मनीष हत्याकांड: जांच करने गोरखपुर पहुंची सीबीआई टीम, रामगढ़ताल थाने का रिकॉर्ड खंगाला

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गोरखपुर। कानपुर के रीयल स्टेट कारोबारी
मनीष गुप्ता हत्याकांड की जांच करने गुरुवार की देर शाम सीबीआई टीम गोरखपुर पहुंची। 6 सदस्यों वाली टीम ने पुलिस लाइन से गाड़ी ली। रामगढ़ताल थाने जाकर घटना की जानकारी ली। टीम ने एफआईआर की कापी और अन्य डिटेल लेने के बाद थाना परिसर में खड़ी पुलिस जीप का निरीक्षण किया। सीबीआई के गोरखपुर पहुंचने के बाद आरोपित पुलिसकर्मियों और उनके मददगारों में हड़कंप मच गया है।

होटल से लेकर मेडिकल कॉलेज तक होगी जांच

शुक्रवार को सीबीआई होटल सहित अन्य स्थानों की जांच कर सकती है। गोरखपुर आने से पहले सीबीआई ने रामगढ़ताल पुलिस को नोटिस भेज कर दी केस अपने हाथ में लेने की जानकारी दी थी। नोटिस में सीबीआई ने केस की जांच करने की जानकारी देने के साथ ही रामगढ़ताल पुलिस से सहयोग की अपेक्षा की थी। इस केस से जुड़े संबंधित लोगों के बारे में पूरी जानकारी और दस्तावेज लेकर गुरुवार को टीम गोरखपुर आई। गोरखपुर पहुंचते ही टीम ने अपनी जांच शुरू कर दी है। सबसे पहले टीम रामगढ़ताल थाने पर ही पहुंची है।

27 अक्टूबर की रात कानपुर के प्रापर्टी डीलर मनीष गुप्ता की रामगढ़ताल के होटल में पीटकर हत्याकर दी गई थी। इस मामले में मनीष गुप्ता की पत्नी मीनाक्षी ने रामगढ़ताल थाने पर तैनात रहे इंस्पेक्टर जेएन सिंह, दरोगा अक्षय मिश्र सहित छह पुलिसवालों पर पति की हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। सभी आरोपित जेल में हैं। जेल में उनकी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। एसआईटी पर भरोसा न होने पर मनीष गुप्ता की पत्नी मीनाक्षी ने सीबीआई जांच की मांग की। वह इसके लिए सुप्रीम कोर्ट भी गई हैं। सुप्रीम कोर्ट में 12 नवंबर को इस पर सुनवाई तय थी। लेकिन इसके पहले ही सीबीआई ने जांच शुरू कर दी। आरोपित पुलिस कर्मचारियों की न्यायिक हिरासत 17 नवंबर को पूरी हो रही है। इसके पहले सीबीआई उनको अपनी हिरासत में ले लेगी। इसकी संभावना जताई गई है।

मनीष गुप्ता हत्याकांड कब, क्या हुआ?

27 सितंबर: पुलिस की पिटाई से मनीष गुप्ता की मौत।

28 सितंबर : इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह सहित छह पुलिस कर्मियों पर हत्या का केस।

29 सितंबर: गोरखपुर पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू की।

30 सितंबर: विवेचना क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर को सौंपी गई।

01 अक्टूबर: केस कानपुर एसआईटी को ट्रांसफर हुआ।

02 अक्टूबर: एसआईटी कानपुर ने गोरखपुर पहुंचकर शुरू की जांच।

02 नवंबर: सीबीआई लखनऊ की टीम ने मुकदमा दर्ज किया।

11 नवंबर: सीबीआई लखनऊ की 6 सदस्यीय टीम गोरखपुर आई।

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