विश्व में सबसे समृद्ध है भारत की संस्कृति: शिव प्रताप शुक्ला

0
505

– गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब के दो दिवसीय ‘मंथन’ कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ
– फोटो जर्नलिस्ट डॉ. राजीव केतन की स्मृति में फोटो प्रदर्शनी, लगे विभिन्न स्टॉल

गोरखपुर। गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की ओर से दो दिवसीय मंथन कार्यक्रम का शुभारंभ शनिवार को निपाल क्लब में हुआ. उद्धघाटन सत्र में आधुनिक विश्व में सनातन संस्कृति और राष्ट्रवाद विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुूए पूर्व केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री, राज्यसभा सदस्य शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि भारत की संस्कृति सबसे समृद्ध है। इतिहासकारों ने भारतीय संस्कृति को भुला दिया था। लेकिन भारतीय संस्कृति विश्वव्यापी है। आज भारतीय संस्कृति का लोहा पूरा विश्व मान रहा है। उन्होंने कहा कि सत्ता से जुड़े कुछ इतिहासकारों ने भारतीय संस्कृति को विदेशियों से ज्यादा नुकसान पहुंचाया, लेकिन अब समय बदल गया है। परिस्थितियां बदल रही हैं। पूरी दुनिया भारत की तरफ देख रही है। भारत की सभ्यता और संस्कृति का व्यापक असर पूरी दुनिया पर दिखने लगा है। उन्होंने अपने संबोधित में किसान आंदोलन का भी जिक्र किया। कहा कि कुछ लोगों के इशारे पर देश में प्रायोजित किसान आंदोलन चलाया जा रहा है। सरकार, किसानों की मूल समस्या का समाधान करने के लिए तैयार है, लेकिन कुछ ताकतें ऐसी हैं जो किसानों और सरकार के बीच वार्ता को विफल कर रही हैं।

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता भारतीय इतिहास लेखन के सचिव डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने कहा कि भारतीय संस्कृति में ही राम और भरत के उदाहरण मिलते हैं। आज भी श्रीलंका की पहचान रावण से नहीं बल्कि राम से होती है। वहां के लोग राम को मानते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में समय की बहुत महत्ता है। क्योंकि यहां समय की गणना पल से होती है। भारत ने वैदिक काल से विश्व को बहुत कुछ दिया है। आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है। उन्होंने कहा कि कोई भी संगोष्ठी आत्मश्लाघा के लिए नहीं होती है। बल्कि किसी मामले को निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए होती हैं। किसी भी समस्या का समाधान तभी हो सकता है जब उस पर समाधान के लिए संवाद हो। समस्या का समाधान तभी होगा जब आपस में बातचीत होती रहे, मंथन भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है। उन्होंने कहा कि मंथन का उद्देश्य हमेशा ही अमृत प्राप्त करने के लिए होता है। आज विश्व के तीन दर्जन से अधिक देशों में भारतीय संस्कृति का प्रभाव साफ दिखाई देता है। चाहे वह अमेरिका हो, लंदन हो, रूस या फिर कंबोडिया, वियतनाम समेत कई देशों में भारतीय संस्कृति की झलक स्पष्ट देखने को मिलती है।

उन्होंने कहा कि आयुर्वेद भारत की देन है और वह आज एक बार फिर दुनिया में स्थापित हो रहा है। आगे कहा कि आज पूरा विश्व इस बात को महसूस कर रहा है कि संयुक्त परिवार जरूरी है ताकि आपसी एकता कायम रह सके। बालमुकुंद ने कहा कि भारतीय संस्कृति चिर पुरातन और नित्य नूतन है। विशिष्ट अतिथि दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ. रत्नेश त्रिपाठी ने कहा कि समाज में परिणाम पाने के लिए संवाद जरूरी है। आज के समय में हमें अपनी संस्कृति के बारे में जानना जरूरी है. हमें किसी भी विदेशी विचारक की आवश्यकता नहीं है। हमारे देश में बहुत सारे विचारक हैं जो भारतीय संस्कृति को बेहतर जानते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजेंद्र प्रसाद ने अपनी बात पूंजी और पूंजीवाद से शुरू की। कहा कि दुनिया पूंजीवाद में फंसती जा रही है। हर पश्चिमी देश में पूंजीवाद हावी है, यहां तक की उनके व्यापार और परिवार में भी पूजी हावी है। उन्होंने कई देशों के राष्ट्र प्रमुखों का उदाहरण भी दिया। कहा कि पूंजीवाद के दुष्परिणाम से बचने के लिए भारतीय संस्कृति ही एकमात्र जरिया है। प्रेस क्लब के अध्यक्ष मार्कण्डेय त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया। मंच का संचालन संजय तिवारी ने किया। प्रेस क्लब पदाधिकारियों ने इस मौके पर अध्यक्ष मार्कण्डेय मणि, उपाध्यक्ष अतुल तिवारी, महामंत्री मनोज यादव, संयुक्त मंत्री आशीष भट्ट, पुस्तकालय मंत्री निखिलेश, कोषाध्यक्ष बैजू गुप्ता, दीपक त्रिपाठी, अंगद प्रजापति और संजय कुमार मंचासीन अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किया।

इस मौके पर पूर्व मेयर डॉ. सत्या पांडेय, डॉ. शैलेंद्र मणि त्रिपाठी, बागीश धर द्विवेदी, गिरीश पांडेय, अशोक चौधरी, बच्चा पांडे, संजय सिंह, धर्मेंद्र सिंह, अजय सिंह, ओंकार द्विवेदी, अरविंद राय, आशीष शुक्ला संगम दुबे, प्रेम पराया, बृजेन्द्र सिंह, विजय मोदनवाल सहित कई लोग मौजूद रहे। प्रथम सत्र में पूर्व वित्त राज्य मंत्री, राज्य सभा सदस्य शिव प्रताप शुक्ल ने स्वर्गीय डॉक्टर राजीव केतन की स्मृति फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन और अवलोकन किया। दूसरे सत्र में मीडिया और आज का समय विषय पर गोष्ठी का आयोजन हुआ। तीसरे सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ मेयर सीताराम जायसवाल ने किया। स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा मंच से दर्शकों से बांधने में कामयाब रही।

Leave a Reply