संविधान की उद्देशिका में रेखांकित न्याय समता और बंधुता हम सबके लिए पुनीत आदर्श: तृप्ति लाल

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संकट एवं चुनौतियों का मुकाबला करने में नारियों की भूमिका अग्रणी:रीना तिवारी

गंगोत्री देवी महाविद्यालय मे हर्ष और उल्लास के साथ मनाया 77वां स्वतंत्रता दिवस

आत्मचिंतन व महान देशभक्तों के लक्ष्य प्राप्ति के लिए हमें प्रतिबद्ध होने का अवसर प्रदान करता है स्वतंत्रता दिवस:सुनीषा श्रीवास्तवा

संवाददाता

गोरखपुर । गंगोत्री देवी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय व स्कूल ऑफ नर्सिंग के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि, सिनर्जी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की प्रबंधक तृप्ति लाल, विशिष्ट अतिथि स्वर सागर संगीत विद्यालय की प्रबंधक सुनीषा श्रीवास्तवा रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता
महाविद्यालय की संरक्षक रीना तिवारी ने की। झंडारोहण के बाद कार्यक्रम को संबोधित करती हुईं मुख्य अतिथि तृप्ति लाल ने ने कहा कि हमने एक ही संविधान में हमारे पूर्ण महान और विशाल देश के अधिकार को पाया है। जो देश में रह रहे सभी पुरुषों और महिलाओं के कल्याण की जिम्मेदारी लेता है। यह अवसर संविधान की आधारभूत जीवन मूल्यों पर गहराई से विचार करने का है। संविधान की उद्देशिका में रेखांकित न्याय समता और और बंधुता हम सबके लिए पुनीत आदर्श है।

विशिष्ट अतिथि सुनीषा श्रीवास्तवा ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस आत्मचिंतन व महान देशभक्तों के लक्ष्य प्राप्ति के लिए हमें प्रतिबद्ध होने का अवसर प्रदान करता है। मुख्य वक्ता रीना तिवारी ने कहा कि संकट एवं चुनौतियों का मुकाबला करने में नारियों की भूमिका अग्रणी रही है। संकट एवं चुनौतियों का मुकाबला करने, अपने शौर्य और पराक्रम में महिलाएं कभी पीछे नही रही हैं। सदा ही आगे बढ़कर चुनौतियों का न केवल समझदारी के साथ सामना किया है, बल्कि अपने साहस एवं सूझबूझ से परास्त भी किया है। जब भी राष्ट्र एवं विश्व मानवता पर संकट के बादल छाएं हैं। महिलाओं के शौर्य ने ही प्रचंड प्रभजन बनकर इन्हें छिन्न भिन्न किया हैं। आज नारी हर क्षेत्र में पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करने की क्षमता रखती है। शिक्षा, विज्ञान, राजनीति, धर्म, समाज सेवा और सेना में भी आज महिलाएं प्रशंसनीय भूमिका निभा रही हैं।

महाविद्यालय के व्यवस्थापक आशुतोष मिश्र ने कहा कि हमें अपने भारत देश को एक सफल, विकसित और स्वच्छ देश बनाना होगा। देश की गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, ग्लोबल वार्मिंग, असमानता जैसे चीजों को अच्छी तरह समझना होगा और इनका हल निकालना होगा। खेद का विषय है कि आजादी के इतने वर्षों के बाद भी हम आज अपराध, भ्रष्टाचार और हिंसा जैसी समस्याओं से लड़ रहे हैं। अब समय आ गया है कि हमें दोबारा एक साथ मिलकर अपने देश से इन बुराइयों को बाहर निकाल फेंकना है। यह वैसे ही होगा जैसे कि स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजों को देश से निकाल दिया था। सामाजिक समरसता व सौहार्द्र के प्रतीक स्वाधीनता दिवस का यह शुभ अवसर हमें संविधान निर्माताओं की याद दिलाता है।

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. पूनम शुक्ला ने समस्त सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का संकल्प लेकर भारतीय लोकतंत्र को सशक्त बनाने में सहभागी बनें।उ न्होंने कहा कि वैदिककाल में महिलाओं को न केवल ज्ञान प्रदान किया जाता था, बल्कि उन्हें युद्ध की कला एवं कुशलता में पारंगत होने के लिए विधिवत प्रशिक्षण भी दिया जाता था। अपने देश का प्राचीन इतिहास महिलाओं के शौर्य एवं पराक्रम से भरा पड़ा है। ऐसी अनगिनत घटनाएं हैं जिनमें महिलाओं ने अपनी रणकुशलता एवं समझदारी से हारी हुई बाजी को जीत में बदल दिया और इतिहास की धारा को मोड़ने में सक्षम और समर्थ हो सकीं। भारत के स्वतंत्रता का इतिहास भी इस तथ्य का साक्षी है। वर्ष 1857 से वर्ष 1947 तक लंबे स्वतंत्रता संघर्ष में देशवासियों के ह्रदय में देशभक्ति एवं क्रांति के भावों को आरोपित करने वाले युवाओं के साथ युवतियों की भूमिका भी सराहनीय रही। नारी शिक्षा का देश में जितना प्रचार प्रसार हुआ है। उसका श्रेष्ठ परिणाम सभी के सामने है। नर्सिंग की प्राचार्य लोरीटा याकूब ने देशहित मे महिलाओं की भागीदारी व जिम्मेदारियों के साथ आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।

इस अवसर पर महाविद्यालय के व्यवस्थापक आशुतोष मिश्र व प्राचार्य डॉ. पूनम शुक्ला के साथ नर्सिंग की प्रधानाचार्य लौरिटा याकूब ने सर्वप्रथम अतिथियों का स्वागत कर भारत मां को नमन करते हुए वीर सपूतों को श्रद्धा सुमन अर्पित किया। इसके बाद सभी लोगों ने ध्वजारोहण किया । राष्ट्रगान के बाद हुए दीप प्रज्ज्वलन से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ। देशभक्ति गीत, भाषण के साथ देश के वीर सपूतों को याद किया गया। वंदे मातरम, जय हिन्दी, भारत माता की जय के उद्घोष के साथ पूरा वातावरण देशभक्ति से ओतप्रोत हो गया। कार्यक्रम मे नर्सिंग,एनसीसी और एनएसएस की छात्राओं की विशेष भूमिका रही। वक्ताओं ने जहां अपने भाषणों से आजादी की लड़ाई पर प्रकाश डाला। वहीं गीत और नृत्य के जरिए छात्राओं ने सभी स्वतंत्रता आंदोलन की वीरगाथाओं की याद दिलाई।


कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रिया पांडेय ने किया। इस दौरान डॉ. संगीता पांडेय , डॉ. प्रियंका त्रिपाठी,डॉ. आभा गुप्ता, डॉ. प्रिया श्रीवास्तव, डॉ. प्रत्या उपाध्याय,डॉ. कामिनी सिंह,डॉ.सुषमा मिश्रा, डॉ. शीला तिवारी, डॉ.सीमा श्रीवास्तव ,शालिनी सिंह, शालिनी त्रिपाठी, आकाश रैना, नीतू यादव, श्वेता जोशवा, चंद्र लता, संचिता सेन गुप्ता, प्रियंका दीक्षित, फिजियोथेरेपी के विभागाध्यक्ष एमएल यादव, नित्यानंद तिवारी , अशोक सिंह , अर्जुन यादव , अर्जुन यादव, संगीता मिश्रा, सावित्री तिवारी , देवेंद्र चौधरी,सरोज मिश्रा, अनिल पांडेय , इंदिरा,राज लक्ष्मी, दयानंद सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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