ज्यादा है। निषाद पार्टी 100 सीट जीतने का संकल्प लेकर बूथ स्तर पर काम कर रही है। हमें मुख्यमंत्री न सही, उप मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाकर चुनाव में उतारे जाने से भाजपा को भारी फायदा होगा। संजय ने दावा कि उन्होंने भाजपा-निषाद गठबंधन के तहत अपनी हिस्सेदारी के तहत निषाद पार्टी को 160 सीटें देने को कहा है।

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