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गोरखपुर। कोविड संक्रमण के बीच जहां हर कोई सहमा हुआ है। वहीं कुछ देर के लिए गोरखपुर जंक्शन का माहौल काफी खुशनुमा रहा। शनिवार की रात सेकेंड क्लास गेट के सामने पोर्टिको में प्रसव पीड़ा से कराह महिला के बारे में जानकारी मिलने पर आरपीएफ की महिला दरोगा और कांस्टेबल ने तत्परता दिखाई। तत्काल जंक्शन पर महिला के बच्चे का प्रसव कराया गया। रेलवे अस्पताल के डॉक्टरों ने जांच के बाद जच्चा—बच्चा को स्वस्थ पाया। महिला यात्री और उनके पति को सुरक्षित यात्रा करने की अनुमति दी।
रात में परिजनों संग गांव लौट रही थी आयशा खातून
पश्चिम चंपारण के सहोदरा, बासपुर पिपरा निवासी फरमान के बेटे फुटारे परिवार के साथ हरदोई में रहते हैं। फुटारे की पत्नी आयशा खातून गर्भवती थीं। तबियत खराब होने पर वह अपने ससुर के साथ पैतृक गांव लौट रही थीं। आयशा किसी ट्रेन से गोरखपुर आईं। शनिवार को उनके ससुर किसी बस से गोरखपुर पहुंचे। रात में कोई सवारी नहीं मिली तो ससुर और बहू सुरक्षा के लिए रेलवे स्टेशन के गेट नंबर दो के सामने पोर्टिको में जाकर बैठ गए।
प्रसव पीड़ा होने पर पहुंचीं आरपीएफ की महिला दरोगा
रात में करीब 10 बजकर 30 मिनट पर महिला को प्रसव पीड़ा होने लगी। महिला के दर्द से कराहने पर सेकेंड क्लास गेट मशीन पर तैनात कांस्टेबल रविंद्र कुमार ने इसकी इसकी सूचना प्रसारित की। बताया कि एक महिला प्रसव पीड़ा से तड़प रही है। उसे तत्काल हेल्प की आवश्यकता है। प्लेटफार्म पर ड्यूटी में मौजूद आरपीएफ की महिला दरोगा प्रियंका सिंह, हेड कांस्टेबल देवी बख्श सिंह और यात्री मित्र मनोज वर्मा संग पहुंचीं। महिला सफाई कर्मचारी उर्मिला और सलमा सहित अन्य महिलाओं की मदद से महिला के लिए कपड़ों का सेफ रूम तैयार कर दिया। 10 बजकर 45 मिनट पर महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया। रेलवे के डॉक्टर विवेक शुक्ला ने बच्ची और मां की जांच करके आवश्यक दवाएं मुहैया कराईं। दोनों को स्वस्थ बताकर डॉक्टर ने आगे की यात्रा की अनुमति दे दी।
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