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चिड़ियाघर में पौधे नहीं, अब लगाए जाएंगे पेड़

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गोरखपुर और बस्ती मंडल में दूसरी बार होगा ट्री ट्रांसप्लांटेशन
– इसके पहले मेडिकल रोड पर पीडब्ल्यूडी विभाग ने लगाए थे खजूर के पेड़

गोरखपुर। निर्माणाधीन शहीद अशफाक उल्ला खॉ प्राणी उद्यान में पौधे नहीं बल्कि पेड़ रोपे जाएंगे। वह भी एक दो साल के नहीं बल्कि 10 से 15 साल के पेड़। इसके अलावा ढाई से तीन साल के विभिन्न प्रजाति के पेड़ भी रोपे जाएंगे। कुल 220 पेड़ का ट्रांसप्लांटेशन किया जाएगा। असल में यह सब कवायद 14 जनवरी को प्राणी उद्यान के लोकार्पण समारोह के पूर्व उसे हर भरा करने के लिए किया जा रहा है।
14 जनवरी खिचड़ी पर चिड़ियाघर के लोकार्पण की योजना बनाई जा रही है। पिछले दिनों दौरे पर आए प्रमुख सचिव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग सुधीर गर्ग ने प्राणी उद्यान का निरीक्षण के दौरान प्राणी उद्यान में किए गए प्लांटेशन को भी देखा था। वन विभाग ने काफी अच्छा काम किया था लेकिन बाड़ों और बाड़ों के मध्य किए गए पौधरोपण से वह खुश नहीं दिखे। उनका कहना था कि प्राणी उद्यान में हरियाली का अभाव है। उन्होंने डीएफओ अविनाश कुमार को जल्द से जल्द कुछ ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए।


और डीएफओ ने लिया ट्री ट्रासप्लांटेशन का निर्णय
समयाभाव देखते हुए डीएफओ अविनाश कुमार ने ‘ट्री ट्रांसप्लांटेशन’ का निर्णय लिया। ट्रांसप्लांट या प्रत्यारोपण का अर्थ है कि किसी भी पेड़ को काटने के बजाय उसे जड़ समेत मशीनों द्वारा उखाड़ कर किसी दूसरी जगह लगाया जाए। इस विधा में 10 से 15 साल की उम्र के पेड़ को दूसरे स्थान पर ट्रांसप्लांटेशन कर सफलता पूर्वक रोपा जा सकता है। गोरखपुर-बस्ती मण्डल में इस विधा का इस्तेमाल दूसरी बार किया जाएगा। इसके पहले लोक निर्माण विभाग ने मेडिकल रोड पर खजूर के पेड़ कोलकाता से मंगवा कर डिवाइर के मध्य लगाएं हैं। वन एवं पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था हेरिटेज फाउडेशन के ट्रस्टी नरेंद्र कुमार मिश्र कहते हैं कि यह एक अच्छा प्रयास है। यदि यह सफल हुआ तो सड़क निर्माण के कारण काट दिए जाने वाले पेड़ों को काटने के बजाए कार्यदायी संस्थाओं से उनके ट्रांसप्लांटेशन का दबाव बनाया जा सकेगा।


प्रदेश के कई जिलों से मंगाए जा रहे पेड़
डीएफओ ने बताया कि 30 की संख्या में 10 से 15 साल पुराने कचनार, बोतल ब्रस, पाकड़, बालम खीरा, बड़ी सावित्री, मौलश्री, कंजी, कदम्ब, प्लूमेरिया अल्बा, पेल्टोफोरम, कनक चम्पा, स्पोथ्रोदिया, जामुन, अर्जुन, चक्रेसिया, टेबेदुइया, फाइकस, कैसिया ग्लूका प्रजाति के पेड़ मंगाए जा रहे हैं। इनमें 190 पौधे ढाई से तीन साल की उम्र की होंगे। 1017 बेलवाले पौधे हैं जिन्हें लगाया जाएगा। इस पर तकरीबन 10 लाख रुपये की धनराशि खर्च होगी। इसके अलावा इन पौधों के ट्रांसप्लांटेशन पर 2 लाख के आसपास रकम खर्च होगी।

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